दु:ख के समंदर में डूबे, गांव में नहीं जले चूल्हे

नाव पलटने के मामले में परिवहन विभाग की सबसे बड़ी लापरवाही सामने आई है। विभाग की ओर न तो यहां कोई अधिकृत रूट तय कर रखा है और न ही नावों की कभी फिटनेस की जांच की गई।

By: Jaggo Singh Dhaker

Published: 16 Sep 2020, 10:59 PM IST

कोटा. हर आंख भर आई और हर कोई रो पड़ा। न चूल्हे जले न निवाला उतरा। हर कोई दु:ख के समंदर में डूबा हुआ नजर आया। सब खामोश थे, लेकिन अंदर दर्द भरा हुआ था।
ग्रामीण शोक में डूबे थे। गांव की महिलाएं अपनों के जाने के गम में दहाड़े मारकर रो रही थीं, तो कुछ उन्हें ढांढ़स बंधाने में लगी हुई थीं। वहीं कुछ ग्रामीण दाह संस्कार के इंतजाम में लगे हुए थे और बच्चे भूख से परेशान थे। कुदरत का कहर टूटा तो पड़ौसी गांव के लोगों की भी भीड़ लग गई और वे रो पड़े। यह दर्दभरा दृश्य बुधवार को इटावा उपखंड के तलाव गांव, बरनाहाली गांव में नजर आया। वहीं बूंदी जिले के इंद्रगढ़ के पास पापड़ा गांव में भी दु:ख भरा सन्नाटा पसरा रहा। यहां की गोलमा उर्फ अलका पुत्री सत्यनारायण भी नाव में सवार थी, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल पाया। इस कारण परिजनों को रो रोकर बुरा हाल था। अभी दो जने लापता हैं।
ग्रामीण पुलिस अधीक्षक शरद चौधरी ने बताया कि गुरुवार सुबह जल्द रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा, रात में रेस्क्यू ऑपरेशन काफी मुश्किल हो गया। इसलिए अंधेरा होने पर बंद कर दिया गया।

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परिवहन विभाग की घोर लापरवाही सामने आई
खातौली के पास नाव पलटने के मामले में परिवहन विभाग की सबसे बड़ी लापरवाही सामने आई है। विभाग की ओर न तो यहां कोई अधिकृत रूट तय कर रखा है और न ही नावों की कभी फिटनेस की जांच की गई। स्थानीय स्तर पर बनाई गई जर्जर नावों का संचालन यहां नदी में लंबे समय से हो रहा है। पड़ताल में यह बात सामने आई है परिवहन विभाग ने एक बार भी कार्रवाई नहीं की। वहीं स्थानीय पटवारी और ग्राम विकास अधिकारी ने भी कभी इस तरह की अनदेखी की सूचना प्रशासन न को नहीं दी।

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