कोटा: यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के फैसले का विरोध

कोटा के कलाकारों ने एकजुट होकर कहा कि यहां पर बस स्टैंड बनता है तो यह कला व कलाकारों का दम घोंटने जैसा है। इससे कला और कलाकारों की शांति व एकाग्रता भंग होगी।

By: Jaggo Singh Dhaker

Updated: 30 Jan 2021, 04:37 PM IST

कोटा. कोटा में राजस्थान के यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के एक फैसले का विरोध हो रहा है। रंगकर्मियों व विभिन्न कला व संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों ने कलादीर्घा के पास निजी बस स्टैंड बनाने के प्रस्ताव का विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि मंत्री इसे अपनी प्रतिष्ठा का मुद्दा नहीं बनाए। किसी दूसरी जगह बस स्टैंड बनाया जा सकता है। कला दीर्घा में शुक्रवार को हुई बैठक में सभी ने एकजुट होकर कहा कि यहां पर बस स्टैंड बनता है तो यह कला व कलाकारों का दम घोंटने जैसा है। इससे कला और कलाकारों की शांति व एकाग्रता भंग होगी। बैठक में उपस्थित कला, साहित्य व पर्यावरण, इतिहास प्रेमियों ने अपने अपने दृष्टिकोण से क्षेत्र की उपयोगिता बताई और बस स्टैंट बनाने के प्रस्ताव को गलत ठहराया व सुझाव भी दिए। रंगकर्मियों समेत अन्य ने कहा कि इसका विरोध किया जाएगा।
थिएटर एक्टिविस्ट राजेन्द्र पांचाल ने कहा कि कलादीर्घा स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान करता है। बस स्टैंड के बनने से कला व कलाकारों के लिए आवश्यक माहौल बिगड़ जाएगा। बस स्टैंड कहीं और बनाए जाने का विचार किया जाना चाहिए। रंगकर्मी संदीप राय ने सुझाव दिया कि प्रशासन व स्वायत्तशासी मंत्री को कलाकारों की समस्या से अवगत करवाने की आवश्यकता है। गायत्री परिवार के मुख्य ट्रस्टी जीडी पटेल ने कहा कि सब को एकजुट होकर समस्या निराकरण के लिए पहल करनी होगी। उन्होंने हस्ताक्षण अभियान चलाने का सुझाव दिया। पर्यावरण प्रेमी गीता दाधीच ने कहा कि क्षेत्र पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, वहां बस स्टैंड बनाने का अर्थ है कला के साथ पर्यावरण दोनों का दम घोंटना है।

सप्त शृंगार संस्था के अध्यक्ष अब्दुल सत्तार ने कहा कि काफी कोशिशों के बाद कलादीर्घा के रूप में जगह कोटा के रंगकर्मियों को नसीब हुई है, जहां पर सभी विधाओं के कलाकारों को अपना प्रदर्शन करने का अवसर मिलता है। यह शांत जगह है और पर्यावरण शुद्ध है। यहां वर्ष पर्यंत आयोजन होते हैं, ऐसे में यहां बस स्टैंड का बनना कला के हित में नहीं है। उन्होंने बताया कि कलाकारों व विभिन्न संगठनों का एक प्रतिनिधिमंडल जिला कलक्टर को ज्ञापन देगा। एक ऑनलाइन पिटिशन भी दायर की गई है। कथक नृत्यांगना गरिमा भार्गव ने कहा कि यह हमारी कर्मभूमि है। यहां कलाकारों के लिए अच्छा माहौल मिला है। कला भी एक तरह का आध्यात्म है, इसमें शांति व एकाग्रता की आवश्यकता होती है। इस दृष्टि से बस स्टैंड बनाए जाने का विचार अनुचित है। रंगकर्मी राजेश विलायत राय, बृजेश विजयवर्गीय, ऐतिहासिक धरोहर फाउंडेशन के कमल यदुवंशी समेत अन्य ने विचार व्यक्त किए। बैठक में वरिष्ठ साहित्यकार अम्बिकादत्त चतुर्वेदी, विजय पालीवाल, दीनानाथ दुबे, सविता जैन समेत अन्य लोग उपस्थित रहे।

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