चंबल के घड़ियाल खतरे में...बजरी खनन कर सकता है अस्तित्व का नाश ! रात के अंधेरे में हो रहा ये खेल

Suraksha Rajora

Publish: May, 19 2019 05:42:47 PM (IST)

Kota, Kota, Rajasthan, India

कोटा /रोटेदा. कोटा जिले में राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल सेंचुरी के 70 किलोमीटर लंबे एरिया में धड़ल्ले से बजरी का अवैध खनन हो रहा है। यहां से रोजाना बजरी निकाली जा रही है। जबकि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत सेंचुरी से किसी भी तरह का खनन नहीं किया जा सकता।

 

इतनी बड़ी मात्रा में बजरी का खनन होने के कारण ही कोटा जिले में घड़ियाल नहीं पनप पा रहे हैं। पिछले कई साल से यहां घड़ियाल की साइटिंग नहीं हो पा रही है। वन्य जीव विशेषज्ञों के अनुसार घड़ियाल महीन रेत में पनपते हैं। लेकिन बजरी का खनन होने से महीन रेत नहीं बन रही है। वन विभाग सेंचुरी में लंबे समय से चल रही अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने में नाकाम है। इसी तरह खनन चलता रहा, तो घड़ियाल की प्रजाति संकट से घिर सकती है।

 

 

 

राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल अभ्यारण में बजरी खनन पर रोक के बावजूद भी अवैध बजरी की निकासी थमने का नाम नही ले रही है। जिससे साफ जाहिर है भूमाफियाओं के आगे पुलिस प्रशासन एंव वन विभाग बोना साबित हो रहा है। भूमाफियाओं के इस कदर हौसले बुलंद है कि घड़ियाल क्षेत्र की निगरानी के लिए तैनात वन कर्मी चौकी में सोते रहे और भूमाफिया जेसीबी से खनन कर सेकड़ो ट्रॉली बजरी ले उड़े।

 

मामला क्षेत्र के डोलर गांव के समीप निकल रही चम्बल नदी का है। यूं तो यहां एक या दो ट्रॉली बजरी आये दिन निकलती है। परन्तु शुक्रवार रात्रि को एक साथ सैकड़ों ट्रॉली बजरी परिवहन होने से वन्य जीव प्रेमियों ने रोष जताया। ग्रामीण घनश्याम, राजमल, हंसराज ने बताया कि शुक्रवार को भूमाफियाओं द्वारा घड़ियाल क्षेत्र में जेसीबी से करीब डेढ़ दर्जन टेक्टरों से सैकड़ों ट्रॉलियों बजरी का परिवहन किया गया।वही गांव में वन विभाग की दो चौकिया बनी हुई है। फिर भी यहां खनन का खेल जारी है।

अवैध खनन वालों ने अपनी गहरी जड़े जमा ली हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया की यह पूरी तरह सत्ता संरक्षण में होता है। पुलिस, प्रशासन,वन-विभाग व स्थानीय जनप्रतिनिधि बजरी के अवैध खनन में लिप्त है। चम्बल घड़ियाल में रोक के बाद भी बजरी का अवैध खनन हो रहा है जबकि घडियाल संरक्षित क्षेत्र होने के कारण यहां वन विभाग व पुलिस की चौकी स्थापित है।


यही हमारा रोजगार, सरकार कुछ सोचे-बजरी माफिया

नाम नहीं छापने की शर्त पर एक बजरी माफिया ने बताया कि बचपन से ही वह बजरी के रोजगार से जुड़े हुए हैं। इस काम को छोड़ दें तो उनके लिए घर चलाना मुश्किल हो जाएगा। सरकार को इस आेर ध्यान देना चाहिए। ताकि हमारी भी गुजर बसर हो सके। उल्लेखनीय है कि चंबल नदी में बजरी के अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी है। सरकार को इस पर अंकुश लगाने की सख्त हिदायतें हैं।


भूमाफियाओं ने के कर रखा डर का माहौल पैदा,शिकायत से भी कतराते है लोग

बजरी के अवैध खनन रोकने पर जहां मध्यप्रदेश में एक पुलिस अधिकारी की जान ले ली गई वहीं सवाईमाधोपुर में एक सरपंच की जान चली गई।परन्तु दूसरे ही दिन एक पुलिस कर्मचारी बजरी से भरे ट्रकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में संलिप्त पाया गया।

 

वही गत दिनों उपखण्ड के सुनगर गांव में बजरी निकालते समय मिट्टी का टीला ढह जाने से चार श्रमिको की मौत हो गई, बजरी से भरे वाहनों से घुस लेने के मामले में पीपलू टोंक थाने के कॉन्सटेबल को एसीबी ने ट्रेप किया। छिटपुट अवैध खनन को छोड़ दें तो अवैध खनन में खनन कारोबारी और सरकार की मिलीभगत है।

 

जो भी इसे रोकने की कोशिश करता है उसे पहले तो खरीदने की कोशिश होती फिर उसे फंसाने की कोशिश होती है। जब किसी तरह कोई बात नहीं बनती है तो उसे रास्ते से हटाने की कोशिश होती हैं। सबसे दु:खद स्थिति यह है कि किसी निष्कर्ष तक ऐसी जांच नहीं पहुंचती, केवल कागजी खानापूर्ति चलती रहती है और अवैध खनन बदस्तुर जारी रहता है।

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned