जेके लोन अस्पताल बांट रहा कोरोना संक्रमण!

नवजात बच्चों की मौतों के मामले में सुर्खियों में रहे जेके लोन अस्पताल में एक बार फिर लापरवाही का कोरोना संक्रमण दिखा। अस्पताल में भर्ती पांच प्रसूताएं प्रसव के बाद रविवार को कोरोना पॉजिटिव आ गई। जबकि पांचों महिलाएं अलग-अलग क्षेत्र की निवासी है। अस्पताल में प्रसूताओं के एक साथ पॉजिटिव आने के बाद जिला प्रशासन में हड़कम्प मच गया।

 

 

By: Abhishek Gupta

Updated: 10 May 2020, 11:05 PM IST

कोटा. नवजात बच्चों की मौतों के मामले में सुर्खियों में रहे जेके लोन अस्पताल में एक बार फिर लापरवाही का कोरोना संक्रमण दिखा। अस्पताल में भर्ती पांच प्रसूताएं प्रसव के बाद रविवार को कोरोना पॉजिटिव आ गई। जबकि पांचों महिलाएं अलग-अलग क्षेत्र की निवासी है। अस्पताल में प्रसूताओं के एक साथ पॉजिटिव आने के बाद जिला प्रशासन में हड़कम्प मच गया। जेके लोन अस्पताल में पिछले एक माह के अंदर भर्ती आठ प्रसूताएं अब तक कोरोना पॉजिटिव आ गई। लगातार प्रसूताओं के कोरोना पॉजिटिव आने से अस्पताल कोरोना का हॉट स्पॉट बन गया।
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- अस्पताल के यूं बताते आंकड़े
- अस्पताल में पहली बार 19 अप्रेल को मकबरा निवासी एक प्रसूता कोरोना
पॉजिटिव आई थी, लेकिन उसे रातों-रात कोविड नए अस्पताल में रैफर कर दिया।
- 22 अप्रेल को हॉट स्पॉट एरिया चन्द्रघटा निवासी प्रसूता कोरोना पॉजिटिव मिली।
- 29 अप्रेल को रंगपुरा क्षेत्र के संजय नगर निवासी प्रसूता कोरोना
पॉजिटिव मिली। उसे जांच रिपोर्ट आने से पहले ही घर भेज दिया था।
- 2 मई को मंडाना निवासी गर्भवती महिला कोरोना पॉजिटिव पाई।
- 10 मई को फिर एक साथ गड़ेपान, महावीर नगर प्रथम, दादाबाड़ी, बजाजखाना व
बारां निवासी प्रसूताएं कोरोना पॉजिटिव पाई गई।

- नहीं लिया सबक...
सूत्रों ने बताया कि हॉट स्पॉट मकबरा व चन्द्रघटा एरिया से लगातार
प्रसूताओं के आने के कारण अस्पताल में कोरोना का संक्रमण फैल गया।
अस्पताल प्रशासन उसे सही तरीके से सेनेटाइज नहीं कर सका। सूत्रों ने
बताया कि लैबर रुम व वार्ड में भर्ती प्रसूताओं को दूसरे वार्ड में शिफ्ट
करना चुनौतीपूर्ण कार्य है। इसी कारण अस्पताल प्रशासन को दिन में तीन बार
अस्पताल को सेनेटाइज करना था, लेकिन दो बार भी सही तरीके से नहीं कर पा
रहा। इस कारण कोरोना का संक्रमण फैलता गया। इससे प्रसूताएं संक्रमित होती
जा रही।
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- इसलिए आ रही पकड़ में
राज्य सरकार ने हाल में एक आदेश जारी किया है कि अस्पताल में भर्ती
प्रसूताओं की कोविड़ की जांच की जाएगी। उसके बाद अस्पताल प्रशासन इनकी
कोविड़ की जांच करा रहा। इसमें यह प्रसूताएं कोरोना पॉजिटिव सामने आ रही
है। ------------
- मां व नवजात बच्चों को खतरा
अस्पताल में भर्ती अन्य मांओ, नवजात बच्चों, डॉक्टर व स्टाफ को भी कोरोना
संक्रमण का खतरा पैदा हो गया है। उन्हें भी अब अस्पताल में जाने से डर
सताने लग गया।
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- यहां लागू क्यों नहीं की मोबिलिटी
जेके लोन अस्पताल में लगातार प्रसूताएं कोरोना पॉजिटिव आने के बावजूद
जिला प्रशासन की ओर से यहां मोबिलिटी लागू नहीं की गई। जबकि नियमानुसार
किसी भी क्षेत्र में कोरोना पॉजिटिव आने के बाद मोबिलिटी लागू कर वहां
सर्वे, सेनेटाइज का कार्य होता है, लेकिन पिछले एक माह से अस्पताल में
लगातार प्रसूताएं कोरोना पॉजिटिव आने के बाद भी मोबिलिटी लागू नहीं की
गई।
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- 50 सेम्पल लिए
अस्पताल में एक साथ पांच प्रसूताएं कोरोना पॉजिटिव आने के बाद
डॉ.शैमेन्द्र मीणा, वीरेन्द्र, नर्सिंग मुकेश की टीम ने 50 सेम्पल लिए।
टीम ने अन्य भर्ती प्रसूताओं, उनके रिश्तेदार, नर्सिंग स्टाफ के सेम्पल
लिए। 12 डॉक्टर समेत अन्य कार्मिक क्वारंटाइनअस्पताल में पॉजिटिव मरीजों के
सम्पर्क में आने पर 12 डॉक्टर, 9 नर्सिग स्टाफ व 5 ठेके पर कार्यरत स्टाफ
को क्वारंटाइन किया गया।
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-इनका यह कहना- अस्पताल में लैबर रुम व वार्ड में भर्ती प्रसूताओं के बीच
सेनेटाइज करना एक चुनौतिपूर्ण कार्य होता है। उन्हें दूसरे वार्ड में
शिफ्ट करने की समस्या रहती है। वैसे अस्पताल को दो बार सेनेटाइज कर रहे
है, लेकिन संक्रमण खत्म नहीं हो रहा। अस्पताल को क्वारंटाइन के लिए
प्राचार्य को पत्र लिखेंगे।
- डॉ. एससी दुलारा, अधीक्षक, जेके लोन अस्पताल

Abhishek Gupta
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