दोहरी मार में अन्नदाता को मिले दोगुनी राहत

एक तो संक्रमण की आशंका के चलते मजदूर नहीं मिलने से कारण फसल की
कटाई नहीं हो रही है। वहीं बेमौसम बरसात ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।

जग्गोसिंह धाकड़. कोरोना संक्रमण के कहर से धरती पुत्र पर दोहरी मार पड़ रही है। एक तो संक्रमण की आशंका के चलते मजदूर नहीं मिलने से कारण फसल की कटाई नहीं हो रही है। वहीं बेमौसम बरसात ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसान पर जब दोहरी मार पड़ रही है तो सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि उन्हें उपज का पहले से ज्यादा दाम दिया जाए। कोरोना के चलते सरकार ने गाइडलाइन जारी कर दी है कि मशीन चलित उपकरणों से फसलों की कटाई करानी चाहिए। ऐसे में उपज की लागत बढऩा स्वभाविक है। धरती पुत्र को संकट के दौर में सहारा देना आवश्यक है।

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दूसरी बात यह कि किसानों को मशीनों को सेनेटाइज करने का प्रशिक्षण देना भी बहुत जरूरी है। इसका प्रबंध सरकार को जल्द करना चाहिए। किराए पर मिलने वाली बड़ी मशीनों की पर्याप्त उपलब्धता का भी हल खोजना होगा। कोरोना के चलते तैयार उपज को लेने के लिए कई चुनौतियां पैदा हो गई हैं। ऐसा नहीं हो कि फसल लेने के चक्कर में किसानों से कोई चूक हो जाए और सुरक्षा चक्र टूट जाए। किसानों की फसल भी बच जाए और कोरोना का सुरक्षा चक्र भी बना रहे। जनप्रतिनिधियों को भी इस दिशा में सरकार का ध्यान आकर्षित करने की जरूरत है। जिस तरह शहर में स्वास्थ्य एडवाइजरी की जानकारी हर रोज दी जा रही है, वैसा प्रबंध गांवों में भी हो। वह इसलिए भी जरूरी है कि किसान वर्क फ्रॉम होम नहीं कर सकता। उपज तैयार करने के लिए खेत-खलियान जाना ही पड़ेगा। खेत खलियान संभालना भी जरूरी है, वरना देश-प्रदेश में खाद्यान्न का संकट खड़ा हो जाएगा। यह भी बहुत भयावह हो सकता है। इससे प्रदेश और देश वासियों का जीवन बड़े पैमाने पर प्रभावित होगा।

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खाद्य आत्मनिर्भरता के साथ कोई समझौता नहीं करना है तो किसानों को उपज का लागत से अधिक उचित मूल्य देना ही पड़ेगा। इस संबंध में कई अल्पकालीन और दीर्घकालीन कदम उठाने होंगे। वहीं वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करना भी केन्द्र सरकार की प्राथमिकता में है। इसलिए ऐसे हालात में किसानों की स्थिति को नहीं भूलना चाहिए। सरकार किसानों के लिए जो भी योजना बनाए, उसका लाभ सभी किसानों को मिलना चाहिए। कई बार बड़े किसान लाभ ले लेते हैं, लेकिन छोटे किसान वंचित रह जाते हैं। लॉकडाउन के चलते सरकारी खरीद नहीं हो पाएगी। ऐसे में किसान के खेत से या घर से फसल क्रय करके वहीं स्टोर करने की व्यवस्था की जा सकती है। ऐसा तब ही हो पाएगा कि जब किसानों को भी समय पर मौजूदा फसल का दाम मिलेगा। लंबे लॉकडाउन को देखते हुए किसान और उनकी उपज की चिंता करना जरूरी हो गया है। सरकार कोरोना की चुनौती से पूरी ताकत से लड़ रही है। इस बीच किसानों की समस्याओं पर ध्यान देने की जरूरत है।

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