कोचों की धुलाई के लिए लगी फुल ऑटोमेटिक मशीन

एक कोच की बाहरी सतह की सफाई के लिए 300 लीटर पानी की आवश्यकता होगी। जिसमें 60 लीटर ताजा पानी एवं 240 लीटर रिसाइकल वाटर का उपयोग होगा। इससे प्रति कोच धुलाई में 240 लीटर ताजा पानी की बचत होगी। इस तरह प्रतिदिन 25680 लीटर ताजा पानी की बचत होगी।

By: Jaggo Singh Dhaker

Published: 30 Dec 2020, 12:06 AM IST

कोटा. कोटा जंक्शन के यार्ड की वॉशिंग लाइन में अब बहुत कम समय में ही ट्रेनों की चकाचक सफाई हो जाएगी। यह संभव होगा ऑटोमेटिक कोच वॉशिंग प्लांट से। देश के कई स्टेशनों पर एेसे प्लांट लगाए जा चुके हैं। वहीं पश्चिम मध्य रेलवे में एेसा पहला प्लांट कोटा में स्थापित किया गया है। इस पर करीब १ करोड़ ५३ लाख ७६ हजार २८० रुपए खर्च हुए हैं। अभी वॉशिंग लाइन में ट्रेनों के बाहरी हिस्से की मैनुअली सफाई होती है। इसमें समय तो ज्यादा लगता ही है साथ ही पानी भी काफी खर्च हो जाता है। ऑटोमेटिक कोच वॉशिंग प्लांट से 24 कोच की ट्रेन की सफाई पहले कम समय में हो जाएगी। इस प्लांट की मशीन में सेंसर लगे हैं। सेंसर इसके चलने का सही समय निर्धारित करता है। मशीन में बेलनाकार ब्रश, क्लीनिंग केमिकल की मदद से ट्रेन की सफाई की जाती है। इस प्लांट में उपयोग किए जाने वाले लगभग 80 फीसदी पानी को रिसाइकिल किया जा सकता है। है। इससे पानी की खपत काफी कम हो जाती है।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक अजय कुमार पाल ने बताया कि प्लांट का उद्घाटन पश्चिम मध्य रेलवे के महाप्रंबधक शैलेन्द्र कुमार सिंह ने जबलपुर से रिमोट कन्ट्रोल दबा कर किया। इस ऑटोमेटिक कोच वाशिंग प्लांट के अंदर एक-एक फ्रेश एवं वेस्ट पानी स्टोरेज के टेंक स्थापित किए गए हैं। एक कोच की बाहरी सतह की सफ ाई के लिए 300 लीटर पानी की आवश्यकता होगी। जिसमें 60 लीटर ताजा पानी एवं 240 लीटर रिसाइकल वाटर का उपयोग होगा। इससे प्रति कोच धुलाई में 240 लीटर ताजा पानी की बचत होगी। इस तरह प्रतिदिन 25680 लीटर ताजा पानी की बचत होगी। इसके साथ ही कोचों की बाहरी धुलाई के लिए लगने वाली मैन पावर एवं गाडिय़ों के कोचों की बाहरी धुलाई में लगने वाले समय की भी बचत होगी।

Show More
Jaggo Singh Dhaker
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned