कोटा वालों के लिए नया साल खुशियां लेकर आया है..

कोचिंग नगरी मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व बाघिनों की शिफ्टिंग को लेकर को लेकर वन्यजीव प्रेमियों को गजब का उत्साह था।

By: shailendra tiwari

Published: 18 Dec 2018, 11:00 PM IST

कोटा. मुकुन्दरा हिल्स में बाघिन शिफ्टिंग को लेकर वन्यजीव प्रमियों का इंतजार आखिर मंगलवार की रात को पूरा हो गया। रणथंभौर से आई बाघिन सुल्ताना ने जैसे ही शहंशाह एमटी-1 की सियासत में कदम रखा लोगों के लिए खुशी की बहार आ गई।
कोचिंग नगरी मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व बाघिनों की शिफ्टिंग को लेकर को लेकर वन्यजीव प्रेमियों को गजब का उत्साह था। वर्ष 2013 में मुकुन्दराहिल्स टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद करीब पांच साल टाइगर रिजर्व में सुनापन छाया रहा, और इसमें किसी बाघ को शिफ्ट नहीं किया गया। गत वर्ष2017 में सरकार चेती और मुकुन्दरा में बाघों की जल्द शिफ्टिंग की योजनाा तैयार की। योजना के तहत दिसम्बर 2017 तक दो बाघ व तीन बाघिनों को छोडऩा तय हुआ। इसके लिए बाघ को लाकर प्रारंभ में सेल्जर क्षेत्र में छोडऩे की योजना बनाई गई, लेकिन बाद में इसे दरा क्षेत्र में छोडऩे की योजना बनी। इसके साथ ही इसके लिए 26 हैक्टेयर का एनक्लोजर व 82 वर्गकिलोमीटर पर चार दीवारी की गई। करीब 5 वर्ष के इंतजार के बाद रणथंभौर से निकलकर बागी हुएटी-91 को रामगढ़ अभयारण्य से रेस्क्यू कर मुकुन्दरा मे छोड़ा गया। फिर अब नौ माह बाद अंगना में आई बहार रणथंभौर से बाघ टी-91 निकलकर रामगढ़ अभयारण्य में आ गया था। इसे 3 अप्रेल को तड़के रेस्क्यू कर मुकुन्दरा में लाया गया था, लेकिन टी-91 (अब एमटी-1 )को मुकुन्दरा में छोडऩे की प्रक्रिया में कमियां निकालते हुए न्यायालय में याचिका दायर की थी। इससे मुकुन्दरा में बाघिन की शिफ्टिंग रूकी हुई थी। गत 27 नवम्बर को उच्च न्यायालय ने इस याचिका को खारिज कर मुकुन्दरा के लिए सुल्ताना का रास्ता साफ कर दिया। मुकुन्दरा इसके बाद से ही टाइगर रिजर्व में एम टी वन-1 की जोड़ीदार लाने की तैयारियां की जा थी। करीब 9 माह बाद टाइगर रिजर्व में एमटी वन के लिए जोड़ीदार मिली है।

सुनो सुल्ताना नया घर ऐसा है
मुकुन्दरा हिल्स को 9 अप्रेल 2013 को टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। यह करीब 760 वर्ग किमी में चार जिलों कोटा, बूंदी, झालावाड़ व चित्तौडगढ़़ में फैला है। करीब 417 वर्ग किमी कोर और 342 वर्ग किमी बफर जोन है। इसमें मुकुन्दरा राष्ट्रीय उद्यान, दरा अभयारण्य, जवाहर सागर व चंबल घडिय़ाल अभयारण्य का कुछ भाग शामिल है।यहां विभिन्न प्रजातियों की वनस्पति व वन्यजीव हैं।एतिहासिक व धार्मिक स्थल भी हैं। बीच में बहती चंबल का सौन्दर्य विशेष है।

देखे कई उतार चढ़ाव
दरा अभयारण्य को राष्ट्रीय पार्क बनाने से लेकर मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व घोषित किए जाने और टागइर रिजर्व घोषित होने के बाद इसमें बाघों को लाकर शिफ्ट करने तक कई उतार चढ़ाव आए। कभी इसका नाम जवाहर रखने की बात हुई कभी राजीव तो कभी कुछ और लेकिन आखिर इसे 9 अप्रेल 2013 में टागइर रिजर्व घोषित किया गया। यह टागइर रिजर्व कोटा, बूंदी, झालावाड़ व चित्तौडगढ़़ जिले में फैला हुआ है।


यूं रखा गया मुकुन्दरा हिल्स टागइर रिजर्व नाम
कोटा रियासत के पूर्व शासक महाराव मुकुन्द ने दरा के पहाड़ी वन क्षेत्र को शिकारगाह के रूप में विकसित किया था। चंबल नदी के निकट सेल्जर व कोलीपुरा से दरा होते हुए कालीसिंध तक फैली हुई समांतर पहाडिय़ों का नामकरण राव मुकुन्द के नाम पर मुकुन्दरा हिल्स रखा गया। इन्हीे मुकुन्दरा हिल्स पहाडिय़ों के नाम पर इस टाइगर रिजर्व का नाम मुकुन्दरा हिल्स टागइर रिजर्व रखा गया।

बार बार बदले नाम
मुकुन्दरा हिल्स की योजना वर्षों से कागजों में दौड़ रही थी।

वर्ष 2006 में दरा को राष्ट्रीय पार्क के रूप में विकसित करने की अधिसूचना जारी हुई।
30 वर्ष पहले 27 अक्टूबर 1988 में पहली बार जवाहर शताब्दी राष्ट्रीय उद्यान बनाने का प्रस्ताव बना।

23 अप्रेल 2003 में दरा क्षेत्र में बाघ के आने की सूचना आई।
12 जून 2003 में तत्कालिक उप वन संरक्षक वी के सालवान ने सोनिया गांधी के समक्ष दरा अभयारण्य को राष्ट्रीय उद्यान बनाने का प्रस्ताव रखा।

15 जुलाई 2003 में रणथंभौर से निकलकर आए बाघ ब्रोकनटेल की ट्रेन से कटने से मौत हो गई। इसके बाद वन विभाग व सरकार को विश्वास हुुआ कि क्षेत्र बाघों के लिए उपयुक्त है।

3 सितम्बर 2003 में केबिनेट में प्रस्ताव पारित कर दरा एवं घडिय़ाल अभयारण्य को मिलाकर करीब 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को मिलाकर राजीव गांधी राष्ट्रीय उद्यान बनाने की घोषणा की। लेकिन यह बातें ही रही। गजट में इसका प्रकाशन नहीं हुआ।

वर्ष 2005 में राष्ट्रीय उद्यान का प्रस्ताव केबिनेट को भेजा गया।-वर्ष 2006 में इसे मुकुन्दरा हिल्स के नाम से गजट में प्रकाशित किया गया, लेकिन क्षेत्र मेंं आने वाले गांवों के पुनर्वास व ग्रामीणों के अधिकारों के अधिकारों के अधिग्रहण की कार्रवाई होनी थी। इसके अभाव में मामला अटक गया। कुछ वर्ष मामला अटका रहने के बाद ग्रामीणों के अधिकारों को अधिग्रहित किया।


9 अप्रेल 2013 को दरा अभयारण्य, जवाहर सागर, चंबल घडिय़ाल अभयारण्य को मिलाकर मुकुन्दरा हिल्स टागइर रिजर्व घोषित किया गया।

वर्ष 2017 के प्रारंभ में सरकार ने टागइर रिजर्व में वर्ष के अंत तक (31 दिसम्बर 2017 )तक बाघ को शिफ्ट करना तय हुआ।


3 अप्रेल 2018 को मुकुन्दरा में रामगढ़ से रेस्क्यू कर लाए गए बाघ को छोड़ा। अप्रेल मध्य में इसके खिलाफ याचिका दर्ज हुई

8 माह न्यायालय में प्रकरण चला
27 नवम्बरको न्यायालय ने याचिका खारिज की।

9 दिसम्बर को विभाग फैसला सुनाया गया।
18 दिसम्बर को बाघिन को

shailendra tiwari Desk
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned