गरीब प्रसूताओं का घी खा रहे बिचौलिए, सरकार को लग रहा लाखों का चूना.... जानिए क्या है मामला

महिलाओं को पांच किलो घी देने का प्रावधान है। इसके लिए अस्पताल से टोकन दिया जाता है। लेकिन डेयरी बूथ संचालक घी देने में करते हैं टालमटोल...

By: Dhirendra

Published: 13 Aug 2019, 05:43 PM IST

 

केस- एक

धारड़ी निवासी फूलकुमारी पत्नी बालमुकुंद का प्रसव 29 नवंबर 2018 को हुआ था। उसके पति बीपीएल योजना का घी लेने कई बार डेयरी बूथ पर गए। जहां संचालक ने उनसे घी आने पर देने की बात कही। चक्कर लगाते-लगाते आठ महीने बीत गए। अंत में डेयरी संचालक ने नया टोकन बनवाने की बात कही और घी देने से इनकार कर दिया।

केस-2
रैनखेड़ा निवासी अमिता पत्नी शिवराज का प्रसव 12 जुलाई 2019 को हुआ था। महिला के पति ने बताया कि पहले तो डेयरी बूथ संचालक ने कई दिनों तक उसे चक्कर कटवाए। आखिरकार एक दिन काफी जिद करने पर पैकिंग खुला घी थमा दिया और एक कागज पर लिखवा लिया कि उसने ये घी स्वैच्छा से लिया है।

केस-3
धावदकलां निवासी विमला पत्नी रणजीत मेहर का प्रसव 18 नवंबर 2018 को हुआ। परिजन योजना का घी लेने के लिए महीनों डेयरी बूथ पर चक्कर लगाते रहे। हर बार निराशा ही हाथ लगी। आखिर जब आक्रोशित परिजनों ने नाराजगी जताई तो उन्हें अस्पताल से नया टोकन लाने को कह दिया।

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रावतभाटा. राज्य सरकार गरीब तबके के लोगों को लाभान्वित करने के लिए विभिन्न सरकारी योजनाएं चला रही हैं, लेकिन इनका लाभ पात्र लोगों तक पहुंच ही नहीं रहा। इधर, बिचौलियों की चांदी हो रही है। राज्य सरकार ने बीपीएल परिवार की महिलाओं को प्रथम प्रसव के बाद कमजोरी से उबारने के लिए घी खिलाने की मंशा थी। योजना के अंतर्गत प्रसव के बाद महिलाओं को पांच किलो घी देने का प्रावधान है। जिसमें घी प्राप्त करने के लिए अस्पताल से टोकन दिया जाता है। प्रसूताओं को टोकन तो मिल रहे हैं, लेकिन विभागीय अनदेखी के चलते उन तक पहुंचने से पहले ही घी हजम हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने बीपीएल परिवार की प्रसूताओं को घी वितरित करने के लिए रावतभाटा में एक डेयरी से अनुबंधन कर रखा है। दूर दराज क्षेत्र से प्रसूताओं के परिजन घी लेने पहुंचते हैं तो उन्हें अगली बार आने का कहकर टरका दिया जाता है। कई चक्कर कटवाने के बाद भी घी नहीं देते। घी की कीमत से ज्यादा राशि आने-जाने में खर्च हो जाती है।

टोकन की वैधता सात दिन
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार शुरू में राजकीय अस्पताल से प्रसव के बाद महिलाओं को ऑफलाइन टोकन जारी होते थे। जिसकी वैधता तिथि नहीं होने पर किसी भी समय डेयरी से पांच लीटर घी लिया जा सकता था। गत वर्ष अक्टूबर से नए नियमों के अनुसार ओनलाइन टोकन जारी होने लगे जो एक बार ही मिलता है। इसकी वैधता भी सात दिनों की है। इसके बाद इसे इस्तेमाल में नहीं लिया जा सकता।

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परिजनों को देनी चाहिए थी जानकारी

बीपीएल परिवार की प्रसूताओं को प्रथम प्रसव के बाद मिलने वाले पांच किलो घी के वितरण व्यवस्था जिलास्तर पर रावतभाटा में नया बाजार क्षेत्र स्थित डेयरी पर कर रखी है। योजना के अनुसार प्रसूताओं को अस्पताल से छुट्टी के समय टोकन जारी कर दिया जाता है। जिसकी वैधता सात दिनों की होती है। डेयरी संचालक की ओर से घी नहीं दिए जाने की जानकारी नहीं है, परिजनों को हमें जानकारी देनी चाहिए थी। मामले को जल्द ही दिखवाते हैं।
डा. जीजे परमार, ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी, रावतभाटा

Dhirendra Desk
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