कोरोना की मार, इस साल सिर्फ 11 फीट का बनेगा रावण का पुतला

कोटा के दशहरा मेले में पिछले साल 101 फीट के रावण के पुतले का हुआ था दहन

By: Ranjeet singh solanki

Published: 08 Oct 2020, 07:23 PM IST

कोटा। राष्ट्रीय दशहरा मेले के आयोजन पर भी कोरोना संक्रमण की मार पड़ी है। 127 वें दशहरा मेले का आयोजन नहीं होगा। मेले के शुभारंभ से लेकर रावण दहन और समापन कार्यक्रम केवल औचारिकता भरे होंगे। मेले के कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत के तहत मेला प्रकोष्ठ में प्रथम पूज्य गणेशजी की स्थापना की गई है। इस बार केवल 11 फीट के रावण के पुतले का दहन किया जाएगा, जबकि पिछले साल 101 फीट के रावण के पुतले का हुआ था दहन। नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से राष्ट्रीय मेला दशहरा-2020 के आयोजन की तैयारियों का प्रथम पूज्य गणपति जी के पूजन-अर्चन के साथ शुभारम्भ हो गया। निगम के प्रशासनिक भवन स्थित मेला प्रकोष्ठ के हॉल में बुधवार को उत्तर निगम के आयुक्त वासुदेव मालावत, दक्षिण की आयुक्त कीर्ति राठौड, अतिरिक्त आयुक्त राजपाल सिंह, उपायुक्त अशोक त्यागी, नरेश राठौड, अधीक्षण अभियंता प्रेम शंकर शर्मा, राकेश शर्मा, सहायक लेखाधिकारी संजय जैन आदि ने श्रद्धा पूर्वक सोशल डिस्टेंसिंग के साथ गणपति का पूजन किया और उनकी महाआरती की। कोरोना के कारण इस बार न तो रामलीला का मंचन होगा और न राम बारात निकलेगी। राजसी वैभव और हाथी-घाड़ों के साथ गाजे-बाजे के साथ निकलने वाली लक्ष्मीनाराणजी की शोभायात्रा का भव्य नजारा भी नहीं देखने को मिलेगा। दशहरा मैदान में विजयादशमी पर रावण दहन होगा, लेकिन हर बार जैसा नजारा नहीं होगा। लोगों से खचाखच भरे रहने वाले दशहरा मैदान में रावण दहन में भी केवल दस लोग ही शामिल होंगे। रियायतकाली रश्मों के साथ 11 फीट के रावण का दहन होगा।कोटा के राष्ट्रीय दशहरा मेले में हर साल देशभर से व्यापारी आते हैं। व्यापारियों और लोगों को मेले का सालभर से इंतजार रहता है। नगर निगम मेले के आयोजन पर सात करोड़ का बजट खर्च करता है। मेले में 1500 दुकानदार देश के अलग-अलग राज्यों से आते है। मेला समिति के पूर्व सदस्य महेश गौतम लल्ली का कहना है कि मेले में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, बिहार, पंजाब, मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, गुजरात आदि राज्यों से बड़ी संख्या में व्यापारी मेले में आते हैं। कई व्यापारी तो तीन से चार पीढ़ी से लगातार मेले में दुकान लगाने के लिए आ रहे हैं। व्यापारियों की मेले में अच्छी बिक्री होती है। इस कारण उन्हें इस मेले का सालभर से इंतजार रहता है। राजस्थान का सबसे लम्बी अवधि का यह मेला चलता है। 22 दिन तक मेले का आयोजन किया जाता है। मेले में करीब डेढ़ सौ करोड़ का कारोबार होता है।

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