जिस परियोजना का शिलान्यास राहुल गांधी ने किया, उसका ही विरोध कांग्रेस राज में

परवन की राह में बाधा : किसान बोले, खड़ी फसल में नहीं बिछाने देंगे पाइप

By: Ranjeet singh solanki

Published: 15 Sep 2020, 08:07 PM IST

कोटा, बारां. हाड़ौती की वृहद सिंचाई परियोजना परवन की प्रगति में अब किसान ही बाधा बन गए हैं। किसानों ने स्पष्ट कह दिया कि खड़ी फसल में सिंचाई परियोजना के लिए पाइप लाइन नहीं बिछाने देंगे। सिंचाई के पानी को लेकर भी अपना पक्ष रखा है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ओर से दो दिन पहले बारां जिले में किसानों के साथ जनसुनवाई की थी, इसमें किसान इस सिंचाई परियोजना में पुरानी परियोजना के हिसाब से ही सिंचाई के लिए पानी देने की मांग कर रहे थे, जबकि अधिकारियों ने कहा कि बूंद-बूंद सिंचाई और फव्वारा पद्धति पर आधारित इस परियोजना का नया मॉडल तैयार किया गया है। इसमें सिंचाई का रकबा बढ़कर दो लाख हो गया है। यह आधुनिक तकनीक और शत प्रतिशत पानी के सदुपयोग पर आधारित परियोजना होगी। परियोजना के पूरा होने पर यह बारां, झालावाड़ और कोटा जिले के लिए जीवनरेखा बनेगी। गौरतलब है कि कांग्रेस के पिछले शासन में इस सिंचाई परियोजना का शिलान्यास कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने किया था। कांग्रेस सरकार ने अपने पहले बजट में इसके लिए विशेष बजट जारी किया था। चम्बल की दाईं और बांई मुख्य नहरों में 700 क्यूसेक पानी व्यर्थ बह जाता है। नहरें कच्ची है इस कारण पानी की बर्बादी अधिक होती है। चम्बल का नहरी तंत्र साठ के दशक में विकसित किया था, जब पानी की कोई कमी नहीं होती थी, अब पूरे देश में पानी को लेकर ही त्राहि-त्राहि मची रहती है। इस कारण अब देश में जितनी भी नई वृहद सिंचाई परियोजनाएं बन रही है, वह पाइप लाइन आधारित है। यानी नहरों के पाइप जमीन के अंदर बिछाए जाएंगे और पानी सीधा खेत तक पहुंचेगा। इस सिंचाई पद्धति में पानी की क्षति शून्य मानी जाती है। केन्द्र सरकार फव्वारा और बूंद-बूंद सिंचाई पर ही राशि देती है।

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