दो हजार रुपए रिश्वत लेने के 13 साल पुराना मामले में लिपिक को 4 साल कठोर कैद की सजा

रिश्वत लेने के मामले में भ्रष्टाचार निवारण अदालत ने पालिका के तत्कालीन कनिष्ठ लिपिक को 4 साल कठोर कैद व दस हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया है।

By: shailendra tiwari

Published: 25 Apr 2018, 05:37 PM IST

Kota, Rajasthan, India

कोटा . रिश्वत लेने के 13 साल पुराने मामले में भ्रष्टाचार निवारण अदालत ने बुधवार को मांगरोल नगर पालिका के तत्कालीन कनिष्ठ लिपिक को 4 साल कठोर कैद व दस हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया है। जबकि अधिषाषी अधिकारी(ईओ) की मृत्यु होने पर उनके खिलाफ कार्यवाही ड्रॉप की गई।

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मांगरोल निवासी फरियादी दीपक पारेता ने 7 मई 2005 को एसीबी बारां में शिकायत दी थी। जिसमें बताया था कि वह एलआईसी एजेंट का काम करता है। उसका बारां रोड पर एक भूखंड है। जिसकी रजिस्ट्री करवाने के लिए पत्रावली नगर पालिका में दे रखी है।

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उस पर अधिशाषी अधिकारी रतनलाल खन्ना के हस्ताक्षर होने है। लेकिन वह हस्ताक्षर नहीं कर रहे। इस संबंध में जब वह खन्ना से मिला तो उन्होंने दो हजार रुपए रिश्वत की मांग की। इस शिकायत पर एसीबी ने सत्यापन कराया। सत्यापन में मांग सही पाए जाने पर ट्रेप की कार्यवाही की गई। लेकिन खन्ना ने रिश्वत राशि स्वयं न लेकर अपने कनिष्ठ लिपिक भवानी शंकर धााकड़ को दिलवाई।

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एसीबी ने भवानी शंकर को दो हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। पकडे जाने के बाद उसने यह राशि ईओ रतनलाल खन्ना के लिए लेना बताया। इस पर एसीबी की टीम ने दोनों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ चालान पेश किया था।

सहायक निदेशक अभियोजन एहसान अहमद ने बताया कि सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से दस गवाहों के बयान दर्ज करवाए गए। इधर सुनवाई के दौरान ईओ रतनलाल खन्ना की 15 दिसम्बर 2009 को मूृत्यु होने से उनके खिलाफ कार्यवाही ड्रॉप की गई। वहीं कनिष्ठ लिपिक भवानी शंकर धाकड़ को दोषी पाए जाने पर 4 साल कठोर कैद की सजा व दस हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया है।

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