कोरोना कर्मवीर... पहले डर से भाग छूटे, हौंसले की डोज मिली तो साथ हुए

कोटा में पहली बार 2020 अप्रेल में जब कोरोना आया तो डर के मारे कोई घरों में छुप गए। अस्पताल में भी सफाई ठेका कर्मी व वार्ड ब्वायज तक भाग गए। इससे वार्डों में कार्य बाधित हो गया, लेकिन मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों ने हौंसले की डोज दी तो कार्मिक वापस काम पर लौटे।

 

By: Abhishek Gupta

Updated: 20 May 2021, 01:00 PM IST

कोटा. कोटा में पहली बार 2020 अप्रेल में जब कोरोना आया तो डर के मारे कोई घरों में छुप गए। अस्पताल में भी सफाई ठेका कर्मी व वार्ड ब्वायज तक भाग गए। इससे वार्डों में कार्य बाधित हो गया, लेकिन मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों ने हौंसले की डोज दी तो कार्मिक वापस काम पर लौटे। चार ठेका सफाईकर्मी भीमा, चेतन, दिनेश व अभिषेक कोरोना कर्मवीर बनकर आगे आए और कोविड शव उठाने से लेकर अंतिम संस्कार का काम कर रहे है।

ठेका सफाईकर्मी भीमा ने बताया कि कोटा में पहली बार जब कोरोना आया तो कोविड अस्पताल में शव उठाने से लेकर अंतिम संस्कार तक करवाने की जिम्मेदारी मिली। जब पहली बार मरीज की डेथ हुई तो शव उठाने के लिए कहा गया। एकबारगी तो डर लगा और सभी कर्मचारी वहां से काम छोड़कर भाग गए, लेकिन अधिकारियों ने समझाइश कर उन्हें काम पर बुलाया और समझाइश की, उसके बाद शव उठाने लगे। जैसे ही वार्डों से शव की सूचना मिलती वे ट्रॉली में लेकर भरी गर्मी में मोर्चरी तक पहुंचते थे। 10 से 12 डेथ बॉडी पूरी सुरक्षा से लेकर गए तो उसके बाद डर खत्म हुआ।

परिवार के बारे में सोचा

कार्मिक भीमा ने बताया कि उस समय सोचा कि यदि काम नहीं करेंगे तो परिवार को कैसे पालेंगे। उसके बाद बॉडी पैक कर प्रशासनिक अधिकारियों, मेडिकल कॉलेज की टीम की मदद से वे एम्बुलेंस में पीपीई किट, मास्क व ग्लब्स पहनकर मुक्तिधाम व कब्रिस्तान तक रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार करते थे।


अब पैक कर परिजनों को देते
सरकार ने बाद में नियम परिवर्तन कर दिए। अब बॉडी को कवर में पैक कर सीधे परिजनों को सौंप देते है। अभी भी वार्ड से लेकर परिजनों की गाड़ी तक वे डेड बॉडी पहुंचाते है। डेढ़ साल से ज्यादा समय हो गया अब डर खत्म हो गया। वे पूरी सुरक्षा से काम करते है। इस बीच कभी कोरोना से संक्रमित नहीं हुए है।

नहीं मिली प्रोत्साहन राशि

कार्मिक भीमा ने बताया कि पिछले साल सरकार ने कोरोना डेथ बॉडी के अंतिम संस्कार में जुटे सफाई कार्मिकों को प्रत्येक बॉडी पर 500 रुपए देने की घोषणा की थी, लेकिन उनको करीब 90 डेड बॉडी की प्रोत्साहन राशि नहीं मिली है।

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