ऐसे तो कैसे जीतेंगे कोरोना से जंग, मानसिक तनाव के बीच कर रहे काम कोरोना वॉरियर्स

कोटा में कोरोना के ताबड़तोड़ हमले के बीच अस्पतालों में कोरोना वॉरियर्स मानसिक तनाव के बीच काम कर रहे है। अब तो हालत यह हो गई कि इस वायरस की चपेट में कोरोनायोद्धा भी आ गए है। नए अस्पताल के दो कार्मिको के पॉजिटिव आने के बाद स्टॉफ के अन्य कार्मिको में भी अजीब तरह का डर सा बैठ गया है।

By: Haboo Lal Sharma

Updated: 23 Apr 2020, 09:12 AM IST

कोटा. कोटा में कोरोना के ताबड़तोड़ हमले के बीच अस्पतालों में कोरोना वॉरियर्स मानसिक तनाव के बीच काम कर रहे है। अब तो हालत यह हो गई कि इस वायरस की चपेट में कोरोनायोद्धा भी आ गए है। नए अस्पताल के दो कार्मिको के पॉजिटिव आने के बाद स्टॉफ के अन्य कार्मिको में भी अजीब तरह का डर सा बैठ गया है। पत्रिका संवाददाता ने जब इस बारे में पड़ताल की तो अस्पताल के कार्मिको ने खुलकर अपनी पीड़ा बयां की।

शहर को कुछ इशारा करता संक्रमण, कोरोना वारियर्स भी हुए संक्रमित

केस -1

क्वारेंंटाइन के लिए कहा तो भगा दिया
नए अस्पताल में कोरोना पॉजीटिव आए श्रीनाथपुरम् निवासी ईसीजी टेक्निशियन ने अपनी पीड़ा बयां करते हुए बताया कि स्थायी कर्मचारियों की बजाए प्लेसमेंट एजेंसी में कार्यरत ठेकाकर्मी ईसीजी टेक्निशियन की ड्यूटी लगाई। वे कोरोना पॉजीटिव वार्ड में लगातार काम कर रहे। जब वे अधीक्षक के पास 14 दिन पूरे होने पर क्वारेंंटाइन के लिए गए तो उन्हें अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी मीणा ने यह कहते हुए भाग दिया कि आपके लिए ऐसा कोई आदेश नहीं है। तीन दिन घर पर आराम करो, फिर आ जाना। जब उनकी 14 दिन पूरे होने के बाद जांच कराई तो वे कोरोना पॉजीटिव निकले। हम जान जोखिम में डालकर काम कर रहे, बावजूद हमारे साथ ऐसा बर्ताव किया जा रहा। हमें सफेद पीपीई किट की जगह ग्रीन कलर की पीपीई किट दी जा रही। वह घुटने तक ही रहती है। उसके बाद नीचे का पूरा हिस्सा खाली रहता है। ऐसे में संक्रमण का खतरा रहता है। वे कोरोना पॉजीटिव की लगातार ईसीजी करने से संक्रमित हुए।


केस-2
बुखार के बावजूद जांच नहीं कराई और क्वारेंंटाइन भी नहीं किया

नए अस्पताल में कार्यरत सुभाष नगर निवासी कोरोना पॉजीटिव महिला नर्सिंगकर्मी ने बताया कि उनकी मेडिसिन वार्ड बी में 7 अप्रेल से ड्यूटी लगी थी। वार्ड में 9 अप्रेल को काफी कोरोना संक्रमित ज्यादा मरीज आए थे। उनमें कुछ बच्चे भी थे। वे उनके वार्ड में आ जा रहे थे। उनमें से एक बालिका कोरोना पॉजीटिव आ गई। उसने नर्सिंगकर्मी को छूआ था। ऐसे में वे संक्रमित हो गई। उन्होंने नर्सिंग अधीक्षक, बाबू को वार्ड में दवा स्प्रे का छिड़काव के लिए कहा तो तीन दिन तक कोई काम नहीं हुआ। क्वारेंंटाइन के लिए कहा तो कोई व्यवस्था नहीं की गई। छुट्टी के लिए कहा तो एक दिन की छुट्टी मिली। उन्हें घर पर ही आइसोलेट के लिए बोल दिया। 11अप्रेल को उन्होंने रेजीडेंट धर्मेन्द्र से बुखार आने की शिकायत की तो उन्होंने कहा कि आप हाईरिस्क में है, उसका प्रोफेस पता नहीं है। उन्होंने डॉ. बृजमोहन से कहा मैं बीपी की मरीज हूं, मुझे बुखार आ रहा। हाथ-पैरों में दर्द है। मेरी जांच करा दो, लेकिन उन्होंने भी कहा कि देखते है। दो दिन तक जांच नहीं हुई। जब 14 दिन का समय पूरा हुआ तो उन्होंने कहा कि अब तो जांच करा दो उसके बाद मंगलवार को उनकी जांच हुई। उसमें वे कोरोना संक्रमित पाई गई। उन्होंने उसके परिवार की जांच की मांग की। उनके दो बच्चे है। ऐसे में परिवार को खतरा है।


केस-3
लैब टेक्निशियनों की भी हालात बिगडऩे लगी
नए अस्पताल में कार्यरत लैब टेक्निशियन ने बताया कि उनसे भी लगातार काम करवाया जा रहा है। उन्हें 14 दिन पूरे होने के बाद क्वारेंंटाइन किया जाना चाहिए था, लेकिन नहीं किया जा रहा। इस काम में करीब एक दर्जन लैब टेक्निशियन लगे है। वे भूखे-प्यासे जान जोखिम में डालकर काम कर रहे है। कई लैब टेक्निशियनों की तो हालात बिगडऩे लगी है, बावजूद उनसे काम करवाया जा रहा है। लैब टेक्निशियनों का कहना है कि कोरोना पॉजीटिव मरीजों के वे ही सबसे पहले टच में आते है। जबकि लैब टेक्निशियन रिवर्ज में है, लेकिन उनकी ड्यूटी नहीं लगाई जा रही है।

Haboo Lal Sharma
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned