अतिक्रमण के आगे बेबस न्यास ! कार्यवाही के नाम पर यह दे डाली सलाह....

Suraksha Rajora

Publish: Mar, 17 2019 02:03:48 PM (IST) | Updated: Mar, 17 2019 02:03:49 PM (IST)

Kota, Kota, Rajasthan, India

कोटा. शहर के खंड गांवड़ी क्षेत्र में चंबल नदी किनारे सरकारी बीहड़ भूमि पर अवैध रूप से भूखंड बेचने के मामले में नगर विकास न्यास ने स्वीकार किया है कि वहां भूमाफिया सक्रिय है। इसके लिए न्यास की ओर से सार्वजनिक सूचना जारी की गई है। इसमें लिखा है कि लोकसभा चुनाव के कारण आदर्श आचार संहिता प्रभावी है। यह ध्यान में आया है कि इस दौरान कुछ भू-माफिया भोले-भाले लोगों को सरकारी जमीन को निजी स्वामित्व की बताकर विक्रय करने पर आमादा हैं।

 

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इसके माध्यम से लोगों को सलाह दी गई है कि ऐसे में भूखंड क्रय करते समय पूरी सावधानी बरतते हुए दस्तावेज में पट्टा, रजिस्ट्री, लेआउट-प्लान, विक्रय अभिलेख, नाम हस्तांतरण, पंजीकृत मुख्तार आम और बेचाननामा जैसे दस्तावेज की मांग करें।स्कीम यूआईटी अथवा नगर निगम से संबंधित होने पर सेल परमिशन देखें, दस्तावेज को देखकर संतुष्ट होने के बाद ही कोई कदम उठाएं।सरकारी भूमि की खरीद-फरोख्त किसी भी रूप में जरिए इकरारनामा, एग्रीमेंट आदि किया जाना अवैध एवं गैर कानूनी है।

 

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इसके लिए सजा का प्रावधान है।इसके लिए न्यास अतिक्रमण निरोधक दस्ता सक्रिय है तथा इस प्रकार की स्थिति सामने आने पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।ऐसे में कोई हानि होती है तो उसके लिए क्रेता स्वयं जिम्मेदार होंगे।एक साल में हटाना था अतिक्रमणएडवोकेट डॉ. महेशचंद्र शर्मा ने बताया कि हाईकोर्ट में लगी एक याचिका पर 15 मार्च 2016 को हुए निर्णय की पालना में न्यास को एक साल में अतिक्रमण हटाना था, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।

 

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जुलाई 2016 में न्यास की ओर से राज्य सूचना आयोग को भेजे गए एक पत्र में भी इस बात का उल्लेख किया था कि अतिक्रमण हटाने से पहले सर्वे की कार्रवाई की जा रही है।यहां सघन आबादी है, इसमें से अतिक्रमियों को छांटा जाएगा। इसके लिए दो गार्ड रखे गए हैं, वे नया अतिक्रमण नहीं हो, इसकी निगरानी कर रहे हैं। मिट्टी नहीं कटे, इसलिए पेड़ लगाने की मांग उठाईयहां अतिक्रमण रोकने के लिए क्षेत्र के लोगों ने मई 2017 में यहां पौधरोपण करने के न्यास को पत्र लिखा था।

 

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इसमें उन्होंने बताया कि खंडगांवड़ी के खसरा नम्बर सात की जमीन न्यास के अधिकार क्षेत्र में है, यह बहुत ही ऊबड़ खाबड़ है। कभी यहां घना जंगल हुआ करता था, जिसमें तरह-तरह के पशु-पक्षियों और रेंगने वाले जीव रहते थे। कई सालों से यहां पेड़ों की कटाई होने से मिट्टी की पकड़ ढीली होने लगी है।

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