इस तरह घालमेल होगा खत्म और पार्षदों से छिन जायेगी दो नम्बर की कमाई

इस तरह घालमेल होगा खत्म और पार्षदों से छिन जायेगी दो नम्बर की कमाई

Rajesh | Publish: Jul, 14 2018 03:42:21 AM (IST) Kota, Rajasthan, India

इस तरह घालमेल होगा खत्म और पार्षदों से छिन जायेगी दो नम्बर की कमाई

कोटा.

पार्षदों से आने वाले दिनों में सफाई की मलाई छिन जाएगी। क्योंकि नगर निगम सफाई के ठेके चरणबद्ध तरीके से खत्म करने जा रहा है। भर्ती प्रक्रिया पूरी होते ही सफाई का काम स्थायी कर्मचारियों को सौंप दिया जाएगा। निगम आयुक्त ने शुक्रवार को इस आशय के आदेश भी जारी कर दिए हैं। निगम में सबसे ज्यादा घालमेल ठेके पर सफाई कर्मचारी लगाने में ही होता है। ठेकेदारों को पार्षदों की अनुशंसा पर ही भुगतान होता है। इस कारण ठेकेदार और पार्षदों की मिलीभगत से वार्डों में आधे भी कर्मचारी नहीं लगते, जबकि भुगतान पूरे कर्मचारियों का उठा लिया जाता है। निगम प्रशासन ने कई बार औचक जांच की तो सच्चाई सामने भी आई, लेकिन पार्षदों की लॉबिंग के चलते ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हो पाई। राज्य सरकार के आदेश पर सफाई कर्मचारियों की भर्ती होने के कारण अब शनै:-शनै: सफाई के ठेके खत्म किए जाएंगे।

हाईकोर्ट से रोक हटी

राजस्थान उच्च न्यायालय ने सफाई कर्मचारियों की भर्ती संबंधी रोक पर से यथास्थति समाप्त कर दी है। आयुक्त डा. विक्रम जिंदल ने शुक्रवार को भर्ती संबंधित व सफाई के ठेकों के संबंध में आदेश जारी किया है। इसमें कहा कि नगर निगम में सफाई कर्मचारियों की भर्ती का कार्य शीघ्र पूर्ण कर लिया जएगा। जन स्वास्थ्य अनुभाग के समस्त संवेदकों को सूचित किया जाता है कि सफाई कर्मचारियों की भर्ती के चलते सभी सेक्टर्स के बीट श्रमिकों के अनुबंध, कार्यादेश के अतिरिक्त अन्य सफाई ठेकों को एक अगस्त को समाप्त कर दिया जाएगा। निगम की ओर से आवश्यकता के अनुसार एक अगस्त से पहले भी शनै:-शनै: सफाई ठेकों को समाप्त कर दिया जाएगा।

मुख्य मार्गों का ठेका 16 से खत्म

निगम ने शहर के मुख्य मार्गों की सफाई का काम अब स्थायी सफाई कर्मचारियों को सौंप दिया है। निगरानी का जिम्मा स्वास्थ्य निरीक्षकों को दिया है। मुख्य मार्गों की सफाई का ठेका 16 जुलाई को खत्म कर दिया जाएगा। मैन रोड की सफाई व्यवस्था भी तीन जोन में बांट दी गई है। पहले ठेके पर मुख्य मार्ग की करीब सौ लेबर लगी हुई थी। पार्षदों की शिकायत थी कि मैन रोड की सफाई की लेबर का कोई हिसाब नहीं है। कहां सफाई करते हैं, इसकी पार्षदों को जानकारी तक नहीं दी जाती। मुख्य मार्ग की सफाई भी कई बार वार्ड लेबर से करवानी पड़ती है।

 

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