जहां सांस लेना भी मुश्किल, वहां पौने चार घंटे में 21 किमी की दौड़

लद्दाख में रविवार को हुई हॉफ मैराथन में कोटा के फिजीशियन डा. संजीव सक्सेना समेत 38 देशों के 2800 प्रतिभागी दौड़े। डॉ. सक्सेना अकेले राजस्थानी थे। 

By: Deepak Sharma

Updated: 11 Sep 2017, 02:10 AM IST

गेस्ट राइटर : डॉ. संजीव सक्सेना, पार्टिसिपेंट, लद्दाख हॉफ मैराथन

कोटा. लद्दाख, जिसे बर्फीला रेगिस्तान भी कहा जाता है, जहां की खूबसूरत झीलें और मठ मन को सम्मोहित कर देते हैं, जो काराकोरम व हिमालय पर्वत शृंखलाओं के बीच मौजूद है, जी हां, मैं उसी लद्दाख में हूं। यहां होने वाली लद्दाख हॉफ मैराथन में हिस्सा लेने आया हूं और हिस्सा लेकर निर्धारित समय में दौड़ पूरी भी कर चुका हूं। यहां दस कदम चलने के बाद ही सांसें फूलने लगती हैं, ऑक्सीजन लेने में शरीर को पूरी ताकत झोंकनी पड़ती है। यह स्थान 11500 फीट ऊंचाई पर है और हॉफ मैराथन में 17600 फीट की ऊंचाई तक लगातार सीधी चढ़ाई थी।

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लद्दाख में हुई इस हॉफ मैराथन में 38 देशों के 2800 प्रतिभागी दौड़े। हर कोई अपने आपको श्रेष्ठ करने की होड़ में लगा था। यह मैराथन दुनिया की सबसे ऊंची जगह पर होने वाली मैराथन है। इसके चलते कुछ संदेह में भी थे कि दौड़ पूरी होगी भी या नहीं। कुछ पूरे उत्साह के साथ मैदान में डटे हुए थे। मैं भी उनके साथ ही था। पूरी उम्मीद थी कि अपने मिशन में कामयाबी हासिल करूंगा। इसके बाद चल पड़े दौड़ में भाग लेने। आखिरकार वह समय आया जब मेडल टाइम समय में रेस पूरी की।

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मोह लेती है सुंदरता
मैराथन के मार्ग में लद्दाख की सुंदरता मन मोह लेती है। बर्फ की सड़क, पहाडिय़ों की चमक, झीलों का शांत पानी सबकुछ ऐसा लगता है मानो किसी ने प्रकृति की दिव्य चित्रकारी की हो।

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आठ दिन पहले पहुंचे
वैसे तो कोटा के स्टेडियम और सड़कों पर दो महीने से इस मैराथन की तैयारी कर रहा था, मगर लद्दाख की आबोहवा से शरीर का तालमेल बनाने के लिए आठ दिन पहले ही यहां पहुंच गया था। यहां हर दिन ऊंचाई पर दौडऩे की प्रैक्टिस की।

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2012 से शुरू हुई ...
इस हॉफ मैराथन को आरआईएमओ एक्सीपीडेशन ने आयोजित किया था। यहां लेह लद्दाख में बाढ़ आने के बाद 2012 में पहली बार मैराथन शुरू हुई थी। इस बार यह छठी प्रतियोगिता रविवार को हुई।

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दौड़ के बारे में
दूरी : 21.1 किमी
मेडल टाइम : 3.45 घंटे
आयु सीमा : 16 वर्ष से अधिक

लद्दाख का इतिहास : झील से घाटी बना
ऐसा माना जाता है कि लद्दाख मूल रूप से किसी बड़ी झील का एक डूब हिस्सा था, जो कई वर्षों के भौगोलिक परिवर्तन के कारण, लद्दाख की घाटी बन गया। अब यह जम्मू और कश्मीर में आता है। 10 वीं शताब्दी के दौरान, लद्दाख, तिब्बती राजाओं के उत्तराधिकारियों के शासन में था। 17 वीं शताब्दी में राजा 'सेनगी नामग्यालÓ के शासनकाल के दौरान, हिमालयन साम्राज्य अपने चरम पर पहुंचा। बाद में, 18 वीं शताब्दी में लद्दाख और बाल्टिस्तान को जम्मू और कश्मीर के क्षेत्र में शामिल किया गया।

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राजस्थान से एकमात्र
इस हॉफ मैराथन में शामिल होने वाले डॉ. संजीव सक्सेना राजस्थान से एकमात्र चिकित्सक थे। विज्ञान नगर निवासी डॉ. सक्सेना एमबीएस हॉस्पिटल में फिजीशियन हैं। वे स्काउट-गाइड व विद्यालयों में फिटनेस व हेल्थअवेयरनेस का कार्य भी करते हैं।

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