चंबल के तट पर गणपति ने दिखाया अपना वास्तविक रूप तो चमत्कार देख श्रद्धालुओं की फटी रह गई आंखे

कोटा. गोदावरी धाम परिसर में गणपति की प्रतिमा का चोला उतर गया। अब शुभ मुहूर्त देखकर दोबारा चोला चढ़ाकर शृंगार किया जाएगा। मंदिर के व्यवस्थापक शैलेन्द्र भार्गव ने बताया कि बुधवार गणपति के पूजन व शृंगार करने के दौरान प्रतिमा ने चोला छोड़ा।

 

By: Hemant Sharma

Published: 29 Oct 2020, 12:24 PM IST


कोटा. गोदावरी धाम परिसर में बुुधवार को गणपति की प्रतिमा का चोला उतर गया। अब शुभ मुहूर्त देखकर दोबारा चोला चढ़ाकर शृंगार किया जाएगा। मंदिर के व्यवस्थापक शैलेन्द्र भार्गव ने बताया कि बुधवार गणपति के पूजन व शृंगार करने के दौरान प्रतिमा ने चोला छोड़ा। उन्होंने बताया कि गणपति की प्रतिमा का पहली बार चोला उतरा है। इससे पहले कभी उन्होंने चोला उतरते नहीं देखा। भार्गव ने बताया कि यह कहा नहीं जा सकता कि कितनी पुरानी है, लेकिन मंदिर में स्थापित गणपति की यह प्रतिमा काफी प्राचीन है।


मूल स्वरूप आया सामने


प्रतिमा का पहली बार मूल स्वरूप सामने आया है। गणपति के एक हाथ में मोदक व दूसरे में शस्त्र अंकुश है। विग्रह काफी प्रभावशाली है। भार्गव ने बताया कि धार्मिक दृष्टि में प्रतिमा का चोला छोडऩा शुभ माना जाता है। उन्होंने बताया कि अब श्रेष्ठ मुहूर्त के अनुसार प्रतिमा पर नया चोला चढ़ाएंगे। इससे पहले बुधवार को चोला छोडऩे के बाद दूग्धाभिषेक कर पूजन किया गया।


चोला छोडऩे का यह कारण


क्या कहती है विज्ञानइधर राजकीय महाविद्यालय में एसोसिएट प्रो. मोनिका दक्षिणी बताती है कि प्रतिमाओं में घी व सिंदूर तैयार किया हुआ घोल चोला चढ़ाते हैं। प्र्रतिमाओं पर इसके परते बढ़ती जाती है। परतों का वजन काफी भारी होने के कारण संभवतया यह प्रतिमा से यह अलग हो जाता है। तापमान भी इसका एक कारण हो सकता है।

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