ड्राइवरी व मजदूरी छूटी तो चल निकला परम्परागत काम, पूरा परिवार मिट्टी के बर्तन बनने में जुटा

कोरोना संक्रमण क्या फैला लोगों की दिनचर्या के साथ-साथ व्यवसाय तक बदल गए हैं। लोग अब परिवार सहित अपने परम्परागत काम में जुटे रहे हैं। लोग फ्रिज व बर्फ का पानी पीना भूल गए। अब देसी फ्रिज यानि मटकी का पानी फिर से पसंद आने लगा है।

By: Dilip

Published: 23 May 2020, 08:01 PM IST

रावतभाटा. कोरोना संक्रमण क्या फैला लोगों की दिनचर्या के साथ-साथ व्यवसाय तक बदल गए हैं। लोग अब परिवार सहित अपने परम्परागत काम में जुटे रहे हैं। लोग फ्रिज व बर्फ का पानी पीना भूल गए। अब देसी फ्रिज यानि मटकी का पानी फिर से पसंद आने लगा है।
कोरोना संक्रमण के कारण अन्य काम बंद होने मूलचंद प्रजापति अपने तीनों पुत्रों के साथ कुंभकारी के काम में जुट गया है। मूलचंद ने दीपावली के लिए अभी से ही दीपक बनाना शुरू कर दिए हैं। वह प्रतिदिन 700 दीपक बनाता है। मूलचंद का कहना है कि कोरोना संक्रमण के कारण भीषण गर्मी में पहले लोग फ्रिज का पानी पीना पसंद करते थे लेकिन अब लोग फ्रिज की बजाए मटकी का पानी पीना पसंद कर रहे हैं। इसके पीछे तर्क यह है कि बर्फ, फ्रिज का पानी पीने से कोरोना का संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में लोगों को मटकी का पानी रास आने लगा है। उसके पास प्रतिदिन 15 से 20 मटकियां बिक जाती हैं। हालांकि शादियों व अन्य कार्यक्रम रद्द होने से मटकियां की बिक्री गत वर्ष की अपेक्षा आधी भी नहीं है लेकिन घर में पानी पीने के लिए प्रतिदिन शहरी सहित आसपास के लोग मटकी लेकर जा रहे हैं।
तो बनने लगे दीपक
मूलचंद का कहना है कि उसके तीन पुत्र हैं दो पुत्र ड्राइवरी का काम करते हैं। एक पुत्र मजदूरी का काम करता है। लॉक डाउन होने से काम बंद हो गया। ऐसे में उसने अपने पुत्र धुलचंद, राकेश व दुर्गेश के साथ मटकियां, गोलख, कुल्हड़ बनाना शुरू कर दिया। साथ ही दीपावली की अभी से ही तैयारी शुरू कर दी। वह प्रतिदिन 700 दीपक बनाता है। जब दीपावली आएगी तो उसे दीपक बनने का काम नहीं करना पड़ेगा। उसने पुत्रों के साथ मिलकर मटकियां, दीपक सहित अन्य सामानों को पकाने के लिए एक नई भट्टी भी तैयार की है।
शादियों व अन्य मांगलिक कार्यक्रमों की बिक्री बंद कला प्रजापत का कहना है कि शादियों व अन्य मांगलिक कार्यक्रमों के लिए मटकियां बिकना बंद गई है। गत वर्ष तक प्रत्येक शादी व विवाह समारोह के लिए कम से कम पांच से सात मटकियां लेने लोग आते थे लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण मांगलिक कार्यक्रम रद्द हो गए। इससे बिक्री भी बंद है। रावतभाटा में अजमेर की चिकनी बनास की मिट्टी व बूंदी की मटकियां की डिमांड भी काफी अच्छी है। इसके अलावा भैसरोडगढ़ में लकड़ी के बुरादे की मिट्टियां बनाई जाती है। यहां पर मटकियां बेचने का व्यवसाय चार से पांच लोग करते हैं। कई लोग रविवारीय हाट के दिन भी मटकियां बेचने आते हैं।

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