विधायकों की आंख पर मेहमान नवाजी की पट्टी बांध कराया कोटा थर्मल का निरीक्षण

कोटा थर्मल के अधिकारियों ने आठ विधायकों की समिति की आंख में मेहमान नवाजी की ऐसी धूल झोंकी कि वह कोटा थर्मल की असल मुसीबत पूछना ही भूल गए।

By: ​Vineet singh

Published: 16 May 2018, 12:37 PM IST

कोटा .

कंपट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया (कैग) के ऑडिट रिपोर्ट की जानकारी लिए बगैर आपत्तियों का निस्तारण करने के लिए राजस्थान पब्लिक अंडरटेकिंग कमेटी (पीयूसी) कोटा सुपर थर्मल पॉवर प्लांट (केएसटीपीएस) के निरीक्षण को पहुंच गई। कमेटी के चेयरमैन ने तो थर्मल की संचालन सहमति रद्द करने की सिफारिशों की जानकारी होने से ही इनकार कर दिया।

राजस्थान पीयूसी के चेयरमैन व किशनपोल विधायक मोहनलाल गुप्ता के नेतृत्व में पूरी कमेटी केएसटीपीएस के निरीक्षण के लिए मंगलवार शाम को कोटा पहुंची। चेयरमैन के साथ-साथ समिति के सदस्य और विधायक सुरेंद्र पारीक, गौतम कुमार, शुभकरण चौधरी, अजित सिंह, दुलीचन्द डांगी, अलका सिंह और डॉ. मंजू बाघमार भी निरीक्षण के दौरान मौजूद रहे, लेकिन किसी भी सदस्य को इस बात की जानकारी तक नहीं थी कि कैग ने राजस्थान सरकार से कोटा थर्मल को बंद करने की सिफारिश की है।


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बिना जानकारी किया निरीक्षण

विधान सभा की यह समिति सरकारी उपक्रमों की कार्य प्रणाली तथा अन्य वित्तीय मामलों और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के प्रतिवेदन का परीक्षण करती है। कैग ने बीते दिनों थर्मल का ऑडिट कर पर्यावरण कानूनों के उलंघन का खुलासा किया था। जिसकी जानकारी सरकार भी दी गई थी, लेकिन थर्मल के निरीक्षण को आई इस समिति के पास न तो कैग की ऑडिट आपत्तियों की जानकारी थी और ना ही थर्मल को बंद करने की सिफारिशों की। समिति के चेयरमैन मोहनलाल गुप्ता से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने किसी भी रिपोर्ट की जानकारी होने से साफ इनकार कर दिया।

 

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अफसरों ने भी किया गुमराह

पीयूसी ने मंगलवार शाम और बुधवार सुबह केएसटीपीएस का निरीक्षण किया। इसके बाद कार्यवाहक मुख्य अभियंता समेत सभी आला अधिकारियों के साथ करीब दो घंटे तक बैठक कर संचालन संबंधी परेशानियों की जानकारी ली, लेकिन थर्मल प्रबंधन तीन साल से आरएसपीसीबी की ओर से प्लांट के संचालन की सहमति न दिए जाने और खामियों को दूर न करने पर संचालन बंद करने की सिफारिशों की जानकारी समिति के सदस्यों को नहीं दी।


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गौरव गिनाया खामियां छिपाई

पीयूसी चेयरमैन मोहनलाल गुप्ता ने बताया कि थर्मल का निरीक्षण कर उसकी कार्यप्रणाली समझी है, ताकि इसमें आगे सुधार किए जा सके। कोटा थर्मल में पिछले साल से प्रॉफिट आया है और कार्य क्षमता में सुधार हुआ है। यहां से बिजली की सप्लाई निरंतर जारी है। प्रदूषण मानकों का उलंघन करने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने ऐसे किसी भी मामले की जानकारी होने से इनकार कर दिया।

 

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हाथ से फिसला मौका

पीयूसी सरकारी उपक्रमों से जुड़ी ऑडिट रिपोर्ट का निस्तारण करने के लिए ऑडिट पैरा के जरिए सामने आने वाली खामियों को दूर कराने के लिए जरूरी इंतजाम कराने की सरकार से सीधी सिफारिश करती है। समिति के सदस्यों को यदि कैग आपत्तियों की जानकारी होती तो निश्चित ही उच्च स्तर पर उसका निस्तारण हो सकता था, लेकिन थर्मल प्रबंधन ने अपनी खामियां छिपाने के लिए यह बड़ा मौका गंवा दिया। ऊपर से पीयूसी के सदस्यों पर लापरवाही के छीटे पड़े सो अलग।

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