scriptNoise and air pollution will increase on Diwali | दीपावली पर बढ़ेगा ध्वनि और वायु प्रदूषण | Patrika News

दीपावली पर बढ़ेगा ध्वनि और वायु प्रदूषण

 

विशेषज्ञों के अनुसार ग्रीन पटाखे भी पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं, लेकिन इनके निर्माण में भारी धातुओं का उपयोग नहीं होने से सामान्य पटाखों की तुलना में इनसे होने वाले प्रदूषण का स्तर 30 से 40 प्रतिशत कम होता है। एक शोध के अनुसार वर्ष 2019 में प्रदेश में हुई कुल मौतों में से 21 प्रतिशत वायु प्रदूषण के कारण हुई।

कोटा

Updated: November 02, 2021 11:16:43 pm

कोटा. राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से कोटा सहित प्रदेश के 5 शहरों में दीपावली त्योहार के दौरान वायु प्रदूषण के स्तर को जानने के लिए वायु की गुणवता का विशेष अध्ययन कराया जाएगा। 25 शहरों में ध्वनि प्रदूषण के स्तर को भी जांचा जा रहा है। मंडल प्रदेशवासियों से त्योहारों के समय राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) क्षेत्रों में पटाखे नहीं चलाने एवं अन्य स्थानों पर दीपावली पर निर्धारित समय रात 8 बजे से 10 बजे तक केवल ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल करने के लिए जागरूकता अभियान भी चला रहा है। एक शोध के अनुसार वर्ष 2019 में प्रदेश में हुई कुल मौतों में से 21 प्रतिशत वायु प्रदूषण के कारण हुई। देशभर के लिए मौतों का यह औसत 18 प्रतिशत था। विशेषज्ञों के अनुसार ठोस कचरे से फैलने वाले प्रदूषण और जल प्रदूषण के मुकाबले वायु प्रदूषण अधिक हानिकारक है, क्योंकि आम लोगों में इसके प्रति जागरूकता का अभाव है। दीपावली के आस-पास वायु एवं ध्वनि प्रदूषण का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है। बीते वर्ष पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध के चलते राज्य में प्रदूषण का स्तर 20 प्रतिशत कम रहा था। इस बार मंडल की ओर से दीपावली से 7 दिन पहले और 7 दिन बाद तक 15 दिन की अवधि के दौरान जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा और अलवर में वायु गुणवत्ता की मॉनिटरिंग के लिए विशेष अध्ययन किया जा रहा है। इस दौरान 25 शहरों में ध्वनि के स्तर की भी मॉनिटरिंग की जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार ग्रीन पटाखे भी पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं, लेकिन इनके निर्माण में भारी धातुओं (हैवी मेटल्स) का उपयोग नहीं होने से सामान्य पटाखों की तुलना में इनसे होने वाले प्रदूषण का स्तर 30 से 40 प्रतिशत कम होता है। ग्रीन पटाखों में ध्वनि प्रदूषण का स्तर भी सामान्य पटाखों के 160 डेसिबल की तुलना में 125 डेसिबल तक ही रहता है। राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार एनसीआर में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध के साथ राज्य के शेष हिस्सों में उत्सव के दिन सीमित समय के लिए केवल ग्रीन पटाखों के उपयोग की ही अनुमति दी है। इन निर्देशों की अवमानना पर राज्य सरकार कानूनी कार्यवाही करेगी। पटाखों से होने वाला वायु और ध्वनि प्रदूषण बुजुर्गों, बच्चों, सांस सहित विभिन्न बीमारियों से ग्रसित लोगों तथा पालतू जानवरों के लिए बहुत तकलीफदेह होता है।
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