बड़ा सवाल : सवा सौ रुपए में कैसे होगी सफाई

शहरी क्षेत्र के औषधालयों को बजट भी नहीं मिलता

By: Ranjeet singh solanki

Published: 30 Sep 2020, 05:18 PM IST

कोटा, सांगोद । सरकार स्वच्छता को लेकर पानी की तरह पैसा बहा रही है। स्वच्छता का संदेश लोगों तक पहुंचे इसके लिए कई विभागों को इसके लिए भारी भरकम बजट भी दिया जा रहा है लेकिन आयुर्वेद विभाग स्वच्छता के इस संदेश से कोसो दूर है। स्वच्छता में करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद औषधालय पर्याप्त बजट को तरस रहे है। औषधालयों की साफ-सफाई के लिए सरकार महज 125 रुपए प्रतिमाह का बजट देती है, जो काफी कम है। पहले से ही बिना चतुर्थ कर्मचारियों के भरोसे चल रहे औषधालयों में सरकार की यह व्यवस्था ऊंट के मुंह में जीरा साबित होने वाली कहावत जैसे चरितार्थ साबित कर रही है। इनमें भी शहरी क्षेत्र के औषधालयों को यह बजट भी नहीं मिलता। मजबूरन चिकित्सा कर्मचारियों को अपनी जैब ढीली करके सफाई व्यवस्था चलानी पड़ रही है या फिर स्वयं को सफाई करनी पड़ रही है। सांागोद क्षेत्र में विभाग के 13 औषधालय संचालित है। इनमें अधिकांश में सफाई के लिए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नहीं है। बजट भी इतना सा मिलता है जिससे कर्मचारी मिलना तो दूर सफाई के संसाधन तक खरीद नहीं सकते। साफ-सफाई के लिए इन्हें जो बजट मिल रहा है यदि इससे ज्यादा खर्च हो रहा है तो वो सम्बंधित औषधालय के अधिकारी को अपनी जेब से भुगतनी पड़ रही है। शहरी क्षेत्र के औषधालयों को सफाई के लिए कोई बजट नहीं मिलता। इसमें कोई दो राय नहीं की बिना राशि से कोई व्यक्ति भवनों की सफाई नहीं कर सकता। सफाई को लेकर सरकारी निर्देश है तो चिकित्साधिकारी को अपना औषधालय साफ और स्वच्छ रखना है। ऐसे में चिकित्सकों को अपनी जेब से राशि खर्च करनी पड़ती है या फिर खुद को ही सफाई करनी पड़ती है।

BJP Congress
Show More
Ranjeet singh solanki
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned