अभिभावक ने पीछे खींचे कदम, नहीं भेजेंगे बच्चों को स्कूल

एक तरफ तो राज्य में सितम्बर व अक्टूबर के मध्य में वैज्ञानिकों ने कोरोना की तीसरी लहर की आशंका जताई है, लेकिन इसी बीच राज्य सरकार ने छोटे बच्चों के स्कूल खोलने का भी एलान कर दिया। ऐसे में दो साल बाद छोटे बच्चे स्कूलों में कदम रखेंगे, लेकिन ज्यादातर अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने को तैयार नहीं है।

 

By: Abhishek Gupta

Published: 19 Sep 2021, 02:24 PM IST

कोटा. एक तरफ तो राज्य में सितम्बर व अक्टूबर के मध्य में वैज्ञानिकों ने कोरोना की तीसरी लहर की आशंका जताई है, लेकिन इसी बीच राज्य सरकार ने छोटे बच्चों के स्कूल खोलने का भी एलान कर दिया। ऐसे में दो साल बाद छोटे बच्चे स्कूलों में कदम रखेंगे, लेकिन ज्यादातर अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने को तैयार नहीं है। वे अपने कदम पीछे कर रहे है। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के चलते वे बच्चों की जान को खतरे में नहीं डालना चाहते है।

अभिभावकों का कहना है कि जब वैज्ञानिक सितम्बर के अंतिम व अक्टूबर के पखवाड़े तक तीसरी लहर की आशंका जताई है। त्योहारों पर भीड़ एकत्रित नहीं करने के लिए पाबंद किया जा रहा है। ऐसे में सरकार ने स्कूल खोलने का एलान कर दिया। जबकि छोटे बच्चों को वैक्सीन भी नहीं लगी है। ऐसे में वे बच्चों का खतरा मोल नहीं ले सकते है। क्योंकि छोटे बच्चे कोरोना गाइड लाइन की पालना नहीं कर सकेंगे। कई अन्य राज्यों में जहां स्कूल खोल दिए गए थे। वहां अचानक केस बढ़ गए और कुछ राज्यों ने तो स्कूल वापस बंद करने के आदेश दे दिए। जब सरकार ने दो साल का इंतजार किया है तो दो माह और इंतजार करना चाहिए। ऐसे में राज्य सरकार को भी अपने निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।

यह बोले अभिभावक
- परिस्थितियां अनुकूल होने भेजेंगे
उनका पांच वर्षीय बच्चा निर्मन्यु गोयल को स्कूल नही भेजेंगे, क्योंकि कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है। अक्टूबर के बाद परिस्थितियां अनुकूल होने के बाद ही बच्चे को स्कूल भेजने पर विचार करेंगे।
- राखी गुप्ता, महावीर नगर

- बच्चों को वैक्सीन नहीं लगी बेटा अर्नव शर्मा 8वीं कक्षा में अध्ययनरत है। स्कूल भेजने के बारे में अभी सोचेंगे। अभी बच्चों को वैक्सीन नहीं लगी है। छोटे बच्चे सोशल डिस्टेंसिग व कोविड नियमों का पालन सही तरीके से पालन करेंगे, इसके लिए कह नहीं सकते।
- अनिता शर्मा

- सरकार की जल्दबाजीजब तक छोटे बच्चों के वैक्सीन नहीं आ जाती, तब तक बच्चों को खतरा ही रहेगा। सरकार छोटे बच्चों के लिए इतनी जल्दी क्यों कर रही है। दो साल इंतजार किया, दो माह और इंतजार कर लेते।
- योगिता कछावा

उल्टा सरकार पाबंदियां क्यों लगा रही
उनका बेटा निंकु ज आठवीं कक्षा में अध्यनरत है। सरकार ने अचानक स्कूल खोलने की घोषणा कर दी है। जबकि उल्टा सरकार ही कोरोना को लेकर पाबंदिया लगा रही है। ऐसे पस्थितियां अनुकूल रहने के बाद खोलते तो और अच्छा रहता।
- भारती गुप्ता

जिम्मेदारी किसकी
अभी तक बच्चों के लिए कोई वैक्सीन नहीं आई है। ऐसे में सरकार को स्कूल खोलने में जल्दबाजी नहीं चाहिए थी। छोटे बच्चे अपनी सुरक्षा कैसे कर पाएंगे। स्कूल में बच्चों को कुछ हो जाता है तो जिम्मेदारी किसकी रहेगी, सरकार की या स्कूल प्रशासन की।
-महावीर प्रसाद मेघवाल, सूरसागर

- स्कूल खोलने का निर्णय सही नहीं
छोटे बच्चों में कोरोना की इतनी समझ नहीं है। स्कूल में बच्चों के लिए पानी, लंच, खेलना पहले की तरह ही सामान्य रहेगा। ऐसे में नौनिहालों को संक्रमित होने से कोई नहीं बचा पाएगा यह चिंता परिजनों को सता रही है।
-भीमसिंह राणावत, अम्बेडकर कॉलोनी, कुन्हाड़ी

-सरकार निर्णय पर पुनर्विचार
बच्चों के स्कूल खोलने का राज्य सरकार का गैर जि मेदारना निर्णय है। सरकार ने यह निर्णय निजी स्कूलों के दबाव में लिया है। राज्य सरकार ने चाहे स्कूल खोल दिए, लेकिन अभिभावक अपने छोटे बच्चों के इस वर्ष तो स्कूल नहीं भेजेंगे। सरकार के इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।
-राजेश सरदाना, आदित्य आवास

Abhishek Gupta
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