क्योंकि जिन्दगी से बड़ा कुछ नहीं..

ऐसी सजगता आगामी 21 दिनों तक रखने की जरूरत है

के आर मुण्डियार. कोरोना वायरस की जंग जीतने के लिए सरकार के जनता कफ्र्यू व लॉकडाउन को लेकर जिस तरह हाड़ौती संभाग की जनता ने सजगता दिखाई है, ऐसी सजगता आगामी 21 दिनों तक रखने की जरूरत है, क्योंकि एक दिन का जनता कफ्र्यू तो ट्राइल था। इसने सिखाया कि हम घर में रहकर ही माहमारी को मात दे सकते हैं। स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में रखने के लिए सरकार की ओर से हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जो लोग सरकार की एडवाइजरी के बाद भी गंभीर नहीं हंै, उनके खिलाफ पुलिस व प्रशासन भी सख्ती बरत रहा है। क्योंकि ऐसे लोग समाज के दुश्मन ही हो सकते हैं।

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इटली व अन्य देशों में जहां जनता ने सरकार की एडवाइजरी को हल्के में लिया, वहां कैसे हालात बने, किसी से छिपा नहीं है। इसलिए हमें किसी भी तरह की अफवाह फैलाए बिना खुद व अपने परिवार को घरों में रहकर ही सुरक्षित करना चाहिए। जब तक सरकार का लॉकडाउन है, अति-आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलना चाहिए।

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सरकार के स्पष्ट निर्देश है कि आवश्यक चीजों व खाद्य सामग्री की कमी नहीं आने दी जाएगी। फिर भी कई लोग खाद्य सामग्री को जरूरत से ज्यादा संग्रह कर रहे हैं। बाजार में दुकान खुलते ही टूट पड़ रहे हैं। एक दिन के जनता कफ्र्यू के बाद सोमवार सुबह के समय कोटा की सब्जीमंडी के हालात चिन्ताजनक थे। सब्जी मंडी में इतनी भीड़ पहले कभी नहीं रही। बड़ा सवाल यह है कि क्या जिन्दगी से भी बड़ी कोई चीज है? जीवन ही नहीं रहा तो ये सब्जियां या अन्य कोई सामान क्या काम आएगा? कुछ दिन तक यदि हम फल-सब्जी नहीं ले पाएं तो कुछ फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन इस भीड़ या सोशल डिस्टेंस के अभाव में यदि कोई संक्रमण का संकट आ गया तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? इसलिए मंडी, दुकान पर जाएं तो खाने-पीने व दवा आदि की उतनी ही खरीद करें, जितने की आवश्यकता हैं, ताकि औरोंं को भी सामग्री की किल्लत का सामना नहीं करना पड़े।

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मौजूदा हालात से लडऩे के लिए राज्य सरकार ने कोविड-19 मुख्यमंत्री सहायता कोष बनाया है। इसमें उद्योगपति, समाजसेवी, दानदाता और आमजन महामारी से लडऩे के लिए आर्थिक मदद दे सकते हैं। इसके अलावा जिला प्रशासन के माध्यम से जरूरतमंदों की मदद कर सकते हैं। जागरूकता कार्यक्रम या काढ़ा पिलाने के बहाने पांच लोगों से ज्यादा एकत्र होने से बचना चाहिए। सरकार को भी चाहिए कि वर्तमान परिस्थितियों में खाद्य सामग्री का अनुचित संग्रहण और उसकी कालाबाजारी करने पर कड़ी कार्रवाई की जाए। रोजमर्रा के काम में आने वाली चीजों, मास्क, सेनेटाइजर सहित जरूरत की चीजों की कालाबाजारी बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। इसके साथ ही अफवाह फैलाने वाले वालों पर भी सख्ती की जरूरत है। राज्यभर में सोशल मीडिया पर कोरोना वायरस से जुड़ी झूठी अफवाह फैलाने और भ्रामक प्रचार करने वाले 29 लोगों को गिरफ्तार करके पुलिस ने सराहनीय कार्य किया है। इस तरह की सख्ती लगातार दिखाने की जरूरत है। साथ ही प्रदेश व कोटा की जनता को यह मिसाल कायम करनी चाहिए कि माहमारी को मात देने के लिए हम कितने संवेदनशील हैं।

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