आखिर अपना खून ही काम आता है...ये मानने को मजबूर हुए साइंटिस्ट

Deepak Sharma

Publish: Dec, 08 2017 11:11:24 (IST)

Kota, Rajasthan, India

कोटा में आईएसबीटीआई की कांफ्रेंस में आए देश-दुनिया के रक्त विशेषज्ञ, ब्लड कैंसर और थैलेसीमिया में स्टेमसेल और बोनमेरो ट्रांसप्लांट 80 फीसदी कारगर

कोटा . आखिर अपना खून ही काम आता है। यह कहावत हमारे बड़े-बुजुर्गों ने यूं ही नहीं कही थी। इस बात को अपने चिकित्सा विज्ञान भी सिर झुकाकर मान चुका है। गंभीर बीमारियों का उपचार ढूंढ रहे विशेषज्ञों अब मान चुके हैं कि मरीज का अपना खून यानी स्टेमसेल और बोनमेरा ही उसे गंभीर बीमारियों से उबारने में सर्वाधिक कारगर हैं। यह तथ्य एक बार फिर कोटा में इंडियन सोसाइटी ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन एंड इम्यूनोहेमेटोलॉजी (आईएसबीटीआई) की प्री-कांफ्रेस वर्कशॉप में सामने आया।

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कीमोथैरेपी से दुगुने कारगर हैं स्टेमसेल और बोनमेरा ट्रांसप्लांट
प्री-कांफ्रेंस वर्कशॉप में फोर्टिस हॉस्पिटल दिल्ली के डॉ. राहुल भार्गव ने कहा कि बोन मेरो ट्रांसप्लांट तथा स्टेमसेल ट्रांसप्लांट को थैलेसीमिया, प्लास्टिक एनिमिया के 80 फीसदी रोगियों के लिए फायदेमंद माना गया है। इससे इन रोगों को जड़ से समाप्त करना संभव हो सका है। यही नहीं, यह थैरेपी ब्लड कैंसर के मरीजों के लिए 60 फीसदी तक कारगर साबित हुई है जबकि कीमोथैरेपी में यह आंकड़ा केवल 30 फीसदी तक ही है।

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भारत में सुविधा नहीं, लेकिन हम चाहें तो दुनिया भर को फायदा
वर्कशॉप में डॉ. रवि दारा ने कहा कि विश्व के कई देशों में ब्लड की रजिस्ट्री होने से रक्त समूह ढूंढने में परेशानी नहीं आती। लोग स्टेमसेल सेंपल देकर रखते हैं। भारत में ऐसा नहीं है। अमरीका से रक्त मंगाने पर 50 लाख तक खर्च करने पड़ जाते हैं। भारत में 1 करोड की जनसंख्या का लाभ उठाकर दुनिया को रक्त समूह उपलब्ध जा सकता है। फोर्टिस के डॉ. राहुल ने कहा कि सरकारों को कैंसर सेंटर पर बोन मेरो ट्रांसप्लांट की सुविधा देनी चाहिए। भारत में प्रतिवर्ष 5.6 लाख ट्रांसप्लांट की आवश्यकता है।


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बताएंगे रक्तदान के फायदे, दूर करेंगे भ्रांति
आयोजन संयोजक डॉ. वेदप्रकाश गुप्ता ने बताया कि शुक्रवार से तीन दिवसीय कांफ्रेंस में रक्त विशषज्ञों के व्याख्यान होंगे। वे रक्त से संबंधित विभिन्न अनुसंधानों के शोध-पत्र प्रस्तुत करेंगे। कांफ्रेंस में यूएसए से डॉ. जांथन पिकर, सिंगापुर से डॉ. सौम्य जमुआर, यूएसए से शैलेन्द्र पोरवाल, ऑस्टे्रलिया से डॉ. रॉबर्ट फ्लावर समेत विश्व भर के 800 रक्त विशेषज्ञ भाग लेंगे।

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राजस्थान में खुलेंगे 7 नए ब्लड बैंक
राजस्थान एड्स कंट्रोल सोसायटी के निदेशक डॉ. एसएस चौहान ने बताया कि राजस्थान में बारां, चूरू, बूंदी, चित्तौडगढ़़, ब्यावर, धौलपुर, सवाई माधोपुर, अलवर समेत 7 स्थानों पर नए ब्लड बैंक खोलने पर विचार किया जा रहा है। कोटा मेडिकल कॉलेज में प्लेटलेट्स यूनिट बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है। प्रदेश में वर्तमान में 120 ब्लड बैंक हैं।

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