एक माह से अंधेरे में तीर चला रहा वन विभाग, बाघ का साया तक नजर से दूर

कोटा. मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व में बाघ के एक माह बाद भी साक्ष्य नहीं मिलने से वन्यजीव प्रेमी व विभाग दोनों चिंता में हैं। जानकारों का मानना है कि कई बार ऐसा होता है कि बाघ नजर नहीं आते। बाघ एमटी-1 भी गत वर्ष काफी दिनों तक नहीं मिला था। स्थितियों को देखते हुए विभाग को मॉनिटरिंग सिस्टम को बेहतर बनाने की आवश्यकता है। टाइगर रिजर्व में 19 अगस्त को बाघ कैमरा टे्रप हुआ। इसके बाद से नजर नहीं आया है, न ही इसके साक्ष्य मिले।

By: Deepak Sharma

Published: 18 Sep 2020, 07:00 AM IST

कोटा. मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व में बाघ के एक माह बाद भी साक्ष्य नहीं मिलने से वन्यजीव प्रेमी व विभाग दोनों चिंता में हैं। जानकारों का मानना है कि कई बार ऐसा होता है कि बाघ नजर नहीं आते। बाघ एमटी-1 भी गत वर्ष काफी दिनों तक नहीं मिला था। स्थितियों को देखते हुए विभाग को मॉनिटरिंग सिस्टम को बेहतर बनाने की आवश्यकता है। टाइगर रिजर्व में 19 अगस्त को बाघ कैमरा टे्रप हुआ। इसके बाद से नजर नहीं आया है, न ही इसके साक्ष्य मिले।

रात में प्रभावी हो मॉनिटरिंग
टाइगर रिजर्व में अनुभवी ट्रेकर बताते हैं कि बाघ की मॉनिटरिंग प्रोपर रूप से की जाए। अभी गर्मी तेज है, ऐसे में दिन में शाम ढलने के बाद ही इनकी साइटिंग की संभावना ज्यादा रहती है। इस कारण रात को मॉनिटरिंग करने की आवश्यकता है। जिस तरह से गत दिनों टाइगर के शिकार के रूप में सांड आया था, उसे देखकर लग रहा था,कि उसे बाघ ने ही शिकार बनाने का प्रयास किया है। विभाग पर्याप्त कैमरा ट्रेप लगाए।

यह भी संभव

कई बार बाघ ऐसी जगह चला गया, जहां उसे शिकार मिल गया। जब तक शिकार पूरा नहीं हो जाता वह उसके आसपास ही रहता है। बरसात होने से अभी पानी की कमी नहीं है, इस स्थिति में जरूरी नहीं की वह नजर आए। ट्रेकर का मानना है कि बाघ-बाघिन को एक दूसरे की स्मेल आनी चाहिए। इसके बाद ही बाघ बाघिन की ओर आ सकता है।

काश होते रेडियो कॉलर्स

जानकारों का मानना है कि रेडियों कॉलर होते तो बाघिन की स्थिति का भी पहले ही पता लग जाता व बाघ के साक्ष्य जुटाने में भी आसानी होती।


इनका है कहना
बाघ को खोजने के प्रयास किए जा रहे हैं। किसी तरह से एनक्लोजर से बाहर भी निकल भी गया है तो इसकी संभावना को देखते हुए अन्य स्थानों पर भी सूचित किया है। प्रयास है जल्दी कोई साक्ष्य मिले।
एसआर यादव, फील्ड डारेक्टर व मुख्य वन संरक्षक, मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व

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