कोटा में हुआ बड़ा दवा घोटाला, लालच में दवा का सैम्पल ही बदल दिया

दवा घोटाले में तत्कालीन ड्रग वेयर हाउस इंचार्ज समेत तीन के खिलाफ एसीबी में मुकदमा दर्ज

By: Ranjeet singh solanki

Updated: 18 Dec 2020, 07:25 PM IST

कोटा. कोटा मेडिकल कॉलेज में चार साल पहले एक ड्रग वेयर हाउस इंचार्ज और दो फार्मासिस्ट ने दवा कम्पनी के साथ मिलीभगत कर घटिया और अमानक दवा की आपूर्ति ले ली और मामला खुलने पर दवा का सैम्पल ही बदल दिया। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो कोटा (एसीबी) प्रारम्भिक पड़ताल में दवा में हेराफेरी करने का मामला साबित होना पाया। इसके बाद एसीबी मुख्यालय के निर्देश पर शुक्रवार को तत्कालीन ड्रग वेयर हाउस इंचार्ज व तत्कालीन जिला प्रजनन एवं स्वस्थ्य अधिकारी डा. महेंद्र त्रिपाठी, फार्मासिस्ट राकेश मेघवाल, मुकेश मीणा व ड्रग सप्लायर्स के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। डा. त्रिपाठी वर्तमान में बूंदी में अतिरिक्त सीएमएचओ पद पर कार्यरत हैं।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ठाकुर चंद्रशील ने बताया कि औषधि नियंत्रण संगठन की जांच में दवा अमानक पाई गई थी। मुख्यालय ने प्राथमिक जांच (पीई) दर्ज की थी। पीई में इसको प्रमाणित माना है। इससे राजकोष को काफ ी नुकसान पहुंचा। भ्रष्ट तरीके से लाभ अर्जित करना प्रमाणित हुआ है। जनता के स्वास्थ्य से भी खिलवाड़ किया गया। घटिया गुणवत्ता की दवा को साजिश के तहत बदल दिया गया। मुख्यालय के निर्देश के बाद हिमाचल प्रदेश की दवा सप्लायर्स कम्पनी के साथ ही मेडिकल कॉलेज ड्रग वेयर हाउस के तत्कालीन इंचार्ज व दो फ ार्मसिस्ट मुकदमा दर्ज किया है। मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में दवा की खरीद हुई थी। इसके तहत 75 एमजी के प्रिगाबालिन कैप्सूल सप्लाई में आए थे। इस दवा का एक सैंपल पूरी तरह सब स्टैंडर्ड निकला था, जबकि दूसरा सैंपल 100 फ ीसदी खरा मिला है। उस समय ड्रग विभाग हैरान था। जब सैंपल एक ही बैच का है और एक ही जगह से लिया गया है तो फिर ऐसा कैसे संभव है। राजस्थान मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन (आरएमएससीएल) ने इस कैप्सूल का सैंपल लिया और जांच करवाई तो पता चला कि कैप्सूल में प्रिगाबालिन नहीं बल्कि गामापेंटिन है। सैंपल को पूरी तरह स्पूरियस माना गया। सप्लायर्स को बचाने के लिए मेडिकल कॉलेज कोटा के ड्रग वेयर हाउस में सप्लाई हुई घटिया दवा को बदल दिया गया था। प्रिगाबालिन और गामापेंटिन की दर में करीब 100 रुपए प्रति स्ट्रिप का फ र्क है। प्रिगाबालिन की एक गोली 13 से 14 रुपए की होती है, वहीं गामापेंटिन की एक गोली 3 से 4 रुपए की होती है। दोनों दवाइयां नर्व सिस्टम प्रतिकूल होने पर ही रोगियों को दी जाती है। लेकिन दोनों का काम अलग-अलग होता है। न्यूरो और मनोचिकित्सा के रोगियों की स्थिति के आधार पर संबंधित विभागों के डॉक्टर ही यह तय करते हैं कि कौनसी दवा दी जाए।

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