kota Double Murder : फांसी की सजा सुनने के बाद भी हंसते रहे आरोपी

वारदात से मच गया था पूरे प्रदेश में तहलका

 

कोटा. मां-बेटी हत्याकांड में आरोप सिद्ध होने और सजा सुनाने के बाद दोनों दोषी बेशर्म हंसी हंसते हुए न्यायालय से बाहर निकले। इस मामले की जघन्यता देखते हुए अभिभाषक परिषद के आह्वान पर कोटा के अधिवक्ताओं ने आरोपियों की पैरवी से मना कर दिया था। इस पर न्यायालय की लीगल एड ने आरोपियों की ओर से अधिवक्ता उपलब्ध करवाया।

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शोक व्यक्त करने आए थे आरोपी
गंभीर वारदात के चलते तत्कालीन सिटी एसपी दीपक भार्गव समेत अन्य आला अधिकारियों व 250 पुलिसकर्मी मामले को खोलने में जुट गए। आरोपी 4 फरवरी 19 को शोक व्यक्त करने मृतका के घर आए थे। उसके हाथ में चोट के निशान देख पुलिस को उन पर शक हो गया और पुलिस ने दोनों आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। मामले की गंभीरता व तीन दिन तक आरोपियों के गिरफ्त में नहीं आने के बाद लोगों, व्यापारियों व शहरवासियों के बढ़ते विरोध को देखते हुए तत्कालीन एडीजे ने दौरा भी किया था।

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अब तक 33 को फांसी की सजा
कोटा जिले के न्यायालयों के इतिहास में अब तक 33 आरोपियों को जघन्य अपराधों के मामले में फांसी की सजा से दंडित किया जा चुका है। हालांकि किसी को भी अभी तक फांसी नहीं हो सकी। अधिकांश मामलों में उच्च न्यायालयों से फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया, वहीं कुछ मामले विचाराधीन हैं।

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