World Eye Donation Day ...देवेंद्र दिखा गए थे, भवानीमंडी को नेत्रदान की राह

नेत्रदान दिवस विशेष : नगर में 37 नेत्रदान और 750 लोगों ने लिया नेत्रदान का संकल्प

By: Ranjeet singh solanki

Published: 10 Jun 2021, 10:00 AM IST

Jhalawar .भवानीमंडी. दिनांक 22 मार्च 2013 का दिन भवानीमंडी के इतिहास में नेत्रदान का एक नया अध्याय शुरू करने के रूप में हमेशा-हमेशा के लिए दर्ज हो गया है। उस दिन मगनभाई मॉर्केट कॉलोनी निवासी दिवंगत देवेंद्र जैन के परिवारजनों की इच्छा से उनका नेत्रदान करवाया गया था। उस नेत्रदान ने शहर मेंं ऩेत्रदान की ऐसी चेतना पैदा की कि नेत्रदान के साथ नेत्रदान संकल्प की भी बयार सी चल पड़ी। तब से अब तक भवानीमंडी में 37 लोगों का मृत्यु बाद नेत्रदान हो चुका है, इसके अलावा करीब 750 लोग नेत्रदान का संकल्प ले चुके है। देवेंद्र जैन के निधन के बाद, उनके ही किसी रिश्तेदार ने कोटा में नेत्रदान में लगी शाइन इंडिया के कार्यकर्ताओं को यहां पर बुलाया और उनका नेत्रदान करवाया था। शाइन इंडिया के कार्यकर्ताओं ने यहां के लोगों को न सिर्फ नेत्रदान का महत्व बताया, जबकि इस बारे में फैली हुई कई तरह की भ्रांतियों को भी दूर किया। उन्होंने स्पष्ट किया था कि नेत्रदान का यह मतलब नहीं है कि आंख निकाल जी जाती है, इसमें तो आंख का केवल कॉर्निया ही निकाला जाता है, जो कमजोर नेत्रज्योति वालों के प्रत्यारोपित कर, उनकी आंखों की रौशनी लौटाई जाती है। इसके बाद लोगों में नेत्रदान के प्रति ऐसी चेतना जगी कि लोग खुद ही नेत्रदान संकल्प करने और नेत्रदान करवाने के लिए आगे आने लगे थे। भवानीमंडी में नौ साल में ही 37 नेत्रदान हो जाना इसकी बडी मिशाल है, इतनी बड़ी तादाद में आस-पास किसी शहर में नेत्रदान नहीं किया गया है। जिसमे 15 महिलाओं व 22 पुरूषों ने नेत्रदान किया है। शाइन इंडिया के कार्यकर्ताओं की सेवा भावना को देखकर, उनकी स्थानीय स्तर पर मदद के लिए भी कई कार्यकर्ता तैयार होने लगे। जिनमें भारत विकास परिषद के कमलेश गुप्ता, जैन सौश्यल गु्रप के नरेंद्र जैन समेत कई शामिल है। इनके अलावा भारत विकास परिषद के अलावा मारवाड़ी महिला मंडल, सिंधी महिला मंडल, माहेश्वरी महिला मंडल, दिगंबर जैन समाज आदि संस्थाएं भी नेत्रदान के क्षेत्र में कार्य में जुटी है। भाविप के कमलेश गुप्ता को इस कार्य के लिएा संभाग जिला पर सम्मानित भी किया जा चुका है। जिले मे सर्वाधिक 6 नेत्रदान वर्ष 2021 में हुए। कोरोना के कारण नेत्रदान का उत्सरण बंद है।
नेत्रदान किसी को नई रोशनी देने का एक प्रयास
आई बैंक एसोसिएशन ऑफ इंडिया हैदराबाद के आजीवन सदस्य, कमलेश दलाल के अनुसार. आंखें ईश्वर के द्वारा दी गई सबसे खूबसूरत धरोहर है, बिना दृष्टि के इस जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती, लेकिन देश में लाखों असहाय लोग ऐसे हैं जो दृष्टि हीनता के कारण इस सुंदर प्रकृति को देख नहीं पा रहे हैं। सुखद पहलू यह है कि इनमें से अधिकांश को नेत्रदान के द्वारा नई रोशनी दी जा सकती है। भारत में 110 लाख से अधिक नेत्रहीन हैं इसमें से 25 लाख दृष्टिहीन केवल कॉर्निया खराब होने के कारण ही नहीं देख पा रहे हैं। दुनिया की दृष्टिहीन जनसंख्या का एक चौथाई हिस्सा भारत में है, जिसमें से अधिकांश बच्चे हैं। जितने लोग हमारे देश में एक वर्ष में मृत्यु को प्राप्त करते हैं। नेत्रदान हो जाए तो सभी कॉर्निया की खराबी के कारण हुए दृष्टिहीनों को एक वर्ष में ही नई रोशनी दी जा सकती है।
अंधविश्वास और जागरूकता के अभाव के कारण देश में प्राप्त मृत्यु का 1 प्रतिशत भी नेत्रदान नहीं हो पाता है। पूरे देश में मिलाकर प्रतिवर्ष लगभग 60,000 नेत्रदान ही हो पाते है।
क्या है नेत्रदान
हमारी आंखों के आगे का काला गोल हिस्सा जो वास्तव में पारदर्शी है एवं इसे बोलचाल की भाषा में हीरा भी कहा जाता है। कॉर्निया कहलाता है। यह आंख का पर्दा है, जो बाहरी वस्तुओं का चित्र बनाकर हमें दृष्टि देता है । किसी एक्सीडेंट में या बीमारी के कारण या जन्मजात कारणों से यदि कर्निया पर चोट लग जायेए इस पर झिल्ली पड़ जाये या इस पर धब्बे पड़ जायें तो दिखाई देना बन्द हो जायेगा । हमारे देश में करीब 25 लाख लोग ऐसे हैं जो कि कर्निया की समस्या से पीडि़त हैं। परंतु किसी मृतक का कॉर्निया निकालकर उसे इन लोगों को प्रत्यारोपित ज्तंदेचसंदज कर दिया जाए तो इन लोगों के जीवन का आंधेरा दूर हो सकता है।

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