खूब झूले पालन हार, पर नहीं लगी कतार

कोटा। कृष्णजन्माष्टमी के दूसरे दिन शहर भर में नंदोत्सव मनाया गया। ठाकुरजी को माखन मिश्री का भोग लगाया। ठाकुरजी को झूलों में खूब झुलाया, लेकिन पहली बार शहर मंें कहीं कतार नहीं लगी न ही भजन कीर्तन की धुन सुनाई दी।

By: Hemant Sharma

Published: 13 Aug 2020, 11:22 PM IST

कोटा। कृष्णजन्माष्टमी के दूसरे दिन शहर भर में नंदोत्सव मनाया गया। ठाकुरजी को माखन मिश्री का भोग लगाया। ठाकुरजी को झूलों में खूब झुलाया, लेकिन पहली बार शहर मंें कहीं कतार नहीं लगी न ही भजन कीर्तन की धुन सुनाई दी, न हर बार की तरह जयकारे गूंजायमान हुए। यहां तक कि मंदिरों में घंटे घडि़याल भी नहीं बजे। नंदोत्सव पूरी तरह कोरोना से प्रभावित नजर आया।

उमड़ता है सैलाब

हर वर्ष नंदग्राम क्षेत्र मथुराधीशजी, महाप्रभुजी व फूलबिहारीजी समेत अन्य मंदिरों में पलनानंदमहोत्सव शुरू होने से ही पहले ही श्रद्धालुओं की कतारें लग जाती है। हजारों श्रद्धालु दर्शन करते और घंटे इंतजार के बाद बालकृष्ण के दर्शन होते हैं। इसके विपरीत इस वर्ष मंदिरांें के बाहर सन्नाटा रहा। वहीं मंदिर समिति, ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने भी सरकार की गाइडलाइन की पालना करते हुए मंदिरों को श्रद्धालुओं के लिए नहीं खोला।

हर बार 150 किलो, इस बार डेढ़ किलो

कुछ मंदिरों में एक-दो एक दो श्रद्धालु आते गए और दर्शन करके जाते गए। हालांकि यह संख्या न के बारबर ही रही। हर बार १५०, इस वर्ष डेढ़ किलो प्रसाद टिपटा स्थित नंद ग्राम स्थित गोविंद देव जी के मंदिर में फुल बिहारी जी मंदिर समेत अन्य मंदिरों में सुबह से ही नंद उत्सव की रोनक शुरू हो गई, लेकिन श्रद्धालुओं का प्रवेश नहीं होले से यह मंदिरों के अंदर तक ही सीमित रही।

गोविंद देव मंदिर के पुजारी मुकेश शर्मा ने बताया कि हर साल यहां 10 से 15हजार लोग नंद ग्राम में दर्शन करने आते हैं लेकिन कोरना के चलते इस बार मंदिर के पट बंद होने से श्रद्धालु नहीं आए हैं। उन्होंने बताया कि हर वर्ष वह 150 किलो धनिया की पंजीरी बनाते हैं लेकिन इस वर्ष मात्र डेढ़ किलो धनिया की पंजीरी बनाई व भोग लगाया है। पंचामृत भी काफी कम बनाया गया।

एेसी ही स्थिति देवस्थान विभाग से संचालित फूल बिहारी जी के मंदिर में रही। यहां भी मंदिर पुजारीही उपस्थित रहे। स्थिति रही देवस्थान विभाग से संचालित मंदिर फूल बिहारी मंदिर के पुजारी अश्विन कुमार व सुरेश शर्मा बताते हैं कि मंदिर में हर वर्ष मेला लगता है लेकिन इस बार श्रद्धालुओं को प्रवेश नहीं दिया गया है ।इससे मंदिर सुनसान है लेकिन परंपरागत ढंग से जन्मोत्सव मनाने में किसी प्रकार की कमी नहीं आई है।

स्वर्ण रजत पलने में झुलाया

पाटनपोल स्थित महाप्रभुजी के बड़े मंदिर में परम्परागत ढंग से नंदोत्सव मनाया। आचार्य परिवार के सदस्य यशोदा व मंदिर के मुखिया ने नंद बाबा का रूप धरा। मंदिर परिवार के अन्य सदस्य ग्वाल बाल बने। ठाकुरजी को रजत पलने में ण्ुलाया गया। मथुराधीश जी के बड़े मंदिर में भी नंदोत्सव मनाया गया।

पुलिस का पहरा

शहर के प्रमुख मंदिरों के आसपास पुलिस कर्मचारी तैनात रहे। हालांकि मंदिरांें के पट बंद थे, इसके बावजूद भी कोई श्रद्धालु मंदिरों में प्रवेश नहीं करे, इसे देखते हुए मंदिरों के बाहर पुलिस कर्मी तैनात रहे।

Hemant Sharma
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned