Corona effect : लॉकडाउन के दौरान मरीजों के सामने आ खड़ी हुई नई मुसीबत...

महावीर नगर डिस्पेंसरी में प्रतिदिन 500 मरीजों की ओपीडी...

By: Dhirendra

Updated: 18 Apr 2020, 08:07 PM IST

कोटा. मेडिकल कॉलेज की सुपरस्पेशलिटी विंग व नए अस्पताल को कोरोना मरीजों के लिए सेंटर बना दिया। इसके चलते यहां अन्य बीमारियों के मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा। इस अस्पताल का सारा भार अब महावीर नगर तृतीय स्थित शहरी स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र पर पड़ रहा है, लेकिन लॉकडाउन में यहां दवाइयों का टोटा पडऩे लगा है। स्टाक खत्म होने से अधिकांश मरीजों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। इस डिस्पेंसरी में रोजाना विभिन्न बीमारियों से पीडि़त 400 से 500 रोगी ओपीडी रहती है, लेकिन अधिकांश मरीज बिना दवा के लौट रहे हैं।

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डिस्पेंसरी में आने वाले मरीजों का कहना है कि डिस्पेंसरी में मलेरिया, वायरल, मधुमेह, रक्तचाप, हाइपरटेंशन, सर्दी-खांसी आदि के मरीज चिकित्सक को दिखाने आते हैं, लेकिन यहां दवाइयों का स्टॉक खत्म होने से मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बाहर जाकर दवाइयां खरीदनी पड़ रही है। दवा केंद्र से उन्हें शनिवार को भी 4 में से सिर्फ एक टेबलेट ग्लिम्पिराइड व मेटफोर्मिन हाइडोक्लोराइड 10 दिन के लिए दी गई। शेष दवाइयां बाहर से खरीदने के लिए कहा गया।
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मार्च का नहीं आया बजट
यह डिस्पेंसरी मेडिकल कॉलेज से सबंद्ध है। कॉलेज से बजट जारी होने के बाद डिस्पेंसरी एमबीएस अस्पताल परिसर में स्थित मेडिकल कॉलेज के ड्रग वेयर हाउस में ऑनलाइन डिमांड भेजती है। वहां से दवाइयों की आपूर्ति होती है, लेकिन मार्च का फाइनेशियल महिना होने के कारण इस बार बजट नहीं आया। ऐसे में डिस्पेंसरी में दवाइयों की आपूर्ति नहीं हो सकी।

इनका यह कहना

नए अस्पताल के मरीज भी डिस्पेंसरी में आ रहे हैं। इससे मरीजों की संख्या बढ़ रही है। दवा की कमी बनी है। हमने ड्रग वेयर हाउस में डिमांड भेज रखी है, लेकिन सप्लाई नहीं हो रही। इससे मरीजों को पर्याप्त दवाइयां नहीं मिल पा रही।

डॉ. आशीष खण्डेलवाल, प्रभारी, डिस्पेंसरी

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डिस्पेंसरी में दवा के लिए मेडिकल कॉलेज से बजट आवंटन होता है। यह बजट जयपुर से आता है, लेकिन अप्रेल का नया वित्त वर्ष होने के कारण नहीं आ पाया। डिस्पेंसरी में हर साल 60 से 65 लाख का वार्षिक बजट आता है। बीच-बीच में 4 से 5 लाख का बजट जारी होता है, लेकिन इस बार जारी नहीं हुआ। जरुरी दवाइयां ऑफ लाइन भिजवा रहे।
डॉ. सुशील सोनी, प्रभारी, ड्रग वेयर हाउस

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