कोर्ट की टिप्पणी : पुलिस की प्रतिष्ठा हुई धूमिल

एएसआई को तीन वर्ष का कारावास व 60 हजार रुपए अर्थदंड

By: Ranjeet singh solanki

Published: 19 Apr 2021, 09:49 PM IST

कोटा. भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय (एसीबी कोर्ट) के न्यायाधीश प्रमोद कुमार मलिक ने घूस के मामले में पकड़े गए एक एएसआई को तीन साल की सजा व 60 हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया है। मामला 15 साल पुराना बारां जिले के अंता थाने का है। घूसखोर एएसआई ने मारपीट के मामले में जमानत देने के लिए परिवादी से 1500 रुपए की रिश्वत ली थी। झूठे साक्ष्य पेश करने पर इस मामले में स्वतंत्र गवाह बृजमोहन मालव और परिवादी लटूरलाल को भी न्यायालय ने तलब किया है। न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि एएसआई ने अपने लोक कर्तव्यों का सही निर्वहन नहीं किया। अपने कर्तव्य के निर्वहन में घोर लापरवाही की है। उक्त अपराधिक प्रकरण में नाजायज रूप से परिवादी से रिश्वत ली। इससे पुलिस विभाग की प्रतिष्ठा धुमिल व दागदार हुई है। सहायक निदेशक अभियोजन अशोक कुमार जोशी ने बताया कि 27 अक्टूबर 2006 को परिवादी लटूरलाल और उसके बेटों की रुपए के विवाद को लेकर पड़ोसी से मारपीट हो गई थी। उनके खिलाफ अंता थाने में मारपीट का मामला दर्ज हुआ था। मामले की जांच एएसआई नरेंद्र कुमार शर्मा को सौंपी गई थी। एएसआई ने लटूरलाल की जमानत करवाने के बदले पांच हजार रुपए की घूस मांगी थी, उसने एसीबी में इस संबंध में शिकायत कर दी। एसीबी ने एएसआई को रिश्वत लेते हुए ट्रैप किया था। बाद में चालान भी न्यायालय में पेश कर दिया। मामले में न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए आरोपी एएसआई नरेंद्र कुमार शर्मा को दोषी माना और तीन साल कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा 60 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। इस मामले में परिवादी लटूरलाल और स्वतंत्र गवाह बृजमोहन मालव पर झूठी साक्ष्य गवाही देने के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्हें धारा 344 दंड प्रक्रिया के तहत नोटिस जारी कर तलब किया गया है।

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