खुशखबरी : देश में सरकारी सेक्टर की  पहली न्यूरो इंटरवेंशन लैब का कोटा में उद्घाटन

Shailendra Tiwari

Publish: Oct, 13 2018 06:28:58 PM (IST) | Updated: Oct, 13 2018 06:28:59 PM (IST)

Kota, Rajasthan, India

कोटा. भारत में सरकारी सेक्टर की पहली न्यूरो इंटरवेंशन लैब कोटा के एमबीएस अस्पताल में खुल गई। इस लैब में ब्रेन व गले की एंजियोग्राफी के साथ नसों के रोगियों का बेहतर तरीके से इलाज हो सकेगा। देश में सरकारी सेक्टर में कहीं भी न्यूरोलॉजी विभाग में ऐसी लैब नहीं है। इससे हाड़ौती ही नहीं, प्रदेश के रोगियों को फायदा होगा। इस लैब के भवन व उपकरण पर पौने दस करोड़ रुपए खर्च हुए है। मशीन नींदरलैण्ड से मंगवाई गई है। शनिवार को विधिवत रुप से मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गिरीश वर्मा व डॉ. विजय सरदाना ने इसका उद्घाटन किया।

बिच्छु के काटने से ब्रेन हेमरेज, सफल एंज्योग्राफी
पहले दिन लैब में बूंदी के खेड़ागांव के मरीज हेमराज (35) की बिच्छु के काटने से ब्रेन हेमरेज होने पर सफल एंज्योग्राफी की। इस लैब में वर्तमान में ब्रेन की एंजियोग्राफी (डिजिटल सब स्ट्रेक्शन) व गर्दन की एंजियोग्राफी की जाएगी। उसके बाद धीरे-धीरे लकवा का क्लोट जमना व नसों के गुच्छे को एक विशेष प्रकार की गोंद द्वारा निष्क्रिय करना की सुविधा मिलेगी।

छह साल से था इंतजार...
न्यूरो इंटरवेंशन लैब का प्रयास 2012 में शुरू किया गया था। उसके बाद 2013 में साढ़े तीन करोड़ रुपए आए जो लेप्स हो गए। उसके बाद अन्य इक्यूपमेंट्स के लिए १ करोड़ रुपए आए, वे भी लेप्स हो गए, फिर काफी प्रयास के बाद सरकार ने ५ करोड़ ५० लाख स्वीकृत किए, लेकिन वे कम पड गए तो ६ करोड़ २७ लाख रुपए इस कार्य के लिए स्वीकृत किए गए। ७० लाख रुपए आरएमआरएस से मिले। अन्य उपकरण के लिए २ करोड़ रुपए और आए। भवन निर्माण के लिए पूर्व मंत्री शांति धारीवाल ने विधायक कोष से ९६ लाख रुपए भी दिए। डॉ. सरदाना ने बताया कि इस लैब में १ करोड़ निर्माण कार्य, ६ करोड़ २७ लाख मशीन व ३ करोड़ उपकरण पर खर्च किए।

धक्के तक सीधे पहुंचेगी दवा
न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. विजय सरदाना ने बताया कि न्यूरो इंटरवेंशन लैब देश में सबसे आधुनिक और अपनी तरह की पहली लैब है। यह कैथ लैब की तर्ज पर न्यूरो कैथ लैब है। जिसमें आठ बेड का आईसीयू बनाया गया। इसमें ब्रेन और गर्दन की नसों की एंजियोग्राफी और इलाज हो सकेगा। लकवा रोगी की नसों में कैथेटर से सीधे धक्के वाले स्थान पर दवा पहुंचाई जा सकेगी। गर्दन की नसों में सिकुडऩ आने पर एंजियोग्राफी कर उसे दूर किया जा सकेगा।

कॉन्फ्रेसिंग रूम भी
इस लैब में कॉन्फ्रेसिंग रूम भी बनाया गया। जिसमें गंभीर मरीजों के इलाज के लिए देश-विदेश के डॉक्टर्स से सम्पर्क कर उनकी सलाह ले सकेंगे। वहीं ऑडियो विजुअल सिस्टम के माध्यम से तत्काल इलाज भी कर सकते है।

ये रहेगी सुविधा

  • न्यूरो कैथलैब एरिया, जिसमें मशीन लगी।
  • आठ ऑटोमेटिक बेड का आईसीयू व चार वेन्टीलेंटर।
  • मरीजों के लिए काउंसलिंग रूम।
  • तीन डॉक्टर्स व स्टाफ चेजिंग रूम।
  • तीन स्टोर रूम।
  • ऑटो क्लेव रूम।
  • सेन्ट्रल ऑक्सीजन सिस्टम।

यह लगाया स्टाफ

  • रेजीडेंट डॉक्टर्स
  • नर्सिंगकर्मी- ६
  • वार्ड ब्याज- २
  • कम्प्यूटर ऑपरेटर-१
  • रेडियोग्राफर-१
  • ईसीजी टेक्निशियन-१
  • इनका यह कहना

कोटा में न्यूरो इंटरवेंशन लैब के शुरू होने से चिकित्सा व मेडिकल कॉलेज जगत के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। इससे ब्रेन, गले की एंजियोग्राफी के साथ नसों के रोगियों का बेहतर इलाज हो सकेगा। मरीजों को जयपुर व अन्य जगहों पर इलाज के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।

डॉ. गिरीश वर्मा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज

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