न्यायाधीश की टिप्पणी : लोकसेवक भ्रष्ट हो जाए तो राष्ट्र की जड़ें कमजोर हो जाती हैं...जानिए पूरा मामला

इंजीनियर व ठेकेदार को पांच-पांच साल का कठोर कारावास व 50 हजार का अर्थदण्ड
जीएसएस बनाने में लाखों रुपए के भ्रष्टाचार का मामला

By: shailendra tiwari

Updated: 17 Feb 2021, 11:59 PM IST

कोटा. भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय कोटा (एसीबी कोर्ट) ने विद्युत विभाग में जीएसएस बनाने में छह साल पहले हुए लाखों रुपए के भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी इंजीनियर व ठेकेदार को पांच-पांच के कठोर कारावास और 50 हजार रुपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया है। फैसला देते हुए न्यायाधीश प्रमोद कुमार मलिक ने राजकीय विभागों में भ्रष्टाचार पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि लोकसेवक भ्रष्ट हो जाए तो राष्ट्र की जड़ें कमजोर हो जाती हैं, जिसका असर राष्ट्र के विकास पर पड़ता है।

सहायक निदेशक अभियोजन अशोक कुमार जोशी ने बताया कि विद्युत प्रसारण निगम जयपुर के 132/33 केवी सब स्टेशन खण्डार व भाड़ौती जिला सवाईमाधोपुर के निर्माण कार्य का मैसर्स यूबी इंजीनियर लि. दिल्ली व मैसर्स एंजेलिक इंटरनेशनल लि. नई दिल्ली को 2017 को कार्यादेश दिया गया। सब स्टेशन के निर्माण कार्य के पांचवें और अंतिम रनिंग बिल का भुगतान वर्कऑर्डर के विपरीत जाकर किया गया।

जांच में लाखों रुपए का अधिक भुगतान किया जाने एवं इस संबंध में एसीबी कोटा को गोपनीय सूचना मिलने पर हुई जांच में भ्रष्टाचार प्रमाणित पाए जाने पर एफआईआर दर्ज कर अनुसंधान किया गया। आरोपी तत्कालीन अधिशासी अभियंता रामसेवक मिश्रा, सहायक अभियंता ओम प्रकाश मीणा, कनिष्ठ अभियंता अशोक दुबे तथा ठेकेदार कम्पनी मैसर्स यूबी इंजीनियर लि. व मैसर्स एंजेलिक इंटरनेशनल लि. के प्रतिनिधि दिल्ली निवासी संतोष कुमार को 50 लाख 54 हजार 956 रुपए अधिक भुगतान का दोषी पाते हुए आरोप पत्र प्रस्तुत किया। न्यायालय की ओर से पारित निर्णय में आरोपियों को 41 लाख 20 हजार 778 रुपए की राज्य सरकार के आर्थिक राजस्व हानि कारित कर स्वयं को सदोष लाभ अर्जित करना पाते हुए दण्डित किया है।

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