नियम तोडऩे वालों पर आयकर, एसीबी और प्रशासन मेहरबान

नियम तोडऩे वालों पर आयकर, एसीबी और प्रशासन मेहरबान

shailendra tiwari | Publish: May, 18 2018 04:09:42 PM (IST) Kota, Rajasthan, India

सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर सरकार द्वारा तय दर से अधिक राशि की रोगियों से वसूली कर रहे हैं।

कोटा . आय से अधिक कमाई के मामले में जेल जाने वाले आरपी शर्मा भले ही पहले डॉक्टर हों, लेकिन कोटा में ही रोजाना रोगियों से लाखों रुपए की जबरन वसूली हो रही है। सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर सरकार द्वारा तय दर से अधिक राशि की रोगियों से वसूली कर रहे हैं।

मजबूर पेशेंट इस राशि को देने को बाध्य हो रहा है। वसूली के खेल में कुछ डॉक्टरों के तो नाम शहर में काफी प्रसिद्धि पा चुके हैं। ऐसे सरकारी डॉक्टर नेताओं और अफसरों की सेवा में भी कोई कसर नहीं छोड़ते, जिसकी वजह से इस लूट पर लगाम नहीं लग पा रही है।

 

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सरकार से लाखों रुपए का वेतन मिलने के बाद भी चिकित्सक घर पर मरीजों को देर रात तक देखते हैं, जिसका सीधा असर दूसरे दिन अस्पताल में मरीजों को देखते वक्त पड़ता है। सीनियर डॉक्टर्स आउटडोर में नहीं आते और अपनी विजिट या अन्य काम का बोझ बताते हुए मरीज नहीं देखते।

 

पिछले लम्बे समय से कई सीनियर डॉक्टर नए अस्पताल व एमबीएस के आउटडोर के समय नहीं पहुंच रहे हैं। रेजीडेंट चिकित्सकों के भरोसे ही आउटडोर में रोगियों की कतार को कम किया जा रहा है। ये ही नहीं सीनियर डॉक्टर अपने घरों पर तय से अधिक फीस वसूल रहे हैं, जबकि राज्य सरकार ने फीस निर्धारित कर रखी है।

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हालात यह कि नयापुरा इलाके में रहने वाले एक चिकित्सक के घर पर तय से अधिक फीस देने के बाद भी दो से तीन दिन तक इंतजार करना पड़ता है। सरकार के किसी भी विभाग की इस पर नजर नहीं है। गौरतलब है कि कोटा में ही एसीबी ने कुछ वर्ष पहले मेडिकल कॉलेज के अस्थि विभागाध्यक्ष को अधिक फीस वसूलने के मामले में रंगे हाथों पकड़ा था।


चिकित्सक वसूल रहे 150 से 300 रुपए तक फीस
राज्य सरकार द्वारा नियमानुसार जो फीस निर्धारित की हुई है उससे अधिक चिकित्सक मरीज से ले रहे हैं। इस समय किसी भी चिकित्सक की फीस 75 रुपए नहीं है। हर चिकित्सक 150 से 300 या इससे भी अधिक फीस मरीजों से वसूल रहे हैं। इसके साथ ही दवाओं में कमीशन व जांच में भी इनका कमीशन रहता है।

कई चिकित्सक निर्धारित कम्पनी की दवाएं ही लिखते हैं। दवाओं व जांच के हर खेल को हर व्यक्ति समझता है लेकिन इस दिशा में अभी तक किसी भी चिकित्सक या फर्म पर कार्रवाई नहीं हुई है। आपसी साठ गांठ से सारा खेल खुलेआम चलता है।

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