एक्सप्रेस-वे से हर साल 32 करोड़ लीटर से अधिक ईंधन बचेगा

यह एक्सप्रेस-वे एशिया में पहला और दुनिया का दूसरा है, जिसमें वन्यजीवों की अप्रतिबंधित आवाजाही की सुविधा के लिए पशु हवाई पुल (ओवरपास) की सुविधा है। इनकी लंबाई 7 किमी होगी और ये वन्यजीवों के निर्बाध आवागमन के लिए समर्पित होंगे।

By: Jaggo Singh Dhaker

Updated: 15 Sep 2021, 11:40 PM IST

कोटा. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी 16-17 सितंबर को दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात राज्यों से गुजरने वाले दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे की प्रगति की समीक्षा करेंगे। वे गुरुवार को कोटा संभाग के लाखेरी में भी आएंगे। यह एक्सप्रेस वे 98 हजार करोड़ रुपए की लागत से विकसित किया जा रहा है। इसकी लंबाई 1380 किलोमीटर है। नए एक्सप्रेस-वे से दिल्ली और मुंबई के बीच आवागमन के समय को लगभग 24 घंटे से घटाकर 12 घंटे करने और दूरी में 130 किलोमीटर की कमी होने की उम्मीद है। इससे 32 करोड़ लीटर से अधिक के वार्षिक ईंधन की बचत होगी। कार्बनडाई ऑक्साइड उत्सर्जन में 85 करोड़ किलोग्राम की कमी आएगी जो कि 4 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है। राजमार्ग के किनारे 40 लाख से अधिक पेड़ और झाडि़यां लगाने की योजना है।
यह एक्सप्रेस-वे एशिया में पहला और दुनिया का दूसरा है जिसमें वन्यजीवों की अप्रतिबंधित आवाजाही की सुविधा के लिए पशु हवाई पुल (ओवरपास) की सुविधा है। डीएमई में 3 वन्य जीव और 5 हवाई पुल (ओवरपास) होंगे जिनकी संयुक्त लंबाई 7 किमी होगी और ये वन्यजीवों के निर्बाध आवागमन के लिए समर्पित होंगे। एक्सप्रेस-वे में दो प्रतिष्ठित 8 लेन सुरंगें भी शामिल होंगी। इसमें से पहली मुकुंदरा अभयारण्य के माध्यम से 4 किलोमीटर के क्षेत्र में लुप्तप्राय जीवों को संकट में डाले बिना और दूसरी माथेरान पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र (इको सेंसिटिव जोन) में 4 किमी 8 लेन-सुरंग बनेगी।
एक्सप्रेस-वे के दो खंड, दिल्ली-दौसा-लालसोट खंड जो दिल्ली-जयपुर एक्सप्रेस-वे का हिस्सा है और वडोदरा-अंकलेश्वर खंड जो वडोदरा को भरूच के आर्थिक केंद्र से जोड़ता है। इन्हें मार्च 2022 तक यातायात के लिए खोले जाने की संभावना है। पूरे एक्सप्रेस-वे को मार्च 2023 तक पूरा करने की योजना है। निर्माण पूर्व चरण के दौरान प्रमुख चुनौतियां व्यापक भूमि अधिग्रहण और समय पर मंजूरी जैसे पर्यावरण, वन और वन्यजीव थे। दिल्ली से वडोदरा खंड के लिए 1 वर्ष से कम की समयावधि में 15,000 हेक्टेयर क्षेत्र के भूमि अधिग्रहण का कार्य पूरा कर लिया गया था। इसके अलावा, कार्यान्वयन के दौरान समय बचाने के लिए समानांतर में आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियां भी प्राप्त कर ली गई थी।
तेजी से कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए, परियोजना के पूरे जीवन चक्र में प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा दिया गया था, जहां उन्नत प्रौद्योगिकियों जैसे कि एलआईडीएआर, जीपीआर, डिजिटल मानचित्रों का उपयोग विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की तैयारी के दौरान किया गया। इसके बाद निर्माण चरण के दौरान ड्रोन आधारित सर्वेक्षण, उपकरण टेलीमैटिक्स, प्री-कास्टिंग का उपयोग किया गया था। इसके अतिरिक्त कौशलपूर्ण निविदा प्रक्रियाओं के माध्यम से समय कम करने के लिए निर्माण की ऐसी पैकेजिंग को भी वैज्ञानिक रूप से नियोजित किया गया था जो एक साथ कई हिस्सों में काम करने में सक्षम थी।

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