नगर निगम चुनाव: कोटा की धड़कन तेज, जनमन में सवालों से उबाल

कोटा शहर के उत्तर और दक्षिण नगर निगम के लिए इसी सप्ताह मतदान होना है। इस बार मतदाता खामोश है। वे अपने तरीके से अब तक उनकी सुध नहीं लेने पर नाराजगी भी प्रकट कर रहे हैं। वोट मांगने आ रहे प्रत्याशियों से सवाल भी कर रहे हैं।

By: Jaggo Singh Dhaker

Published: 27 Oct 2020, 12:47 PM IST

नगर निकाय चुनाव के मतदान की उलटी गिनती शुरू होने के साथ ही कोटा शहर की धड़कन तेज हो गई है। निकाय चुनाव को लेकर जनता का क्या मूड है। इसको लेकर पत्रिका टीम ने शहर के जनमानस को टटोला तो जनता ने अपनी बात खुलकर रखी। पेश है पत्रिका टीम की जीरो ग्राउंड जनमन रिपोर्ट।

भैया, काम धंधा चौपट है, चुनाव की बात मत करो
कोटा. नदीपार क्षेत्र के बालिता रोड पर सब्जी विक्रेता नटीबाई सब्जियां बेचने में व्यस्त है। सब्जियों के भाव पूछते हुए उनसे चुनाव पर बात की तो बोली, जनता की कोई नहीं सुनता, जीतने के बाद सभी अपने हिसाब से काम करते हैं। ज्ञान विहार कॉलोनी से गुजर रहे सुबीर से पूछा तो बोले, क्या करेंगे वोट देकर, यह सड़क देख रहें हैं क्या? पहले भी वोट दिए, यहां तो कुछ नहीं बदला। जनमन को टटोलते हुए आगे बढ़े तो स्टेशन रोड पर पंचर की दुकान पर तीन लोग बैठे मिले। इनमें से एक सलाम से चुनाव के बारे में सवाल किया तो उसने बगल में बैठेसाथी की ओर से इशारा करते हुए कहा, ये आपके सवाल के जवाब देंगे। दूसरे से वही सवाल दोहराया तो बोले, भैया आगे बढ़ जाओ कोरोना से दिमाग खराब है। काम धंधा खत्म हो गया है, हमें चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है। चुनाव के बारे में यहां किसी से बात मत करें। सोगरिया क्षेत्र पहुंचे तो यहां सड़कों पर धूल उड़ रही है। यहां पेट्रोल पम्प के पास खड़े सुनील से बात की तो उसने कहा ने दस साल से इस सड़क पर धूल ही उड़ रही है। आप ही बताओ जरा, वोट देकर हमारे क्षेत्र का क्या भला हुआ। आगे बढ़कर अरपन विहार, अभिषेक एन्क्लेव विस्तार, गणपति नगर और आसपास की कॉलोनी के लोगों के मन की सुनी तो जवाब मिला सरकार ने यहां चम्बल का पानी तो पहुंचाया नहीं, ऐसे में हम वोट देकर क्या करेंगे।

भला मनख चुनेंगे, जो आपणी बात सुण ले...

कोटा. दोपहर के 12 बजे हैं, कोटा के छावनी क्षेत्र के रामचन्द्रपुरा में थड़ी पर चाय की चुस्कियां लेने में मशगूल भंवर सिंह, दुर्गाशंकर और शाहिद मोहम्मद से चुनावी माहौल की बात करने की कोशिश की तो पहले तो वे इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हुए, लेकिन इधर-उधर की बातों के बाद चर्चा शुरू हुई तो बोले वोट जरूर देंगे। किस मुद्दे पर वोट देंगे इस पर भंवरसिंह ने कहा कि जो हमारी बात सुनेगा, उसको वोट देंगे। पहले पार्षद ऐसा था कि उसकी शक्ल देखे सालों हो गए। इस बार 'भला मनख न वोट दंगा.., जो आपणी बात सुण ले...Ó। दुर्गाशंकर बोले, अभी तो सभी नेता मीठी-मीठी बातां कर रह्या है, जीतबा के बाद कोई नहीं सुनता है। शाहिद ने सफाई पर ध्यान देने की जरूरत बताई। लघु औद्योगिक क्षेत्र में बिजली बिल जमा कराने के लिए कतार में खड़े गोविंद नगर निवासी सेवानिवृत्त सैनिक लक्ष्मणसिंह का मन टटोला तो बोले सबसे बड़ा मुद्दा बिजली के बिल ही हैं। एक साल पहले जो बिल एक हजार का आता था, आज दो-ढाई हजार का आ रहा है। मुझे तो पेंशन मिलती है, जमा करवा दूंगा, लेकिन गरीब लोग कैसे जमा करवाएंगे। मैं न कांग्रेस की बात करता हूं न भाजपा की, लेकिन सरकार को जनता की सुननी चाहिए। प्रेम नगर निवासी रमेश निशाद से बात की तो आवेश में बोले, दो घण्टे से कतार में खड़ा हूं, नम्बर आते ही लंच की बात कहकर खिड़की बंद कर दी। दो घंटे की ठेकेदार मजदूरी काट लेगा। कैसे घर चलाएंगे। नेता लोग केवल चुनाव में दिखते हैं, बाद में कोई नहीं सुनता। उडिय़ा बस्ती में पानी भरने के लिए खाली बर्तन लेकर बैठी कंचन बाई ने कहा कि बस्ती में पानी की समस्या है, एक ही नल है, पानी कैसे भरेंगे। कोई भी नेता उनका भला नहीं कर रहे हैं। दादाबाड़ी में सब्जी विक्रेता अशोक बोले सफाई बड़ा मुद्दा है। जयपुर, इंदौर साफ-सुथरे शहर हो सकते हैं तो कोटा क्यों नहीं। वोट मांगने वालों से सफाई पर सवाल पूछेंगे।

नाले की समस्या से निजात का है इंतजार

कोटा. दोपहर के ढाई बजे का समय है। गुमानपुरा चौराहे पर जाकर खड़ा हुआ तो देखा कि सीवरेज और नाला आफत बना हुआ है। जो भी यहां से गुजरा, वह शासन-प्रशासन को कोसता हुआ निकला। विक्की सिंह से पूछा कि क्या दिक्कत है, उन्होंने कहा, त्योहारी सीजन होने के बावजूद नाले के अधूरे कार्य के कारण यहां व्यापारियों की दुकानें बंद पड़ी हैं। व्यापार चौपट हो रहा है। इसके बाद गुमानपुरा में दुकानों पर जाकर चर्चा की तो व्यापारी मनोज शर्मा का दर्द छलक उठा। वे बोले, गुमानपुरा की सबसे बड़ी समस्या सीवरेज नाले की है। यहां कई सालों से कच्चा नाला बना हुआ है। बारिश के दिनों में इसका गंदा पानी सड़कों पर बहने से सड़कें दरिया बन जाती हैं। सीमेंट के पाइप डालने के लिए रोड के बीचों-बीच नाले की खुदाई की गई, लेकिन एक माह बाद भी सीवरेज नाले का काम पूरा नहीं हुआ। उसे अधूरा छोड़ रखा है। खुले छोड़ रखे इस नाले के कारण दुर्घटना का अंदेशा बना हुआ है।
चर्चा के बीच व्यापारी शंकरलाल बोले कि सीवरेज नाले को ठीक नहीं किया गया। यहां बीचों-बीच रास्ता ऊबड़-खाबड़ होने से वाहन हिचखोले खाते नजर आते हैं। कई बार जाम के हालात बन जाते हैं। व्यापारी जितेन्द्र कुमार जैन ने बताया कि अधूरे नाले के कारण गंदगी से जीना दुश्वार हो रहा है।

व्यापारी अरविंद मीणा ने बताया कि बाजार की समय पर सफाई भी नहीं होती है। जगह-जगह कचरे के ढेर लगे रहते हैं। डिवाइडर का कचरा उठता नहीं है। अंशुल शर्मा ने बताया कि बाजार की सफाई व्यवस्था बदहाल होने से परेशान हैं।

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