NIT Srinagar : घर लौटे विद्यार्थी नहीं जाना चाहते जन्नत

सता रही पढ़ाई व प्लेसमेंट की चिंता एनआईटी श्रीनगर मामला पत्रिका से साझा किए हालात, माहौल व अपना दर्द

By: shailendra tiwari

Published: 15 Apr 2016, 11:47 PM IST

कोटा. टी-20 वल्र्डकप में भारत-वेस्टइंडीज मुकाबले के बाद एक अप्रेल से चर्चा में आए एनआईटी श्रीनगर से गैर कश्मीरी विद्यार्थी बाहर आ चुके हैं। ज्यादातर अपने घर पहुंच चुके हैं। कुछ ने दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया है।


यूं श्रीनगर जन्नते हिन्द हो, लेकिन ये छात्र उस जन्नत में नहीं लौटना चाहते। इधर, घर लौटे हाड़ौती के छात्र अब दोबारा एनआईटी जाने से कतरा रहे हैं। छात्रों व उनके अभिभावकों के दिमाग में कई सवाल हैं। उन्हें पढ़ाई के साथ भविष्य की चिंता सता रही है। 


कोटा संभाग के करीब 50 स्टूडेंट्स एनआईटी श्रीनगर में अध्ययनरत हैं। बुधवार को कुछ स्टूडेंट्स कोटा लौटे। उन्होंने वहां के हालात और समस्याओं को लेकर पत्रिका से अपना दर्द बांटा। 


भविष्य के प्रति आशंकित छात्र अब समझौता करने को भी तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि या तो एनआईटी को शिफ्ट किया या हमें वहां से दूसरी एनआईटी में शिफ्ट किया जाए।


हमारे लिए पहली बार नहीं

पत्रिका से बातचीत में छात्रों ने कहा कि मैच के दौरान और बाद में जो कुछ हुआ, हो सकता है वो मीडिया और देश के सामने पहली बार आया हो, लेकिन हमारे लिए पहली बार नहीं था। 


अब तो बात फैल चुकी है तो गैर कश्मीरी छात्रों से उनका बर्ताव और बिगड़ जाएगा। हम वहां रहकर कैसे पढ़ेंगे। हालत यह है कि कुछ कश्मीरी छात्र यदि हमारा विरोध करते हों तो समझ में आता है, लेकिन वहां हर कोई उनके साथ नजर आता है। 


जब कभी भारत जीतता है या ऐसा इवेंट होता है तो हम खुशी मनाते हैं तो वहां की पुलिस और लोगों को नागवार गुजरता है, वह हमारा विरोध करते हैं। हाल यह है कि शिक्षक तक उनका समर्थन करते हैं। इस मामले में भी एक शिक्षक ने खुलकर देश विरोधी नारे लगाए थे। यह हमारे लिए बड़ी चुनौती है।


अकेडमिक रिकॉर्ड खराब करने की धमकी

हम वहां पढ़ते हैं। कई बार क्लास में ही शिक्षक ऐसी बातें करते हैं, जो कि देश विरोधी हैं, लेकिन कोई कुछ नहीं कहता। इस मामले में भी शुरुआत में कैम्पस के अंदर और बाहर किसी ने हमारा समर्थन नहीं किया। 


जब बात बड़ी तो शिक्षकों और स्टाफ ने हमारा अकेडमिक रिकॉर्ड खराब करने की धमकी दी। हमें मीडिया के सामने जाने से रोका गया। मीडिया को अंदर नहीं आने दिया। बिना मतलब डण्डे बरसाए गए।


यह है अभिभावकों की चिंता

इधर, अभिभावकों का कहना है कि 11 दिन एनआईटी में बंद रहने के बाद बच्चे कोटा पहुंचे हैं। अब उनकी सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा। वहां की पुलिस उनके समर्थन में नहीं है। 


बाहर के युवक खुलेआम प्रदर्शन करते हैं। यदि उन्हें वापस भेजें और मारपीट के शिकार हो जाएं तो हम कहां बचाने जाएंगे। हमारी तो एक ही मांग है कि एनआईटी शिफ्ट नहीं हो सकती तो हमारे बच्चों को किसी दूसरे इंस्टीट्यूट में शिफ्ट कर दिया जाए।


कौन आएगा प्लेसमेंट के लिए

छात्रों ने कहा कि अब मामला इतना बढ़ चुका है कि हमारे प्लेसमेंट पर भी इसका असर देखा जा सकता है। जब एडमिशन लिया तो यहां के प्लेसमेंट रिकॉर्ड अच्छे थे, लेकिन अब आगे भी रहेंगे या नहीं, इसका क्या पता। कंपनियां इस माहौल में छात्रों के प्लेसमेंट के लिए आएंगी या नहीं, यह भी नहीं पता। 


यहां पिछले वर्षों में टाटा मोटर्स, महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा, ओएनजीसी, वेदांता, एसीसी, एचपीसीएल, पावर ग्रिड, एनटीपीसी, विप्रो, आईओसीएल, डीआरडीओ प्लेसमेंट के लिए आई थीं। छात्रों का अच्छे पैकेज पर प्लेसमेंट भी हुआ था।

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shailendra tiwari Desk
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