Special Story: पसीने से चट्टानों को सींच श्रमवीरों ने उगाए पौधे...वीडियो में देखिये RSC जवानों का ये कमाल

Suraksha Rajora

Publish: May, 31 2019 07:00:00 AM (IST) | Updated: May, 31 2019 07:44:02 PM (IST)

Kota, Kota, Rajasthan, India

 

कोटा. सिर पर हेट, पैरों में मजबूत बूट, हाथ में मोटा सा डंडा और दीन-दुनिया से बेखबर भीड़ का सामना करने को तैयार एक जवान। वर्दी पर ऊंट के निशान। आमतौर पर आरएसी के जवान की जो छवि हमारे मस्तिष्क में उभरती है, वह ऐसी ही होती है। आंदोलन करने वाले और राजनीति से जुड़े अधिकांश लोग इनके डंडे का कमाल देख चुके होंगे। कोटा में ही इन जवानों ने एक और कमाल का काम कर दिखाया है।

 

चट्टानों पर पेड़ लगाना कल्पना से बाहर की बात है, लेकिन कोटा में आरएसी [राज्य सशस्त्र बटालियन] के जवानों ने न सिर्फ पथरीली जमीन पर हजारों पेड़ लगाए, बल्कि उन्हें अपने पसीनें से सींच भी रहे हैं। जवानों ने यहां करीब चार हजार पौधे लगाए, जो पेड़ बन रहे हैं। वहीं अवैध खनन से बने गड्डे को तलाई बना दिया। इसमें कमल खिल रहे हैं। जवानों ने यहां ऐसी मिसाल बना डाली है, जो हरे वृक्षों के लिए तरस रहे नए कोटा को कुछ वर्षों बाद सुकून देगी।


आरएसी के लम्बे चौड़े ग्राउण्ड में करीब १५ बीघा क्षेत्र में अमर वाटिका विकसित की गई है। चट्टानी क्षेत्र होने से इसमें मिट्टी बिछाई और कुछ पौधे लगाए। अब इसमें छोटे-बड़े मिलाकर चार हजार पौधे हैं। इनमें आम, पीपल, बरगद, नीम, करंज, अनार, अमरूद, कचनार, सागवान समेत अन्य पौधे हैं। वाटिका की देखरेख कांस्टेबल हरिसिंह करते हैं।

 

आरएसी के अधिकारियों का कहना है कि उनकी शेष जमीन पथरीली है। इस जमीन पर बिना मिट्टी डाले पेड़ उगा पाना संभव नहीं है। इसलिए अगर कोई सरकारी विभाग, नगर विकास न्यास, नगर निगम अथवा शहर का कोई संगठन पथरीली जमीन पर मिट्टी डलवा दे तो वहां हरियाली का जंगल विकसित किया जा सकता है। आरएसी की यहां करीब दस हजार पेड़ लगाने की योजना है। इससे नए कोटा के इस इलाके में भी काफी हरियाली विकसित हो सकती है। आरएसी का कहना है कि उनके जवान खुद ही पेड़ों की देखभाल करते हैं। इसलिए वहां लगे करीब नब्बे फीसदी पौधे पेड़ बन जाते हैं।


नाले के पानी से सहेजे पेड़

वाटिका के रूप में जवान पर्यावरण संरक्षण के साथ जल संरक्षण का कार्य भी कर रहे हैं। रावतभाटा रोड की ओर से आ रहे नाले के पानी को रोका गया है। इसी पानी को पौधों में डालते हैं। पानी में जो पॉलीथिन आती है, उसे गहरे गढ्ढे में डाल देते हैं, इससे चंबल में गंदगी जाने से रुक जाती है। नाले ने कमल तलैया का रूप ले लिया है।

वेस्ट को बेस्ट बना दिया
परिसर में करीब १५ वर्ष पूर्व विकसित की गई चमन वाटिका वेस्ट को बेस्ट बनाने का उदाहरण पेश कर रही है। खूबसूरत वाटिका परिसर में तालाब है। इस तालाब के आस-पास छोटी-छोटी बेकार की वस्तुओं से सजाया गया है। टिन, मिट्टी के ढेले के लेप लगाए हैं।


मदद मिले तो जंगल खड़ा हो सकता है

यह जगह काफी दिनों से खाली पड़ी हुई थी। विभाग ने इसमें हरियाली करने की योजना बनाई। इसके बाद दो साल पहुले इसमें पौधारोपण शुरू किया। अभी यहां पर ४ हजार पौधे हैं। मैदान में ही खाली पड़े भूभाग को भी इसी तरह से विकसित करना चाहते हैं, लेकिन मिट्टी नहीं होने के कारण थोड़ी समस्या आती है। निगम या प्रशासन सहयोग करे तो हम इसे भी विकसित कर सकते हैं।
- घनश्याम शर्मा, डिप्टी कामांडेंट, आरएसी

 

एक और ऑक्सीजोन के लिए आगे आएं : काटोकी


आएएसी मैदान में नए ऑक्सीजोन की मुहिम से जुडे़ द्वितीय बटालियन आरएसी कमांडेंट राहुल काटोकी ने पत्रिका से बातचीत में कहा, वे जवानों के साथ मिलकर यह कोशिश कर रहे हैं कि शहर में इस क्षेत्र में भी ऑक्सजोन बने। आईएल परिसर में राजस्थान पत्रिका की पहल पर oxygen बनाया जा रहा है। इसमें सरकार भी मदद कर रही है।

 

आरएसी मैदान में जवान और अधिकारी मिलकर ऑक्सीजोन बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इसमें शहर की विभिन्न संस्थाओं और भामाशाहों का सहयोग मिलेगा तो जल्द यह मूर्त रूप ले सकेगा। पिछले साल ४ हजार पौधे लगाए गए, कई पेड़ों में फल आ रहे हैं। यह पथरीला क्षेत्र है, इसलिए मिट्टी की आवश्यकता है। मानव संसाधन की कोई कमी नहीं है। हमारा उद्देश्य केवल पौधा लगाना ही नहीं, उसकी पेड़ बनने तक देखभाल करना है।

 

यहां 500 बीघा में यह क्षेत्र फैला हुआ है, इसे ऑक्सीजोन के रूप में विकसित करने की लिए जनसहयोग की आवश्यकता है। यहां मिट्टी डल जाए तो पौधे लगाना आसान हो जाएगा। इसलिए शहर में एक और ऑक्सीजोन के लिए आगे आने की जरूरत है।

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