scriptGround water fluctuation: more than 70 percent decline in 9 districts | भू-जल का उतार-चढ़ाव: 9 जिलों में 70 फीसदी से ज्यादा गिरावट | Patrika News

भू-जल का उतार-चढ़ाव: 9 जिलों में 70 फीसदी से ज्यादा गिरावट

राजस्थान में 59 प्रतिशत कुओं में भूजल स्तर में गिरावट पाई गई है। वहीं मध्य प्रदेश के लगभग 34 प्रतिशत कुओं में, बिहार के 18 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 26 प्रतिशत कुओं में गिरावट मिली है।

कोटा

Updated: March 26, 2022 09:15:33 am

जग्गोसिंह धाकड़
कोटा. राजस्थान के सभी जिलों में 916 कुओं ground water के अध्ययन में भू-जल स्तर के चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं। इनमें से 545 कुओं में जल स्तर में गिरावट दर्ज की गई है। भू-जल स्तर घटने के मामले ज्यादा और वृद्धि होने के मामले कम सामने आए हैं। जलशक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार अजमेर, अलवर, बाडमेर, बूंदी, दौसा, धौलपुर, झुंझुनूं, सीकर और सिरोही जिले में हालत चिंताजनक हैं। यहां 70 प्रतिशत से ज्यादा कुओं में जल स्तर घटा है। भू-जल स्तर की गिरावट और बढ़ोतरी का अध्ययन करने के लिए केंद्रीय भूजल बोर्ड की ओर से कुओं के एक नेटवर्क के माध्यम से देश भर में क्षेत्रीय आधार पर भूजल स्तरों की आवधिक मॉनीटरिंग की जा रही है। भू-जल में दीर्घ अवधि उतार-चढ़ाव का आकलन करने के लिए नवंबर 2021 के दौरान सीजीडब्ल्यूबी की ओर से एकत्रित जल स्तर डाटा की नवंबर के दशकीय औसत 2011- 2020 के साथ तुलना की गई। जल स्तर के डेटा विश्लेषण से पता चलता है कि राजस्थान में 59 प्रतिशत कुओं में भूजल स्तर में गिरावट पाई गई है। वहीं मध्य प्रदेश के लगभग 34 प्रतिशत कुओं में, बिहार के 18 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 26 प्रतिशत कुओं में गिरावट मिली है। वहीं शेष कुओं के भूजल स्तर में वृद्धि पाई गई है। राजस्थान में 41 प्रतिशत कुओं में भूजल स्तर पर वृद्धि हुई है।
WATER
जिला- वृद्धि-गिरावट प्रतिशत में
कोटा- 35-65
बारां- 35-65
बूंदी- 27-73
झालावाड़- 63-37
अजमेर- 25-75
अलवर- 14-86
बांसवाड़ा- 30-68
बाड़मेर- 28-72
भरतपुर- 39-61
भीलवाड़ा- 58-42
बीकानेर- 40-60
चित्तौड़गढ़- 50-50
चूरू- 57-43
दौसा- 23-77
धौलपुर- 27-73
डूंगरपुर- 40-60
गंगानगर- 41-59
हनुमानगढ़- 40-60
जयपुर- 37-63
जैसलमेर- 57-43
जालौर- 35-65

झुंझुनूं- 8-92
जोधपुर- 40-60
करौली- 50-50
नागौर- 50-50
पाली- 32-68
प्रतापगढ़- 69-31
राजसमंद- 41-59
सवाई माधोपुर- 76-24
सीकर- 21-79
सिरोही- 8-92
टोंक- 74-26
उदयपुर- 43-57
कुल 41-59
कोटा में सतही जल स्रोत फिर भी पी रहे बोरिंग का पानी
भू-जल स्तर घट रहा है, ऐसे में बड़ी पेयजल योजनाएं सतही जल स्रोत यानी नदी और बांधों पर बनाई जा सकती हैं। इस बार कोटा संभाग में नदी और बांधों से जुड़ी पेयजल योजनाओं के लिए बजट में 5 हजार करोड़ की घोषणा की गई है। वहीं कोटा शहर में चम्बल का पानी उपलब्ध होने के बाद भी मल्टी स्टोरी और कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों में बोरिंग के पानी की आपूर्ति हो रही है। बोरिंग के पानी में फ्लोराइड और कई अन्य हानिकारक तत्व शामिल होते हैं, जो स्वास्थ्य पर विपरीत असर डालते हैं।

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