घर खाली, मोबाइल बंद, गिरफ्तारी के डर से भागे डॉक्टर

हड़ताल के पांचवा दिन: अस्पतालों में हालात बिगड़े, चिकित्सको के घरों पर दबिश। निजी अस्पतालों की ओर जाने लगे रोगी।

By: ritu shrivastav

Published: 11 Nov 2017, 02:29 PM IST

सेवारत चिकित्सकों की हड़ताल के पांचवें दिन हालात बिगड़ गए। ऑपरेशन 40 फीसदी तक कम हो गए हैं। वहीं रोगी निजी अस्पतालों की ओर रुख कर रहे। शुक्रवार को अस्पताल में भर्ती होने वाले रोगियों की संख्या में बड़ी गिरावट देखी गई। एमबीएस व जेके लोन में अपने-अपने विभागों के एचओडी ने ओपीडी में सेवाएं दी। दूसरी ओर रेस्मा के तहत कार्रवाई करने के लिए पुलिस गुरुवार देर रात सेवारत चिकित्सकों के घर व अन्य ठिकानों पर पहुंची और दबिश दी। गिरफ्तारी के भय से सेवारत चिकित्सक व रेजीडेंट डॉक्टर्स भूमिगत हो गए। कई डॉक्टर्स ने अपने मोबाइल भी स्वीच ऑफ कर लिए हैं। जिन डॉक्टर्स के घर व अन्य स्थानों पर पुलिस ने दबिश दी उनमें जिला सेवारत संघ के डॉ. राजेश सामर, डॉ. अभिमन्यु, डॉ.चंदन शर्मा, डॉ.रहीस खान व डॉ.प्रभाकर शामिल हैं।

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40 फीसदी कम हो गए ऑपरेशन

ऑपरेशन थिएटर प्रभारी डॉ. एससी दुलारा ने बताया कि रेजीडेंट डॉक्टर्स के हड़ताल पर जाने से मरीजों के ऑपरेशन की लिस्ट कम कर दी गई है। शुक्रवार को एमबीएस में 15, एनएमसीएच में 15 व जेके लोन में 12 ऑपरेशन किए गए। जबकि एमबीएस में प्रतिदिन औसतन करीब 30, एनएमसीएच में 25 व जेके लोन में 15 ऑपरेशन होते हैं। एमबीएस में ईएनटी के 7, ऑथोपेडिक के 6 व सर्जरी में 1 ही ऑपरेशन किया गया।

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वार्डों में घटे भर्ती मरीज

आउडडोर में भी चिकित्सकों की संख्या कम होने से रोगियों को लम्बी कतारों से घंटों इंतजार करना पड़ रहा। एमबीएस चिकित्सालय में शुक्रवार को लाइनें ओपीडी की गैलरी से बाहर निकल गई। हर एक लाइन में करीब 80 लोग लगे थे। मरीजों का नम्बर डेढ़ से दो घंटे में आया। जेके लोन व न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भी हालात जस के तस रहे। हड़ताल से पूर्व एमबीएस में ओपीडी जो 3500 तक पहुंच गया था, वह शुक्रवार को खिसककर 1800 रह गया। वहीं भर्ती मरीज महज 44 ही रह गए जबकि प्रतिदिन 130 के करीब भर्ती किए जाते थे। रोगी मजबूरन निजी अस्पताल की ओर रुख कर रहे हैं। दरा के पास भंवरिया डडवाडा निवासी शंभू दयाल दरा से इलाज कराने कोटा एमबीएस चिकित्सालय आया था। लेकिन हड़ताल के चलते वह निजी अस्पताल में चला गया।

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बर्न वार्ड में तड़प रही, तीन साल की बच्ची

एमबीएस के बर्न वार्ड में भर्ती तीन वर्षीय मासूम रितिका को भी शुक्रवार को समय पर इलाज नहीं मिला। रेजीडेंट की हड़ताल के चलते इस मासूम को कोई देखने नहीं आया। पिता महावीर ने बताया कि वह काश्तकार है और बहुत गरीब है। उसके पास निजी अस्पताल में इलाज के पैसे नहीं है। पैसे होते तो वह यहां से बेटी को कहीं और ले जाता। उन्होंने कहा कि रितिका घर पर ही खेल रही थी तभी अचानक गर्म सब्जी की भगोनी के पास पहुंच गई और उसके ऊपर गिर गई। सात नवम्बर को उसे यहां भर्ती कराया था और तभी से हड़ताल चल रही हैै। रितिका 15 प्रतिशत बर्न है और थोडी सी हलचल से चीख उठती है।

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कलक्टर बोले-टेम्परेरी बेस्ड डॉक्टर लगाएं

सेवारत चिकित्सकों की हड़ताल के समर्थन में रेजीडेंट डॉक्टर्स के भी शामिल होने से उत्पन्न समस्या का जायजा लेने जिला कलक्टर रोहित गुप्ता एमबीएस अस्पताल पहुंचे। उन्होंने ओपीडी में हालात का जायजा लिया, वहीं अधीक्षक को निर्देश दिए कि टेम्परेरी बेस पर डॉक्टर्स को लगाएं जिन्हें तीन हजार रुपए प्रतिदिन मानदेय दिया जाए। कलक्टर ने ओपीडी सर्जरी, चर्मरोग, ईएनटी, आर्थोपेडिक विभागों का निरीक्षण किया।

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एडीएम ने किया जेके लोन का निरीक्षण

रेजीडेंट की हड़ताल के चलते व्यवस्थाओं का जायजा लेने एडीएम प्रशासन सुनिता डागा जेके लोन चिकित्सालय पहुंची। उन्होंने वार्ड व ओपीडी की व्यवस्थाएं देखी। आईसीयू, पीआईसीयू, डेंगू वार्ड सहित कई वार्डों को देखा। जेके लोन अधीक्षक डॉ. आरके गुलाटी ने बताया कि सीनियर डॉक्टर व्यवस्था संभाल रहे हैं। उन्होंने बताया कि एडीएम ने मरीजों से बात की और मिल रही सुविधाओं की भी जानकारी ली।

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पुलिस का डर, काम पर लौटे दो डॉक्टर

सेवारत चिकित्सकों की हड़ताल के बाद सरकार द्वारा रेस्मा लागू करने के साथ ही पुलिस ने अब डॉक्टर्स की धरपकड़ शुरू कर दी है। दादाबाड़ी पुलिस ने शुक्रवार को दादाबाडी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के प्रभारी डॉ. राजेन्द्र शर्मा व फिजीशियन डॉ. दिलीप विजय को थाने लाकर पूछताछ की। दादाबाड़ी थानाधिकारी रामकिशन ने बताया कि डॉक्टर्स को पूछताछ के लिए थाने लाए थे। उनसे मरीजो को चिकित्सा सेवाएं नहीं देने के सम्बंध में पूछताछ की। इस पर दोनों ही डॉक्टर्स ने शनिवार से कार्य पर आने की बात कही। इसके बाद उन्हें छोड़ दिया। सेवारत चिकित्सक संघ के अध्यक्ष डॉ. दुर्गाशंकर सैनी ने कहा कि डॉक्टर्स को पकड़ा गया तो सभी चिकित्सक हड़ताल में शामिल हो जाएंगे।

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