उजड़ने लगा 450 साल पुराना कोटा का दशहरा पशु मेला, छांव का भी नहीं है इंतजाम

Vineet singh

Publish: Oct, 13 2017 02:20:08 (IST)

Kota, Rajasthan, India
उजड़ने लगा 450 साल पुराना कोटा का दशहरा पशु मेला, छांव का भी नहीं है इंतजाम

कोटा का रियासतकालीन दशहरा पशु मेला पिछले दो साल में उजड़ गया। अब यहां 20 फीसदी लोग भी नहीं आते।

कोटा दशहरे मेले में कभी विशेष पहचान रखने वाला पशु मेला अब बदहाली का शिकार है। एक समय कोटा का पशु मेला देश-प्रदेश में अपने वैभव के लिए जाना जाता था। यहां प्रदेशभर से पशुपालक उन्नत किस्मों के पशुओं की खरीद-फरोख्त के लिए यहां आते थे। देशी-विदेशी पर्यटकों से गुलजार रहने वाला मेला अब प्रशासनिक उपेक्षा के चलते अपना अस्तिव खो रहा है। नगर निगम ने पशु मेले को दशहरे मेले से अलग कर उसका वैभव खत्म सा कर दिया है। दो साल से पशु मेला खड़े गणेश नगर में लगाया जा रहा है, लेकिन वहां पशुपालकों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवाई जा रही। दो वर्षों में यहां पशु बेचने व खरीदने वालों की संख्या २० फीसदी भी नहीं रही। ऐसे में दूर-दराज से आने वाले पशुपालक निगम की उदासीनता के चलते परेशान हो रहे हैं।

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छाया-पानी का भी इंतजाम नहीं

प्रशासन की ओर से पशुपालकों के लिए यहां छाया-पानी के इंतजाम तक नहीं किए गए। केकड़ी से मवेशी बेचने आए बोकळराम गुर्जर ने बताया कि गड्ढों का पानी मवेशियों को पिलाना पड़ रहा है। खुद के लिए दो किमी दूर से पानी लाना पड़ता है। दशहरे से 10 किमी दूर यहां कोई आना पसंद नहीं करता। चारा खरीदने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है।

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जंगल में लाकर पटक दिया

पशुपालक रामस्वरूप गुर्जर ने बताया कि यहां एक भी दुकान नहीं है। आटा, दाल खरीदने के लिए भी एक किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। निगम प्रशासन ने पशुपालकों को जंगल में लाकर पटक दिया। यह साल जैसे-तैसे निकाल लेंगे, लेकिन अगले साल मेले में नहीं आएंगे। पशु मेले की बदहाली पर कोटा के लोगों ने खासी नराजगी जताते हुुए कहा कि मेले का मुख्य आकर्षण की पशु बाजार होता था। शहर के लोग तो मेले में तफरी करने आते हैं, लेकिन कोटा ही नहीं राजस्थान और दूसरे राज्यों के लोग यहां अच्छी नश्ल के पशु खरीदने और बेचने के लिए आते थे, लेकिन अब ना तो वह नश्लें दिखाई दे रही हैं और ना ही पशु मेला।

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