आओ मिलकर करें मदद- सरकारी ब्लड बैंक में रक्त का टोटा

इन दिनों भीषण गर्मी, कोरोना व युवाओं के कोरोना वैक्सीनेशन का कार्य होने से कोटा संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्त की कमी हो गई है।

 

By: Abhishek Gupta

Updated: 11 Jun 2021, 05:56 PM IST

कोटा. इन दिनों भीषण गर्मी, कोरोना व युवाओं के कोरोना वैक्सीनेशन का कार्य होने से कोटा संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्त की कमी हो गई है। यहां वर्तमान में करीब 300 यूनिट रक्त ही शेष बचा है। इस कारण थैलेसीमिया पीडि़त व अन्य जरूरतमंदों को रक्त उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। मजबूरन उन्हें निजी ब्लड बैंकों में चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

दरअसल, कोटा में जब भी रक्त की कमी महसूस की जाती है तो एक आह्वान पर कोटावासी आगे आ जाते हैं। हर जरूरतमंद की मदद के लिए लोग खुद आगे आकर स्वैच्छिक रक्तदान करते हैं, लेकिन कोरोना की वजह से रक्तदान बहुत कम हो पा रहा है।

संभाग का सबसे बड़ा ब्लड बैंक
एमबीएस अस्पताल का ब्लड बैंक संभाग का सबसे बड़ा ब्लड बैंक है। यहां 5 हजार यूनिट स्टोरेज की क्षमता है। इस ब्लड बैंक में हर साल 20 से 25 हजार यूनिट रक्तदान होता है। एमबीएस अस्पताल में बारां, बूंदी, झालावाड़, कोटा, सवाईमाधोपुर, टोंक व मध्यप्रदेश तक के मरीज इलाज के लिए आते हैं। पास ही जेके लोन अस्पताल भी है। यहां गर्भवती, दुर्घटना, ऑपरेशन वाले मरीजों को रक्त की सख्त जरूरत पड़ती है। इसके अलावा 750 थैलेसीमिया पीडि़त बच्चे पंजीकृत हैं। इनके लिए अलग से हर माह 600 से 650 यूनिट रक्त की जरूरत पड़ती है।

कोटा मेडिकल कॉलेज के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन व इम्यूनोहेमेटोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एच.जी. मीणा ने बताया कि इन दिनों भीषण गर्मी, कोरोना व वैक्सीनेशन के कारण ब्लड बैंक में रक्त की कमी बनी हुई है। युवाओं व सामाजिक संस्थाओं को जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आना चाहिए। पार्षद सलीना शेरी ने भी शहरवासियों से अपील की है कि वे स्वैच्छिक रक्तदान कर इन पीडि़तों की मदद करें।

Abhishek Gupta
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