scriptMothers Day Special : मां ने संघर्ष कर बेटे को शिखर तक पहुंचाने का ठाना, आज बेटा शहीद पिता की राह पर कैप्टन बन कर रहा देश सेवा | Mother's Day Special: Mother decided to struggle and take her son to the top, today the son is serving the country as a captain following the footsteps of his martyred father | Patrika News
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Mothers Day Special : मां ने संघर्ष कर बेटे को शिखर तक पहुंचाने का ठाना, आज बेटा शहीद पिता की राह पर कैप्टन बन कर रहा देश सेवा

Mothers Day Special 2024 : वक्त हमेशा चलता है, कुछ अच्छे पल तो कुछ कड़वी यादें दे जाता है। जो हार मान लेते हैं, वहीं रह जाते हैं और जो ठान लेते हैं, वे दुनिया के लिए मिसाल बन जाते हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है शहीद सुभाष शर्मा की पत्नी वीरांगना बबीता शर्मा की।

कोटाMay 12, 2024 / 05:32 am

Omprakash Dhaka

Mothers day special mother struggled Shaheed Subhash Sharma Veerangana Babita Sharma

बेटे क्षितिज की सफलता पर दुलारती मां बबीता शर्मा।

Mothers Day Special 2024 : वक्त हमेशा चलता है, कुछ अच्छे पल तो कुछ कड़वी यादें दे जाता है। जो हार मान लेते हैं, वहीं रह जाते हैं और जो ठान लेते हैं, वे दुनिया के लिए मिसाल बन जाते हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है शहीद सुभाष शर्मा की पत्नी वीरांगना बबीता शर्मा की।
सुभाष का साथ छूटने के बाद भी बबीता नहीं हारी, बल्कि भीगी आंखों से बेटे क्षितिज को शिखर तक पहुंचाने का सपना सजा लिया। लम्बे संघर्ष के बाद मां बबीता ने बेटे को पति की तरह देश सेवा के लिए तैयार कर दिया। अब क्षितिज फौज में कैप्टन है। सुभाष आतंकियों के खिलाफ जंग लड़ते हुए 16 अप्रेल 1996 को बम धमाके में शहीद हो गए थे। तब क्षितिज 9 माह का था। बबीता बताती हैं कि वह दौर संघर्ष का था, लेकिन आज एक मां के रूप में बेटे को सफल देखती हूं तो लगता है कि उनका ध्येय पूरा हो गया।
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यादें तेरे बचपन की…बेटे का मन बहलाती वीरांगना बबीता शर्मा

शहीद की पत्नी हूं, लड़ सकती हूं

श्रीनाथपुरम निवासी बबीता बताती हैं कि मैंने पति को तिरंगे में लिपटे देखा तो कुछ पल के लिए पैरों तले जमीन खिसक गई। परिजन ने ढांढ़स बंधाया तो फिर विचार आया कि शहीद की पत्नी किसी भी हाल में कमजोर नहीं हो सकती। बस बेटे के भविष्य को संवारने की ठान ली।

बिखर गया था आशियाना

11वीं कक्षा में पढ़ते हुए बेटे ने एनडीए की परीक्षा में सफल होने का संकल्प लिया। वर्ष 2013 में नेशनल डिफेंस अकादमी की परीक्षा दी। उसी समय हमारे ऊपर नई मुसीबत आ गई। खाली पड़े प्लॉट्स में पानी भर जाने से, घर कमजोर होकर ढह गया। घर में जो सामान था, चोरी हो गया। ऐसी परिस्थिति में बेटे का रिजल्ट आया तो उसने 7 लाख बच्चों में से प्रदेश में पहला व देश में 13वां स्थान प्राप्त किया। मैं सारे दु:ख भूल गई। वर्ष 2019 में गोल्ड मेडल के साथ क्षितिज लेफ्टिनेंट बना। अब कैप्टन है। जल्द ही मेजर बनने वाला है। अभी आर्मी चीफ के एडीसी के रूप में महत्वपूर्ण दायित्व निभा रहा है।

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