तो वापस कोयले-लकड़ी से जलाना पड़ेगा चूल्हा

पेट्रोल-डीजल व घरेलू गैस सिलेण्डर के दामों में लगातार वृद्धि से मध्यमवर्गीय परिवारों का जीना दुश्वार कर दिया है। सभी गृहिणियों का मानना है कि केन्द्र व राज्य सरकार को महंगाई पर शीघ्र लगाम लगानी चाहिए वरना स्थिति विस्फोटक हो जाएगी।

By: Haboo Lal Sharma

Published: 02 Mar 2021, 09:38 PM IST

कोटा. पेट्रोल-डीजल व घरेलू गैस सिलेण्डर के दामों में लगातार वृद्धि से मध्यमवर्गीय परिवारों का जीना दुश्वार कर दिया है। सभी गृहिणियों का मानना है कि केन्द्र व राज्य सरकार को महंगाई पर शीघ्र लगाम लगानी चाहिए वरना स्थिति विस्फोटक हो जाएगी। नौबत यहां तक आ सकती है कि फिर से कोयले और लकड़ी से चूल्हा जलाना पड़े।

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चटनी-रोटी भी मुश्किल
जिस तरीके से इन दिनों मंगगाई बढ़ रही है, ऐसी पहले कभी नहीं बढ़ी। 25-30 दिन में रसोई गैस सिलेण्डरों में भारी वृद्धि कर दी गई। अगर यहीं हाल रहे आने वाले दिनों में गरीब के नसीब में चटनी-रोटी भी मुश्किल हो जाएगी।- रचना शर्मा, कुन्हाड़ी

आमदनी कम, खर्चा ज्यादा
महंगाइ का भार आम जनता पर पड़ रहा है। फल, सब्जियां, तेल सहित घरेलू उपयोग की सभी वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे है। कोरोना ने पहले ही आम आदमी की कमर तोड़कर रख दी है अब महंगाई ने लोगों की मुश्किलें ओर बढ़ा दी है।- आरती शर्मा, बजरंग नगर

लगाम नहीं लगी तो स्थिति विस्फोट हो जाएगी
पेट्रोल के दाम इतने बढ़ गए है कि बाहर जाने पर एक बार सोचना पड़ता है। गैस सिलेण्डर के दाम बढऩे से गृहिणियों का बजट बिगड़ गया। महंगाई पर लगाम नहीं लगी तो आने वाले दिनों स्थिति विस्फोटक हो जाएगी। -संगीता सोनी, कैथूनीपोल

अपनी जेबें भर रहीं कम्पनियां
ऐसा लगता है गैस कम्पनियां लगादार सिलेण्डर के भावों में वृद्धि अपनी जेबें भरने में लगी हैं। अगर ऐसा रहा तो आने वाले दिनों में गृहिणियों को वापस पुराने ढर्रे पर कोयले या लकड़ी से चूल्हा जलाना पड़ेगा। -शैजल रिजवानी, तलवण्डी

महंगाई से बिगड़ गया बजट
पेट्रोल, डीजल, गैस के लगातार दाम बढऩे से आम आदमी का जीना मुश्किल हो गया है। हालात यह है कि घर चलाने का जुगाड़ में बच्चों की ख्वाहिशें भी पूरी नहीं कर पा रहे।- रानू शर्मा, तलवण्डी

मध्यवर्गीय परिवार पर सबसे ज्यादा मार
पेट्रोल-डीजल व गैस के दामों में लगातार वृद्धि व बेरोजगारी बढऩे से मध्यवर्गीय परिवारों का जीना दुश्वार कर दिया है। रोज कमाने-खाने वालों से पूछो कि वह दो जून की रोटी का जुगाड़ इस महंगाई में कैसे कर रहा है। -मृदुला चतुर्वेदी, सकतपुरा

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