रसोई में आलू पराठे तो बाजारों में गजक-पिंडखजूर की महक

रसोई में आलू पराठे तो बाजारों में गजक-पिंडखजूर की महक

Zuber Khan | Publish: Dec, 08 2017 01:11:28 AM (IST) Kota, Rajasthan, India

सर्दी में ऊर्जा व राहत देने वाली खाद्य साम्रगी पंसद की जा रही है। घर की रसोई आलू पराठे, पकौड़ी से महक रही है तो बाजारों में गजक, पिंडखजूर की डिमांड बढ

कोटा . शीतलहर ने सर्दी के तेवर तीखे कर दिए। तीन दिन से सूर्यदेव के दर्शन तक नहीं हुए। जहां सुबह 6 बजे से दिनचर्या शुरू हो जाती थी, अब 8 बजे तक लोग रजाइयों में दुबके रहते हैं। सर्दी से बचाव के लिए अलाव का सहारा लिया जा रहा है, वहीं स्वाद भी बदल गया है। सर्दी में ऊर्जा व राहत देने वाली खाद्य साम्रगी पंसद की जा रही है। घर की रसोई आलू पराठे, पकौड़ी से महक रही है तो बाजारों में गजक, पिंडखजूर की डिमांड बढ़ गई। विक्रेताओं की मानें तो तीन-चार दिनों में गजक, पिंडखजूर व मूंगफली की ग्राहकी में तेजी आई है। जहां तक भावों का सवाल है, खासा बदलाव नहीं आया। बाजार में अलग-अलग तरह की गजक अलग-अलग भावों में मिल रही हैं।

 

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यूं रहे भाव

गजक विक्रेता सुरेश कुमार बताते हैं कि मावा बाटी 240 से 250 रुपए प्रति किलो के भाव से बेची जा रही है, वहीं रेवड़ी 150 से 160 रुपए प्रति किलो है। मूंगफली पट्टी 150-160 रुपए प्रति किग्रा, बिस्किट पराठे 200, लड्डू 150 रुपए प्रति किलो के भाव से बेचे जा रहे हैं। दुकानदारों का मानना है कि अलग-अलग क्षेत्रों में भावों में कुछ अंतर संभव है।

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पिंड खजूर की बढ़ी मांग
विक्रेता राजेन्द्र पारेता बताते हैं, दो तीन दिनों में पिंड खजूर की खपत में करीब 20 से 25 किलो का इजाफा हुआ है। आमतौर पर 70 से 80 किलो खजूर बिक जाते हैं, लेकिन इन दिनों प्रतिदिन एक क्विंटल बिक्री हो रही है।

 

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परोसेंगे पीपल पाक-नारंगी पाक

मंदिरों में भी सर्दी का असर दिख रहा है। अब भगवान को रजाई ओढ़ाई जा रही है। पालनहार के भोग में सेवकों ने बदलाव कर दिया है। नींबू, अदरक, गुड़, मेवे का भोग लगाया जा रहा है। महाप्रभुजी का बड़ा मंदिर के प्रबन्धक गोस्वामी विनय बाबा बताते हैं कि देव प्रबोधिनी के बाद से यह बदलाव आ जाता है। 11 दिसम्बर से ठाकुरजी को सुबह के भोग में पीपल पाक व शाम को नारंगी पाक अर्पित किया जाएगा। तलवंडी स्थित राधाकृष्ण मंदिर में रात को दूध का भोग लगाते थे, अब मेवे के लडडू, मठरी का भोग लगाना शुरू कर दिया है। शृंगार में भी बदलाव किया है। अब गर्म वस्त्र भगवान को पहनाए जा रहे हैं।

 

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