50 हावड़ा पुलों के निर्माण के बराबर स्टील के उपयोग से बनेगा एक्सप्रेस-वे

एक्सप्रेस-वे के किनारे की सुविधाओं में पेट्रोल पंप, मोटल, विश्राम क्षेत्र, रेस्तरां और दुकानें होंगी। चिकित्सा आपात स्थिति के मामले में कनेक्टिविटी बढ़ाने और लोगों को निकालने के लिए हेलीपैड भी होंगे। लगभग 35 करोड़ घन मीटर मिट्टी को स्थानांतरित किया जाएगा जो निर्माण के दौरान 4 करोड़ ट्रकों के लदान के बराबर है। इस परियोजना के लिए 80 लाख टन सीमेंट की खपत होगी, जो भारत की वार्षिक सीमेंट उत्पादन क्षमता का लगभग 2 प्रतिशत है।

 

By: Jaggo Singh Dhaker

Updated: 15 Sep 2021, 11:59 PM IST

कोटा. भारतमाला परियोजना के तहत दिल्ली-मुंबई के बीच एक्सप्रेस-वे के निर्माण में 12 लाख टन से अधिक स्टील की खपत होगी, जो 50 हावड़ा पुलों के निर्माण के बराबर है। लगभग 35 करोड़ घन मीटर मिट्टी को स्थानांतरित किया जाएगा जो निर्माण के दौरान 4 करोड़ ट्रकों के लदान के बराबर है। इस परियोजना के लिए 80 लाख टन सीमेंट की खपत होगी, जो भारत की वार्षिक सीमेंट उत्पादन क्षमता का लगभग 2 प्रतिशत है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे (डीएमई) विभिन्न वनों, शुष्क भूमि, पहाड़ों, नदियों जैसे कई विविध क्षेत्रों से गुजरेगा। यह सुनिश्चित करने के लिए ऐसा व्यापक कार्य किया गया है कि यह राजमार्ग समय की कसौटी पर खरा उतरे। दिल्ली-वडोदरा खंड के लिए स्थायी फुटपाथ डिजाइन को अपनाया गया है, जो शुष्क क्षेत्रों से गुजरता है और परियोजना की दीर्घायु बढ़ाने के लिए उच्च वर्षा वाले वडोदरा-मुंबई खंड के लिए कठोर फुटपाथ डिजाइन को अपनाया गया है। डीएमई ने हजारों प्रशिक्षित सिविल इंजीनियरों और 50 लाख से अधिक मानव दिवसों के काम के लिए रोजगार का भी सृजन किया है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे का एक अन्य अनूठा पहलू गलियारे के साथ उपयोगकर्ताओं की सुविधा और सुरक्षा में सुधार के लिए राजमार्ग के साथ बनाई गई 94 सुविधाओं (वे साइड अमेनिटीज -डब्ल्यूएसए) की स्थापना है। रास्ते के किनारे की सुविधाओं में पेट्रोल पंप, मोटल, विश्राम क्षेत्र, रेस्तरां और दुकानें होंगी। इन वे साइड सुविधाओं में चिकित्सा आपात स्थिति के मामले में कनेक्टिविटी बढ़ाने और लोगों को निकालने के लिए हेलीपैड भी होंगे। एक्सप्रेस-वे का 374 किमी हिस्सा राजस्थान राज्य से होकर गुजरता है और इस खंड का निर्माण 16,600 करोड़ से अधिक की कुल पूंजीगत लागत से किया जा रहा है। राज्य की बढ़ती आर्थिक आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए यह कॉरिडोर अलवर, भरतपुर, दौसा, सवाईमाधोपुर, टोंक, बूंदी और कोटा जिलों से होकर गुजरेगा। एक्सप्रेस-वे के साथ इंटरचेंज के माध्यम से मौजूदा राजमार्ग नेटवर्क के साथ कॉरिडोर की कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए कॉरिडोर के साथ प्रमुख इंटरचेंज की योजना बनाई गई है। ऐसा ही एक विशिष्ट इंटरचेंज दौसा के पास स्थित है और एक्सप्रेस-वे को मौजूदा आगरा-जयपुर हाइवे से जोड़ेगा। इसके अलावा, दिल्ली-जयपुर एक्सप्रेस-वे को पूरा करने और दिल्ली व जयपुर के बीच आवागमन समय को 4 घंटे से घटाकर 2 घंटे से कम करने के लिए बांदीकुई से जयपुर के लिए एक अतिरिक्त संपर्क मार्ग की योजना है।

Jaggo Singh Dhaker
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