डीजल घोटाला दबाने में जुटे अधिकारी, 12 घंटे में जांच से डीसी का नाम हटाया...

नगर निगम के गैराज अनुभाग में डीजल घोटाले का मामला

 

By: Dhirendra

Published: 19 Jan 2019, 10:52 AM IST

Kota, Kota, Rajasthan, India

कोटा . नगर निगम के गैराज अनुभाग में डीजल घोटाले को दबाने में अधिकारी और पार्षदों का एक खेमा जुट गया। इस कारण दूसरे दिन भी जांच शुरू नहीं हो पाई। हैरानी की बात यह है कि 12 घण्टे में ही जांच कमेटी से उपायुक्त (मुख्यालय) श्वेता फगेडिया का नाम हटा दिया गया। अब जांच कमेटी में प्रशासनिक अधिकारी नहीं है। उधर, शुक्रवार को जांच कमेटी से उपायुक्त का नाम हटाने की सूचना मिलते ही गैराज समिति के अध्यक्ष गोपालराम मण्डा और भाजपा व कांग्रेस के पार्षद निगम कार्यालय पहुंचे और महापौर के चैम्बर के बाहर धरना देकर बैठ गए। इधर, महापौर समर्थक पार्षद पिछले साल चार साल से डीजल भरवाने के मामले की जांच करने लगे।

कार्य समिति की 16 जनवरी को हुई बैठक में गैराज समिति अध्यक्ष मण्डा ने डीजल घोटाले का मामला उठाते हुए जांच की मांग की थी। महापौर ने बैठक में ही जांच के लिए कमेटी गठित करने का ऐलान कर दिया था। आयुक्त की ओर से 16 जनवरी की रात को ही सात सदस्यों के नाम जारी कर दिए, लेकिन 17 जनवरी को आयुक्त ने छह सदस्यीय जांच कमेटी के नाम जारी किए। इसमें श्वेता फगेडिया का नाम हटा दिया गया है। जांच कमेटी में अब कोई प्रशासनिक अधिकारी नहीं है। जांच कमेटी ने शुक्रवार से जांच शुरू करने की बात कही थी, लेकिन विवाद होने के कारण अभी तक जांच शुरू नहीं हुई।

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रेकॉर्ड से छेड़छाड़ की आशंका
जांच की मांग उठा रहे पार्षदों ने आरोप लगाया कि डीजल घोटाले से संबंधित रिकॉर्ड में हेराफेरी कर दी गई है। जो अधिकारी इस घोटाले से जुड़े हैं, उनके पास ही रिकॉर्ड के दस्तावेज है, इस कारण हेरफारी की आशंका जताई जा रही है। अभी तक आयुक्त ने इसका रिकॉर्ड अपने कब्जे में नहीं लिया है।

डीएलबी को लिखेंगे पत्र
राजवंशी ने बताया किघोटाले के बारे में राज्य सरकार, नगर निकाय निदेशालय जयपुर को पत्र लिखेंगे। साथ ही स्वायत्त शासन व नगरीय विकास मंत्री से मिलकर घोटाले में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगे। वहां भी अगर कुछ नहीं हुआ तो एसीडी में मुकदमा दर्ज करवाया जाएगा।

जांच की मंशा नहीं
& महापौर जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति करना चाहते हैं। जांच कमेटी में कांग्रेस के किसी भी पार्षद को शामिल नहीं किया गया है। अब जांच शुरू होने से पहले उपायुक्त का नाम हटा दिया गया। इसलिए निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं। नगरीय विकास मंत्री को समूचे मामले से अवगत करवाकर जांच कराने का आग्रह करेंगे।
दिलीप पाठक, पार्षद, कांग्रेस

जांच के लिए पत्र लिखा
& वरिष्ठ पार्षद गोपालराम मण्डा मेरे ऊपर केवल राजनीतिक आरोप लगा रहे हैं। जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है। मण्डा से चर्चा के बाद ही नाम तय किए गए थे। मण्डा उपायुक्त (गैराज) की जांच की मांग का पत्र दिया था, ऐसे में एक उपायुक्त दूसरे उपायुक्त की कैसे जांच कर सकता है। आयुक्त स्तर पर जांच के लिए पत्र लिख दिया है। मैं चाहता हूं कि गैराज अनुभाग के पूरे कार्यकाल के सम्पूर्ण मामले की जांच होनी चाहिए।
महेश विजय, महापौर

& महापौर और पार्षद गोपालराम मण्डा से चर्चा के बाद ही जांच कमेटी गठित की है। अब जांच कमेटी पर ही सवाल उठा रहे हैं। अभी कोटा से बाहर हूं। सोमवार को महापौर, पार्षदों और प्रतिपक्ष नेता से इस बारे में चर्चा कर लेंगे। यदि सब चाहेंगे तो थर्ड पार्टी को जांच सौंप देंगे।
जुगल किशोर मीणा, आयुक्त, नगर निगम

 

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