घटना के समय साक्ष्य के साथ सही का साथ दें

कोटा. एससी-एसटी कोर्ट के न्यायाधीश गिरीश अग्रवाल ने कहा कि देश में कानून ढाल की तरह है, तलवार नहीं।

By: Anil Sharma

Published: 06 Nov 2017, 01:28 AM IST

कोटा . एससी-एसटी कोर्ट के न्यायाधीश गिरीश अग्रवाल ने कहा कि देश में कानून ढाल की तरह है, तलवार नहीं। समाज में किसी भी घटना के समय साक्ष्य के साथ सही पक्ष का साथ दें। बच्चों के साथ कोई अन्याय हो तो सहते नहीं रहें, सच्चाई को सामने लाने का साहस करें। अपराध सहना भी जुर्म के समान है। जब समाज में कानूनी जागरूकता आएगी तो नागरिक संकोच छोडेंग़े और अपराधी डरेंगे।
रविवार को रंगबाड़ी स्थित मधु स्मृति संस्थान में विधिक सेवा सप्ताह-2017 का शुभारंभ करते हुए उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा कि विधि शिक्षा को जीवन से जोडें़। हम अधिकारों की रक्षा तो करते हैं, लेकिन दायित्व भूल जाते हैं। बीमारी होने पर हम सामान्य उपचार की जानकारी रखते हैं, वैसे ही कानून की जानकारी भी रखें। परिवार, स्कूल या संस्था के संचालन में हम नियमों का पूरा पालन करते हैं, जबकि समाज चलाने के लिए नियमों से विमुख हो जाते हैं। देश में कानून की पालना करने में आज भी जागरूकता की कमी है।
एसीजीएम कोर्ट-7 के न्यायाधीश राकेश कटारा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने देश में राष्ट्रीय स्तर (नाल्सा) से तालुका स्तर तक कानूनी जागरूकता पैदा करने के लिए विधिक सेवा का दायित्व न्यायपालिका को दिया। इनमें तीन चरण हैं। ऐसे परिवादी जिनके ऊपर मुकदमा दर्ज कर दिया, लेकिन वो मुकदमा लडऩे में सक्षम नहीं हैं, उनके सामंजस्य के लिए लोक अदालत है। हर माह इनमें दोनों पक्षों की सुलह-वार्ता से समाधान किया जाता है। विधिक सहायता शिविर से कानूनी जानकारी आम आदमी तक पहुंच रही है।
जरूरतमंदों को मिलती है नि:शुल्क मदद
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पूर्णकालिक सचिव न्यायाधीश प्रमोद कुमार शर्मा ने कहा कि विधिक सप्ताह में कई उपयोगी जानकारियां आम जनता तक पहुंचती हैं। बच्चे, महिला, वरिष्ठ नागरिक, बुजुर्ग, विधवा-विधुर, परित्यक्ता व पीडि़तों को पैनल वकीलों द्वारा नि:शुल्क मदद की जाती है। गरीब के पास अधिवक्ता की फ ीस न हो तो उन्हें नि:शुल्क सेवा दी जाती है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, 'कनेक्टिंग टू सर्वÓ पर अमल करते हुए डोर-टू-डोर विधिक जानकारी, शिविर तथा परिवहन बसों आदि से जन-जागरूकता लाई जाएगी।
समारोह में पहुंचे 15 से अधिक जज
उद्घाटन समारोह में महिला उत्पीडऩ कोर्ट-1 के न्यायाधीश मनीष अग्रवाल, एसीजीएम-1 की न्यायाधीश दमयंती पुरोहित, एसीजीएम-5 के न्यायाधीश संतोष जाट, एसीजीएम-6 के न्यायाधीश सुमरथ लाल मीणा, दक्षिण-2 की जज सीमा अग्रवाल, दक्षिण-3 के जज रमेश करौल, दक्षिण-5 कोर्ट की जज हेमलता भारती व उत्तर-2 के जज अंकुर अग्रवाल, उत्तर-3 की जज गरिमा बंसल, उत्तर-5 की जज शिल्पी बंसल, रेलवे कोर्ट के न्यायाधीश अटल चम्पावत, प्रशिक्षु जज जया अग्रवाल एवं रचना वैष्णव, साइकोलॉजिस्ट डॉ. पूर्ति शर्मा व दीप्ति राजावत, फ ॉरेंसिक लैब के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विनोद गर्ग, पैनल सदस्य, चाइल्ड लाइन, स्काउट गाइड व एनजीओ के प्रतिनिधि, स्कूल व कॉलेज विद्यार्थी मौजूद रहे।

Anil Sharma
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