कोविड-19 के दौर में शहर में एंटी बायोटिक दवाओं की मांग घटी

कोटा. कोरोना महामारी के चलते पिछले दो माह से लॉकडाउन है। इसका सबसे ज्यादा असर दवा उद्योग पर पड़ा है। संक्रमण के डर से लोग घरों में कैद रहे। डॉक्टर को दिखाने कम लोग पहुंचे। लोगों के बाहर नहीं निकलने से एंटीबायोटिक दवाओं की मांग कम रही। ऐसे में दवा कारोबार का एक बड़ा हिस्सा 60 प्रतिशत तक कम रहा है।

 

By: Abhishek Gupta

Published: 23 May 2020, 05:29 PM IST

कोटा. कोरोना महामारी के चलते पिछले दो माह से लॉकडाउन है। इसका सबसे ज्यादा असर दवा उद्योग पर पड़ा है। संक्रमण के डर से लोग घरों में कैद रहे। डॉक्टर को दिखाने कम लोग पहुंचे। लोगों के बाहर नहीं निकलने से एंटीबायोटिक दवाओं की मांग कम रही। ऐसे में दवा कारोबार का एक बड़ा हिस्सा 60 प्रतिशत तक कम रहा है। इस माह भी लॉकडाउन जारी है। ऐसे में इसका असर और बढ़ सकता है।पिछले दो माह के इस दौर में श्वसन तंत्र के उपचार में काम आने वाली दवाओं के साथ दर्द निवारक दवाओं यानी पेन किलर्स की मांग तेजी से घटी है।

- सबसे ज्यादा इनकी डिमांड बढ़ी
दवा व्यापारियों के अनुसार, कोरोना संक्रमण में डायबिटिज, हार्ट व ब्लड प्रेशर की बीमारियों वाली दवाओं की मांग ज्यादा रही। मार्च में जब लॉकडाउन की घोषणा होने वाली थी, तब इन बीमारियों से ग्रसित लोगों ने ये दवाइयां स्टॉक कर ली। उस समय 120 प्रतिशत अधिक इन दवाइयों की बिक्री हुई।

- इनकी डिमांड घटी
कोराना संक्रमण के डर से चिकित्सकों ने निजी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं बंद रखी। परिवहन के साधन नहीं चलने से मरीज सरकारी अस्पतालों में भी पर्याप्त नहीं पहुंच सके। कई जगहों पर कफ्र्यू लगने से दवा की दुकानें नहीं खुली। ऐसे में सर्दी, जुकाम व खांसी के मरीजों के उपयोग में आने वाली एंटीबायोटिक दवा की ब्रिकी कम हुई। गायनिक, सर्जिकल, चर्मरोग जैसी बीमारियों की दवाओं पर खासा असर पड़ा। आधी भी बिक्री नहीं हुई। स्वास्थ्य वर्धक आइटम भी नहीं बिके।

इनका यह कहना
हाड़ौती में हर साल दवा उद्योग से 600 करोड़ का कारोबार होता है, लेकिन कोरोना से पिछले दो माह में 80 से 90 करोड़ का कोरोबार प्रभावित रहा। इस बार 40 प्रतिशत सेल रही। 60 प्रतिशत सेल घट गई। आगे और लॉकडाउन जारी रहता है, इसका खासा असर पड़ेगा है। सरकार के आदेशानुसार सर्दी, जुकाम व खांसी की दवा बिना चिकित्सक पर्चे के नहीं देने से पिछले दो माह में एंटीबायोटिक की बिक्री कम रही। जबकि वायरस के डर से लोग घरों में रहने से अन्य दवाओं की बिक्री भी नहीं हुई।
- क्रांति जैन, अध्यक्ष, कोटा जिला कैमिस्ट एसोसिएशन

- लॉकडाउन की घोषणा होते ही मार्च में डायबिटिज, ब्लड प्रेशर व हार्ट के मरीजों ने एक साथ दो माह का स्टॉक कर लिया। इससे इन दवाओं की 120 प्रतिशत अधिक बिक्री हुई। निजी अस्पताल बंद रहने से एंटीबायोटिक, आर्थो, चर्म व अन्य बीमारियों की दवाओं की बिक्री कम रही। इससे 20 प्रतिशत तक कारोबार घटा है। लॉकडाउन आगे भी जारी रहा तो कोरोबार पर ज्यादा असर पड़ेगा।
लक्ष्मण नैनानी, कोषाध्यक्ष, कोटा जिला कैमिस्ट एसोसिएशन

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