हंगामे की भेंट चढ़ी बैठक...जिला परिषद सदस्य ने कलक्टर से की अभद्रता, आपस में भिड़े ...गुस्साए अफसरों ने छोड़ी बैठक

Suraksha Rajora

Publish: Jun, 04 2019 06:34:40 PM (IST)

Kota, Kota, Rajasthan, India

कोटा. जिला परिषद सामान्य सभा की आखिरी बैठक हंगामे और अभद्रता की भेंट चढ़ गई। 95 मिनट चली बैठक में चार विधायक, 23 जिला परिषद सदस्य और पांच प्रधान मिलकर भी जनता के हित से जुड़े पांच मुद्दे नहीं उठा सके। बैठक में जिला कलक्टर और जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी को ही निशाना बनाया जाता रहा।

 

हद तो तब हो गई जब खैराबाद के जिला परिषद सदस्य ने कलक्टर से अभद्रता कर डाली। जिसे लेकर अफसर और जनप्रतिनिधि आपस में भिड़ गए। गुस्साए अफसरों ने बैठक बीच में ही छोड़ कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया।

 

मनरेगा मजदूरों के राजनीतिक इस्तेमाल के आरोपों के बीच जिला प्रमुख ने मंगलवार को इस वित्त वर्ष की पहली और अपने कार्यकाल की सामान्य सभा की आखिरी बैठक मंगलवार को बुलाई थी। गर्माए सियासी माहौल में अचानक बैठक बुलाने के चलते यह हंगामेदार होने का पहले से ही अंदेशा था और हुआ भी यही।

 

जिला परिषद के राजीव गांधी सेवा केंद्र सभागार में 12 बजे शुरू हुई बैठक में सांगोद विधायक भरत सिंह ने जिला कलक्टर मुक्तानंद अग्रवाल और एसपी देहात दुष्यंत राजन की गैर मौजूदगी को मुद्दा बना उन्हें तत्काल बुलाने की मांग कर डाली। सीईओ शुभम चौधरी ने आश्वासन दिया कि दोनों आला अधिकारी जल्द ही बैठक में शामिल हो जाएंगे। जिस पर विधायक ने उनका परिचय पूछ डाला। सीईओ अपना परिचय देतीं इससे पहले ही उन्होंने बिना तैयारी के बैठक बुलाने के आरोप लगा दिए।

 

पानी को लेकर छिड़ी रार

रामगंजमंडी विधायक मदन दिलावर ने बोतलों में परोसे गए पानी पर हंगामा खड़ा कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामीणों को पीने का पानी नहीं मिल रहा और अफसर बोतल बंद पानी पी रहे हैं। इस बात पर 20 मिनट तक हंगामा होता रहा। कुछ सदस्यों ने इंतजाम को लेकर जिला प्रमुख सुरेंद्र गुर्जर से जवाब मांगा तो उन्होंने इसके लिए सीधे सीईओ को जिम्मेदार ठहरा दिया।

 

सीईओ ने कार्यवाही आगे बढ़ाने की कोशिश की तो मदन दिलावर भड़क उठे। बोले, पहले मेरे सवालों के जवाब दें इसके बाद बात होगी। सीईओ ने जवाब देने की कोशिश की तो वह टोकने लगे। इस पर नाराज सीईओ ने भी कहा दिया कि वह उनकी बात सुनना चाहते हैं तो सुनें नहीं तो जो चाहें बोलते रहें। जिस पर दिलावर भड़क गए और उन पर धमकाने के आरोप लगाने लगे।

 

चर्चा के बजाए आरोप
इसी बीच जिला कलक्टर और एसपी ग्रामीण बैठक में पहुंच गए। उन्होंने विवाद थाम सामान्य सभा की कार्रवाई आगे बढ़ाने की कोशिश की। सीईओ ने 30 जनवरी को हुई बैठक की कार्रवाई का अनुमोदन सदन में प्रस्तुत किया। कृषि से जुड़े पिछले मसलों का अनुमोदन कराना चाहा तो विधायक भरत सिंह, रामनारायण मीणा और मदन दिलावर अफसरों पर फिर हावी हो गए और कृषि यंत्रों, सीड किट और खाद के बंटवारे में बंदर बांट करने का आरोप लगाने लगे।

 

बद्री गोचर और नवीन शर्मा आदि जिला परिषद सदस्यों ने फसल खरीद का दो महिने बाद भी भुगतान न होने, खरीद केंद्र ज्यादा खोलने, चम्बल फर्टिलाइजर के आउटलेट बढ़ाने और आउटसोर्सिंग के जरिए बेचे जा रहे कीटनाशकों एवं खाद की गुणवत्ता जांच कराने का मामला उठाया। इस दौरान भी आमजन की समस्याओं का समाधान तलाशने के बजाय जनप्रतिनिधियों का पूरा फोकस अफसरों पर आरोप लगा उन्हें घेरने पर ही रहा।

 

सीईओ को हटाने का प्रस्ताव

विधायक भरत सिंह ने कहा कि जब सीईओ जनवरी में हुई बैठक की ही जून तक अनुपालना नहीं करा पाईं तो क्यों न प्रस्ताव लाकर ऐसे अफसरों को हटा दिया जाए? उन्होंने सीईओ पर फिर से निशाना साधते हुए पंचायत समितियों की बैठक में शामिल न होने की वजह पूछ डाली। सीईओ ने ऐसा कोई नियम न होने और उनके सवाल का लिखित में जवाब पहले ही देने की बात कही तो भरत सिंह ने बहस न करने की हिदायत दे डाली।

 

हंगामा होने पर सीईओ ने सांसद निधि की सेंक्शन निकालने और नरेगा की सौ दिवसीय कार्ययोजना का काम पूरा करने में व्यस्त होने की दलील दी तो सुरेंद्र गुर्जर और मदन दिलावर भड़क गए। दोनों ने जिला परिषद कार्यालय में महीनों से पत्रावलियों के धूल खाने और समय पर काम न किए जाने का आरोप लगाते हुए जिला कलक्टर से मांग की कि वह तत्काल काम का समय और जिम्मेदारी तय करें।

हंगामे और बहिष्कार की भेंट चढ़ी बैठक

इसी बीच सांगोद विधायक ने ग्रामीण इलाके लिए अलग कलक्टर लगाने की बात कही तो जिला परिषद सदस्य रमेश महावर भड़क गए। उन्होंने विधायकों पर निशाना साधते हुए कहा कि इन्हें तो विधानसभा में भी अपनी बात कहने का मौका मिल जाएगा, यहां तो सदस्यों को बोलने का मौका दें। कलक्टर तो कोई फोन आते ही अभी भाग जाएंगे और उनके पीछे-पीछे बाकी अफसर भी खिसक लेंगे फिर वह अपने क्षेत्र की समस्याएं कहां उठाएंगे।

 

जिला कलक्टर ने उनकी भाषा पर आपत्ति जताई तो वह अभद्रता पर उतर आए। पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन शरद सक्सेना ने कलक्टर से अभद्रता का विरोध किया तो महावर उनसे भी भिड़ गए। इसके बाद तो सभागार दो खेमों में बंट गया और जमकर हंगामा हुआ। हाथापाई तक की नौबत तक आ गई। जिससे नाराज जिला कलक्टर बैठक छोड़कर चले गए। सभी विभागों के अधिकारियों ने भी बहिष्कार कर सभागार से बाहर चले गए।

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned